यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
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वाशिंगटन/नई दिल्ली, 25 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क तथा युवा आदान-प्रदान को बढ़ाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को अध्ययन और आदान-प्रदान कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए चीन आने का निमंत्रण देगा। शी जिनपिंग ने यह घोषणा 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान की। चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी उनके भाषण में भी इस पहल की पुष्टि की गई है।
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों की उम्मीद दोनों देशों के लोगों में निहित है और इन संबंधों का भविष्य युवा पीढ़ी से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, युवाओं के बीच सीधे संपर्क, अध्ययन, सांस्कृतिक अनुभव और संवाद से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ को मजबूत किया जा सकता है।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों को लेकर प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में संवाद और सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
युवा आदान-प्रदान की यह पहल पूरी तरह नई नहीं है। नवंबर 2023 में सैन फ्रांसिस्को यात्रा के दौरान शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में 50 हजार युवा अमेरिकियों को चीन आमंत्रित करने की घोषणा की थी। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस लक्ष्य को निर्धारित अवधि से लगभग ढाई वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया और 50 हजार से अधिक युवा अमेरिकी चीन की यात्राओं तथा आदान-प्रदान कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं।
इसके बाद अब चीन ने इस पहल का आकार दोगुना करते हुए अगले पांच वर्षों में एक लाख युवाओं को आमंत्रित करने की घोषणा की है। इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के छात्रों, विश्वविद्यालयों, युवा समूहों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच संपर्क को और बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
व्हाइट हाउस में अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने युवाओं को चीन-अमेरिका संबंधों के भविष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता को आगे बढ़ाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
चीनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि दोनों देशों के युवा एक-दूसरे के समाज, संस्कृति और इतिहास को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर हासिल कर सकते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी यात्राएं और अध्ययन कार्यक्रम केवल शैक्षणिक अनुभव तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों के बीच संवाद और आपसी समझ का माध्यम भी बन सकते हैं।
चीन और अमेरिका के बीच युवा आदान-प्रदान के कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सितंबर में चीन के सरकारी पोर्टल ने बताया था कि अमेरिका के 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों ने चीन में युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद शी जिनपिंग को पत्र लिखा था।
इन छात्रों ने चीन में अपने अनुभव साझा करते हुए दोनों देशों के बीच मित्रतापूर्ण सहयोग की इच्छा जताई थी। शी ने अपने जवाब में युवाओं को दोनों देशों के बीच समझ और संवाद बढ़ाने में योगदान देने वाला वर्ग बताया था।
इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित एक लाख युवाओं की पहल में विश्वविद्यालयों, छात्र विनिमय कार्यक्रमों और विभिन्न युवा संपर्क कार्यक्रमों की भूमिका बढ़ सकती है।
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में चीन और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी आक्रमण और फासीवादी ताकतों के खिलाफ चीन और अमेरिका के सहयोग को याद किया।
शी ने कहा कि उस दौर में दोनों देशों के लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी और चीन उस इतिहास को नहीं भूला है। उन्होंने इस साझा ऐतिहासिक अनुभव को दोनों देशों के बीच लोगों की दोस्ती के संदर्भ में पेश किया।
चीनी राष्ट्रपति का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से संवाद और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान चीन-अमेरिका संबंधों और साझा हितों का उल्लेख किया। ट्रंप ने सुरक्षा, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों नेताओं के फैसलों का प्रभाव आने वाले दशकों तक रह सकता है।
ट्रंप और शी की बैठक के एजेंडे में व्यापार, दुर्लभ खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य आर्थिक एवं रणनीतिक विषय भी शामिल रहे हैं। शी की 23 से 25 सितंबर तक की अमेरिका यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक संपर्क के रूप में देखा गया है।
एक लाख युवाओं को चीन आमंत्रित करने की योजना का एक प्रमुख पहलू शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान है। चीन की ओर से ऐसे कार्यक्रमों को दोनों समाजों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क बढ़ाने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
विद्यार्थी चीन के विश्वविद्यालयों, ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक संस्थानों और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं। इसी तरह ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अमेरिकी युवाओं को चीन की भाषा, इतिहास, संस्कृति और समकालीन समाज को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि इस घोषणा में अभी प्रत्येक कार्यक्रम की विस्तृत संरचना, चयन प्रक्रिया और अलग-अलग श्रेणियों में युवाओं की संख्या का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में चीन-अमेरिका संबंधों के व्यापक संदर्भ में प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच संतुलन की बात भी कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन इसे स्वस्थ और सीमित दायरे में रखा जाना चाहिए। उन्होंने संघर्ष और टकराव से बचने तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद और संकट-संचार तंत्र बनाए रखने पर भी जोर दिया।
यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन और अमेरिका के बीच व्यापार तथा तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी मतभेद बने हुए हैं।
चीन-अमेरिका संबंध अब केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, उच्च तकनीक और रणनीतिक तकनीकों का क्षेत्र भी दोनों देशों के बीच बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
ट्रंप और शी की हालिया बैठक में भी एआई और तकनीक से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता मिली। अमेरिकी और चीनी कंपनियां इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, जबकि दोनों देशों की सरकारें तकनीकी सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को लेकर अलग-अलग नीतियां अपना रही हैं।
ऐसे माहौल में युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच आदान-प्रदान को दोनों देशों के बीच गैर-सरकारी स्तर के संपर्क के एक अलग चैनल के रूप में देखा जा सकता है।
दोनों देशों के बीच सरकारी स्तर की बातचीत के अलावा लोगों के बीच संपर्क को भी लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। छात्र, शिक्षक, शोधकर्ता, कलाकार, कारोबारी और सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल एक-दूसरे के देशों का दौरा करते रहे हैं।
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में इसी तरह के लोगों के बीच संपर्क को चीन-अमेरिका संबंधों के भविष्य से जोड़ा। उनका संदेश था कि सरकारों के बीच बातचीत के साथ-साथ दोनों देशों की जनता के बीच प्रत्यक्ष संबंध भी बनाए रखना आवश्यक है।
2023 में घोषित 50 हजार युवाओं की योजना का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा होने के बाद अब नई योजना के तहत संख्या को दोगुना किया गया है।
पुरानी पहल: 50 हजार युवा अमेरिकी, पांच वर्षों में।
नई घोषणा: एक लाख युवा अमेरिकी, अगले पांच वर्षों में।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक पहली पहल के तहत 50 हजार से अधिक युवा चीन आ चुके हैं।
इस तरह नई घोषणा केवल एक नया लक्ष्य नहीं है, बल्कि पहले से चल रही युवा आदान-प्रदान नीति के विस्तार के रूप में भी सामने आई है।
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में चीन-अमेरिका संबंधों के प्रतीक के तौर पर पांडा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पांडा दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती का दूत रहा है।
उन्होंने बताया कि दो पांडा—पिंग पिंग और फू शुआंग—जल्द ही अटलांटा के चिड़ियाघर में अपने नए घर पहुंचेंगे और अमेरिकी लोगों से मिलेंगे।
पांडा कूटनीति चीन की अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कूटनीति का लंबे समय से चर्चित हिस्सा रही है और चीन-अमेरिका संबंधों में भी इसका प्रतीकात्मक महत्व रहा है।
युवा आदान-प्रदान की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब चीन और अमेरिका के रिश्ते बहुआयामी चुनौतियों से गुजर रहे हैं। व्यापार, तकनीक, सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति शृंखला, दुर्लभ खनिज और एआई जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित कई बार अलग-अलग दिखाई देते हैं।
इसके बावजूद दोनों सरकारें बातचीत के रास्ते खुले रखने पर जोर दे रही हैं। शी की अमेरिका यात्रा के दौरान भी दोनों पक्षों ने सहयोग के क्षेत्रों और मतभेदों को संभालने की आवश्यकता पर चर्चा की। चीन के विदेश मंत्रालय ने यात्रा को संवाद बढ़ाने, मतभेदों को प्रबंधित करने और सहयोग को बढ़ावा देने के संदर्भ में पेश किया है।
एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने की घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें दोनों देशों के भविष्य के संबंधों को नई पीढ़ी से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
जो अमेरिकी छात्र चीन जाएंगे, उन्हें वहां के समाज और संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिलेगा। वहीं चीनी छात्रों और युवाओं के साथ संवाद उन्हें दोनों देशों के बीच समानताओं और मतभेदों को व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर समझने का अवसर दे सकता है।
शी जिनपिंग ने इसी व्यापक विचार को अपने संबोधन में रेखांकित किया कि चीन-अमेरिका संबंध केवल सरकारों के बीच का संबंध नहीं है, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भी गहरा संपर्क इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अब नई योजना के क्रियान्वयन, कार्यक्रमों की संख्या, छात्र चयन, विश्वविद्यालयों की भागीदारी और यात्रा के अवसरों पर नजर रहेगी। यदि लक्ष्य के अनुरूप कार्यक्रम आगे बढ़ते हैं तो अगले पांच वर्षों में चीन जाने वाले अमेरिकी युवाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
इस पहल का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आदान-प्रदान कार्यक्रम कितने व्यापक, नियमित और विविध बनाए जाते हैं तथा दोनों देशों के छात्रों और संस्थानों को इनमें किस प्रकार की भागीदारी मिलती है।
शी जिनपिंग की ओर से एक लाख युवा अमेरिकियों को अगले पांच वर्षों में चीन आमंत्रित करने की घोषणा चीन-अमेरिका संबंधों में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की एक बड़ी पहल है। वर्ष 2023 में घोषित 50 हजार युवाओं के लक्ष्य के समय से पहले पूरा होने के बाद अब इसकी संख्या दोगुनी की गई है।
व्हाइट हाउस में शी ने इस पहल को दोनों देशों के युवाओं और भविष्य के संबंधों से जोड़ा। वहीं ट्रंप ने सुरक्षा, तकनीक और एआई सहित साझा हितों पर जोर दिया। ऐसे में युवा आदान-प्रदान, शिक्षा और सांस्कृतिक संपर्क आने वाले वर्षों में चीन-अमेरिका संबंधों का एक महत्वपूर्ण जन-स्तरीय आयाम बन सकते हैं।


