17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
बालैनी। ऐतिहासिक पुरामहादेव स्थित भगवान परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास के चौथे एवं अंतिम सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान आशुतोष के दर्शन और भगवान परशुराम द्वारा स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुबह होते-होते मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के मार्गों पर भी शिवभक्तों की भीड़ बढ़ती चली गई। हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से वातावरण शिवमय नजर आया।
श्रावण मास के अंतिम सोमवार होने के कारण इस बार श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरामहादेव पहुंचे। कई श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री लेकर घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। कांवड़िये भी भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए मंदिर पहुंचे।
सोमवार को तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे सुबह आगे बढ़ी, वैसे-वैसे दर्शनार्थियों की कतारें लंबी होती चली गईं। कतार में खड़े श्रद्धालु शांत भाव से भगवान शिव का स्मरण करते रहे। कोई शिवाष्टक का पाठ करता दिखाई दिया तो कोई ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए अपनी बारी की प्रतीक्षा करता रहा।
श्रद्धालुओं के हाथों में जलपात्र और पूजन सामग्री देखकर मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कई श्रद्धालु परिवार सहित मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद पुलिस प्रशासन, प्रशासनिक अधिकारियों और मंदिर समिति के बीच बेहतर समन्वय के चलते दर्शन एवं जलाभिषेक की व्यवस्था सुचारु बनी रही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मंदिर समिति की ओर से वालंटियर्स भी लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे।
वालंटियर्स और पुलिसकर्मियों की सक्रियता के चलते कतारों में धक्का-मुक्की की स्थिति नहीं बनने दी गई। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी दर्शन करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। भीड़ बढ़ने के बावजूद श्रद्धालुओं में भी व्यवस्था के प्रति सहयोग का भाव दिखाई दिया।
मंदिर परिसर के आसपास सुबह से ही ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारे गूंजते रहे। घंटियों की आवाज और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। मंदिर के आसपास मौजूद दुकानों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। बेलपत्र, पुष्प, प्रसाद और पूजन सामग्री की खरीदारी करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती रही।
श्रद्धालुओं का कहना था कि सावन के सोमवार को पुरामहादेव में भगवान शिव का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व माना जाता है। यही वजह है कि लोग दूर-दराज से यहां पहुंचकर अपनी आस्था के अनुसार भगवान आशुतोष का अभिषेक करते हैं।
पुरा महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी जय भगवान शर्मा तथा मंदिर समिति के संजीव शर्मा ने बताया कि सोमवार सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में सामान्य दिनों में भी श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या रहती है, लेकिन श्रावण मास में सोमवार और कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि वर्षभर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं संचालित रहती हैं, लेकिन श्रावण मास में विशेष भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए जाते हैं। मंदिर समिति, पुलिस और प्रशासन के सहयोग से श्रद्धालुओं को सुविधाजनक तरीके से दर्शन कराने का प्रयास किया जाता है।
मंदिर समिति के पदाधिकारी संजीव शर्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में भी लगभग 20 से 30 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन पुरामहादेव मंदिर में पहुंचते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या इससे कई गुना अधिक रहने का अनुमान है। सुबह से लगातार जारी भीड़ को देखते हुए देर शाम तक दर्शनार्थियों का आंकड़ा करीब एक लाख तक पहुंचने की संभावना जताई गई।
उन्होंने कहा कि सावन मास के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहेगी। पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर भी बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिर पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए मंदिर समिति की ओर से व्यवस्थाओं को यथावत बनाए रखने की तैयारी की गई है।
भीड़ को नियंत्रित करने में मंदिर समिति के वालंटियर्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। कतारों में लगे श्रद्धालुओं को लगातार आगे बढ़ाने, बुजुर्गों और महिलाओं को आवश्यक सहयोग देने तथा भीड़ को एक स्थान पर जमा होने से रोकने के लिए वालंटियर्स सक्रिय रहे।
मंदिर परिसर में प्रवेश और निकासी को व्यवस्थित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। श्रद्धालुओं को अलग-अलग कतारों के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया गया, जिससे अत्यधिक भीड़ के बावजूद व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति नहीं बनी।
सावन के चौथे सोमवार का असर केवल पुरामहादेव मंदिर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिलेभर के प्रमुख शिव मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। शिवभक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, पुष्प, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। मंदिरों में सुबह से ही घंटियों की आवाज, मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देते रहे।
कई मंदिरों में भोर से ही विशेष पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई थी। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की।
पुरामहादेव मंदिर में श्रावण मास के दौरान श्रद्धालुओं के साथ-साथ वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधिकारी भी भगवान आशुतोष के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पहुंचते रहे हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार धार्मिक अवसरों पर मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
श्रावण मास के चौथे सोमवार को भी मंदिर परिसर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ बने रहने की संभावना है। भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस और मंदिर समिति के वालंटियर्स को भीड़ प्रबंधन में लगातार जुटे रहने के निर्देश दिए गए।
सावन के अंतिम सोमवार को जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। कई परिवारों ने इसे सावन की विशेष धार्मिक यात्रा के रूप में लिया। श्रद्धालुओं ने कतार में खड़े होकर भगवान शिव का नाम जपा और अपनी बारी आने पर विधि-विधान से जलाभिषेक किया।
कुल मिलाकर सावन के चौथे सोमवार को पुरामहादेव में भक्ति, आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह के ब्रह्ममुहूर्त से शुरू हुई श्रद्धालुओं की कतारें दिन चढ़ने के साथ लगातार लंबी होती गईं। प्रशासन, पुलिस और मंदिर समिति के समन्वित प्रयासों से भारी भीड़ के बावजूद दर्शन और जलाभिषेक की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चलती रही। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष के बीच पुरामहादेव की धरती देर शाम तक शिवभक्ति में डूबी रही।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


