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- 13h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति सदियों से प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश देती रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए केवल आधुनिक समय की आवश्यकता नहीं, बल्कि उसकी जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है। इसी अनुभव के आधार पर भारत आज दुनिया के सामने आधुनिक जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए समाधान और सामूहिक प्रयास का आह्वान कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना समय की आवश्यकता है। एनजीटी जैसे संस्थानों की भूमिका पर्यावरण संरक्षण और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में प्रकृति को हमेशा जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। नदियों, पर्वतों, वनों और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान भारतीय परंपरा में लंबे समय से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि भारत की यह सोच आज वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में और अधिक प्रासंगिक हो गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी मानवता के सामने बड़ी चुनौती है। इसका प्रभाव केवल किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सभी हिस्सों में मौसम, कृषि, जल संसाधन, जैव विविधता और मानव जीवन पर पड़ रहा है। ऐसे में किसी एक देश के प्रयास पर्याप्त नहीं हो सकते। इसके लिए सभी देशों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी जरूरतों के अनुरूप पर्यावरणीय नीतियां बना रहा है, बल्कि दुनिया के साथ अपने अनुभव और समाधान साझा करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारत में सौर ऊर्जा के तेजी से विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 12 वर्ष पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा व्यवस्था में आए बड़े बदलाव का उदाहरण बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा को केवल बड़े बिजली संयंत्रों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे आम परिवारों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से देश के घरों को केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन की इकाई बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। छतों पर सौर पैनल लगाकर परिवार अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकें, इस दिशा में सरकार प्रोत्साहन दे रही है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, अब तक 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत में विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत पात्र परिवारों को करीब 80 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी गई है।
उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर से एक ओर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी ओर परिवारों के बिजली खर्च को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे ऊर्जा उत्पादन में आम नागरिक की भागीदारी बढ़ती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से भारत के गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोतों के विस्तार और कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता में कमी का उल्लेख किया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत का अनुभव यह बताता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। उन्होंने इसे नए भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौती का समाधान केवल राष्ट्रीय प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए तकनीक, वित्त, नवाचार और संसाधनों को साझा करते हुए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना होगा।
उन्होंने भारत की कई अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख किया। इनमें अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन और मिशन लाइफ जैसी पहल शामिल हैं।
पीएम मोदी ने ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ की परिकल्पना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध सौर ऊर्जा की क्षमता का बेहतर उपयोग करने और स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक विस्तार की दिशा में सहयोग बढ़ाना है।
प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकारों और संस्थानों की भूमिका पर निर्भर रहने के बजाय आम नागरिकों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मिशन लाइफ यानी Lifestyle for Environment का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति जलवायु संरक्षण में योगदान दे सकता है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बचत, पानी का संरक्षण, प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल जैसे छोटे-छोटे कदम व्यापक बदलाव ला सकते हैं।
कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने विकसित और विकासशील देशों के बीच अंतर की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी को लेकर विकासशील देशों पर अधिक दबाव डालने की कोशिश की जाती रही है, जबकि ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक विकास और उत्सर्जन में विकसित देशों की बड़ी भूमिका रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में लगभग छह गुना अधिक है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत इस अंतर को हर वैश्विक मंच पर सामने रखता रहा है। उनके अनुसार, जलवायु न्याय की चर्चा में देशों की जनसंख्या, विकास की जरूरतों और प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को ध्यान में रखना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने विकास की बड़ी जरूरतें हैं। देश की बड़ी आबादी को बेहतर आवास, बिजली, परिवहन, रोजगार और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके साथ ही पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत का प्रयास विकास की गति को बनाए रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है। इसलिए आज लिए गए फैसलों का प्रभाव आने वाले दशकों तक दिखाई देगा। उन्होंने दुनिया के देशों से दीर्घकालिक सोच के साथ जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
सम्मेलन के दौरान एनजीटी के मोबाइल ऐप के शुभारंभ को पर्यावरणीय न्याय व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संबंधी विवादों और मामलों के निपटारे में तकनीक की भूमिका बढ़ने से आम लोगों को जानकारी और न्यायिक प्रक्रिया तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, न्यायिक व्यवस्था और तकनीकी नवाचार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का पर्यावरणीय दृष्टिकोण केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विकास, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों को भी शामिल किया गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी एक सरकार, संस्था या देश की समस्या नहीं है। इसका समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तकनीक और संसाधनों के आदान-प्रदान के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करने और अन्य देशों के अनुभवों से सीखने के लिए तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पर्यावरण और जलवायु से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मंच वैश्विक सहयोग को नई गति देंगे।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरागत पर्यावरणीय सोच और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं का मेल जलवायु चुनौतियों से निपटने में उपयोगी साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों, न्यायविदों, पर्यावरणविदों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से इस दिशा में सामूहिक प्रयास तेज करने का आह्वान किया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


