रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिवम द्विवेदी को जन्मदिन पर भेजा शुभकामना संदेश एवं आशीर्वाद, हरदोई में समर्थकों और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जोरदार राजनीतिक मोर्चा खोला। रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने एक मंच पर एकजुट होकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए।
रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने देश के संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों की आवाज पर हमला किया है। हालांकि राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति से नफरत नहीं करते और न ही हिंसा में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
रैली में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव सहित INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनका इस्तीफा लेने, एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने जैसी मांगें उठाईं।
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से व्यक्तिगत रूप से नफरत नहीं करते। लेकिन उनके अनुसार इन तीनों ने देश की आत्मा, संविधान और लोकतंत्र पर हमला किया है।
राहुल गांधी ने कहा, “न हम मोदी से नफरत करते हैं, न अमित शाह से और न ज्ञानेश कुमार से। मगर आप तीनों ने देश की आत्मा पर आक्रमण किया है। आपने देश के संविधान और लोकतंत्र पर हमला किया है। मेरे लिए कोई दुश्मन नहीं है। हमारे लिए सबसे जरूरी चीज धर्म से भी जरूरी चीज हिंदुस्तान के नागरिक की आवाज है।”
उन्होंने कहा कि भारत में प्रत्येक नागरिक की आवाज का सम्मान होना चाहिए। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, समुदाय या वर्ग से संबंध रखता हो, उसके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की लड़ाई अहिंसा और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि किसी के खिलाफ हिंसा नहीं की जाएगी, किसी को मारा या काटा नहीं जाएगा, लेकिन संविधान को नष्ट करने की कोशिशों का विरोध जरूर किया जाएगा।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सबसे पीछे खड़े व्यक्ति की आवाज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति को भी अपनी बात कहने और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, मजदूर, युवा, महिलाएं, दलित, अल्पसंख्यक और दिव्यांग सहित हर नागरिक की आवाज की रक्षा होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है, जबकि भारत की जनता मोहब्बत, भाईचारा और एकता चाहती है। उन्होंने रैली में मौजूद लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि देश को नफरत से बचाने और आपसी सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की है।
उनके अनुसार ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या नेता का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की सामूहिक आवाज है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में देश की आर्थिक व्यवस्था और बड़े उद्योगपतियों की भूमिका को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं और संसाधनों पर कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों का प्रभाव बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश नहीं होना चाहिए जहां कुछ ही लोगों के पास आर्थिक और संस्थागत ताकत केंद्रित हो जाए। राहुल गांधी ने अदाणी समूह का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के हवाई अड्डों, रेलवे, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कुछ लोगों का नियंत्रण बढ़ने की स्थिति चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों का लाभ आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों और युवाओं तक पहुंचना चाहिए। देश की अर्थव्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें मेहनत करने वाले व्यक्ति को उसकी मेहनत का उचित फल मिले।
राहुल गांधी ने कहा कि किसान का बेटा मेहनत करे तो उसे उसकी मेहनत का परिणाम मिलना चाहिए और विद्यार्थी 18 घंटे पढ़ाई करे तो उसके परिश्रम का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत किसी एक या दो उद्योगपतियों का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों का है।
राहुल गांधी ने बड़े उद्योगपतियों और आम नागरिकों के साथ होने वाले आर्थिक व्यवहार की तुलना करते हुए कहा कि देश में आर्थिक न्याय सुनिश्चित होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने में तेजी दिखाई जाती है, जबकि गरीब और किसान कर्ज के बोझ से परेशान रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई गरीब व्यक्ति या किसान कर्ज लेता है और उसे चुकाने में असमर्थ होता है तो उसे कठोर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा भारत नहीं होना चाहिए जहां आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को न्याय पाने में कठिनाई हो और ताकतवर लोगों को विशेष सुविधाएं मिलें। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक समानता को लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी बताया।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
राहुल गांधी ने मंच से दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि वोट चोरी का आरोप सामान्य मामला नहीं है, क्योंकि यह सीधे देश के नागरिकों के मताधिकार और लोकतांत्रिक आवाज से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने अपने भाषण में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जेल जाने तक की बात कही। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप और भविष्य को लेकर किया गया दावा है; इसे किसी न्यायिक निष्कर्ष या सिद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, न्यायपालिका, पुलिस, नौकरशाही, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से मजबूत नहीं होता, बल्कि इसके लिए स्वतंत्र संस्थाएं, निष्पक्ष प्रशासन, पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी आवश्यक है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र सरकार पर संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संस्थाएं किसी राजनीतिक दल या नेता की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे देश के युवाओं और आम नागरिकों के भविष्य से जुड़ी हुई हैं।
रैली के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अधिकार देता है और कोई भी व्यक्ति, चाहे उसके पास कितनी भी राजनीतिक शक्ति या धन क्यों न हो, संविधान से बड़ा नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है। संविधान की रक्षा करना केवल विपक्षी दलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा, किसान और मजदूर लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देंगे। उन्होंने रैली में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह संदेश केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के हर गांव और शहर तक पहुंचना चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में 2024 के लोकसभा चुनाव और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश में कई वर्षों से वोट चोरी हो रही है और विभिन्न राज्यों में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों के चुनावों का उल्लेख करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के चुनाव के बाद 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और लगभग 15 प्रतिशत मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाते हैं तो इसका सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस विषय पर पारदर्शी जवाब देने की मांग की।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों और उनके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि तथा आधिकारिक विवरण इस समाचार सामग्री में उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत इन आंकड़ों को उनके दावे के रूप में ही समझा जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रामलीला मैदान से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से लोगों को परेशानी हुई और इसके जरिए भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए पीछे हटने वाला नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया में भी अनियमितताएं हुईं और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उनके अनुसार विपक्षी दलों को जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठानी होगी।
ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्षी दलों ने हार स्वीकार नहीं की है, बल्कि उनके अनुसार कई जगहों पर जनादेश को प्रभावित किया गया। ये सभी आरोप उनके राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थे।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 27 लाख वोट काटे गए हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि इन आंकड़ों को प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के आधार पर देखा जाए तो हर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या प्रभावित हुई है।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता के मताधिकार का सम्मान होना चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में काशी और उत्तर प्रदेश की राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा पर चुनावी साजिश करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्षी दलों ने पहले भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतें उठाई थीं।
उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर पर जानकारी जुटाकर चुनाव आयोग को शपथपत्र के माध्यम से शिकायतें दी थीं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग को निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से काम करना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्षी दल लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए एकत्र हुए हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर युवाओं, दलितों तथा महिलाओं के वोट छीनने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
खरगे ने कहा कि विपक्षी दल केंद्रीय जांच एजेंसियों से डरने वाले नहीं हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष को एकजुट रहना होगा।
उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय है।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने रैली में कहा कि देश में वोट चोरी की शुरुआत बिहार से हुई थी। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उसे दो नंबरी सरकार बताया।
तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के वोट की अहमियत सबसे अधिक है और चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होकर मतदाता अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।
इंडिया ब्लॉक की रैली में आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का अस्तित्व जनता के समानता और मौलिक अधिकारों पर आधारित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। अपने भाषण में उन्होंने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत का इतिहास किसी एक संगठन या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी, लोकतंत्र और संविधान का इतिहास व्यापक जनभागीदारी और संघर्षों से बना है।
रामलीला मैदान में आयोजित इस महारैली के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव सुधार और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से संबंधित कई प्रमुख मांगें उठाईं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए या उनका इस्तीफा लिया जाए।
एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
चुनाव में ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से मतदान कराने की व्यवस्था लागू की जाए।
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत किया जाए।
प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा की जाए।
रामलीला मैदान की इस रैली ने एक बार फिर देश में चुनावी पारदर्शिता, ईवीएम, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की भूमिका को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा होना जरूरी है। यदि मतदाता सूची, मतदान और मतगणना को लेकर सवाल उठते हैं तो उनका जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, रैली में लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत आंकड़ों की पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड, निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण और स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होंगे। राजनीतिक आरोप और प्रमाणित तथ्य अलग-अलग विषय हैं, इसलिए प्रत्येक दावे का मूल्यांकन उपलब्ध दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में INDIA गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अपनी चिंताओं को जोरदार तरीके से सामने रखा।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए, वहीं उन्होंने अहिंसा, मोहब्बत, भाईचारे और संविधान की रक्षा को अपनी लड़ाई का आधार बताया।
ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे और तेजस्वी यादव ने भी अपने-अपने राज्यों और राजनीतिक अनुभवों के आधार पर मतदाता सूची तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए।
इस रैली का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही रहा कि विपक्ष आने वाले समय में मतदाता अधिकार, चुनाव आयोग की जवाबदेही और लोकतंत्र की सुरक्षा को लेकर अपना आंदोलन जारी रखने का संकेत दे रहा है। अब इस पूरे विवाद में निर्वाचन आयोग और संबंधित संस्थाओं की ओर से आने वाला आधिकारिक पक्ष तथा दावों की तथ्यात्मक जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी।
रामलीला मैदान में राहुल गांधी का बड़ा हमला: मोदी-शाह और ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, INDIA गठबंधन ने उठाई चुनाव सुधारों की मांग
वोट बचाओ, देश बचाओ रैली: राहुल गांधी बोले—देश की आत्मा और संविधान पर हुआ हमला
दिल्ली में INDIA गठबंधन की महारैली, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेरा
राहुल गांधी का ऐलान—ज्ञानेश कुमार को हटाया जाएगा, वोट चोरी के आरोपों पर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
रामलीला मैदान से विपक्ष की हुंकार: बैलेट पेपर की वापसी और SIR पर रोक की मांग
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, खरगे और तेजस्वी यादव ने भी चुनाव प्रक्रिया, SIR और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी, रामलीला मैदान रैली, वोट बचाओ देश बचाओ, INDIA गठबंधन, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त, SIR प्रक्रिया, वोट चोरी, चुनाव आयोग, ईवीएम, बैलेट पेपर, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव, भारतीय लोकतंत्र, संविधान बचाओ, दिल्ली महारैली
रामलीला मैदान से INDIA गठबंधन की हुंकार! ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में राहुल गांधी ने मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, खरगे और तेजस्वी यादव ने भी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष ने SIR पर रोक, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


