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- 13h ago
नई दिल्ली। देश में लोकतंत्र की रक्षा और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी राजनीतिक विरोध के बीच कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन के तीसरे दिन दिल्ली स्थित महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर प्रार्थना और सत्याग्रह किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस नेताओं ने अपने आंदोलन को अहिंसक बताते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
राजघाट पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि देश में मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं और इनका समाधान जरूरी है। कांग्रेस ने अपने विरोध को महात्मा गांधी के सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों से जोड़ते हुए आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कही।
राजघाट पर नेताओं की मौजूदगी और उनके बयानों के बाद राजनीतिक माहौल में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिली। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाता के वोट का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। वहीं, पार्टी ने अपने आरोपों के आधार पर जवाबदेही की मांग भी दोहराई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उनके विरोध प्रदर्शन का यह तीसरा दिन है। उनके मुताबिक, पार्टी ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हुए जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि पर पहुंचकर प्रार्थना की कि केंद्र सरकार को सद्बुद्धि मिले और कथित ‘वोट चोरी’ की गतिविधियां बंद हों।
खरगे ने कहा कि मतदाताओं के वोट देने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए और चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता के आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कथित वोट चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों से इस्तीफे की मांग भी की।
कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से स्पष्ट है कि पार्टी अपने आंदोलन को केवल एक दिन के विरोध तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े व्यापक मुद्दों के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने के लिए सत्याग्रह का रास्ता अपनाया जा रहा है। राजघाट पर प्रार्थना के जरिए कांग्रेस ने अपने आंदोलन को महात्मा गांधी की अहिंसा और सत्य की परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया।
कांग्रेस के तीसरे दिन के प्रदर्शन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पार्टी के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। दोनों नेताओं की राजघाट पर मौजूदगी को पार्टी के आंदोलन के प्रति समर्थन के तौर पर देखा गया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे महात्मा गांधी से प्रेरणा लेने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के संकल्प के साथ राजघाट पहुंचे थे। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और जनता से जुड़े सवाल उठाना विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राजघाट पर कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकारों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना है।
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन को अहिंसक बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। कांग्रेस का दावा है कि शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से वह जनता के बीच अपने मुद्दों को पहुंचाना और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगना चाहती है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने राजघाट से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी के नेता महात्मा गांधी से प्रेरणा और आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सत्याग्रह पूरी तरह गैर-हिंसक तरीके से जारी रहेगा।
खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सद्बुद्धि मिले और वे अपने पद से इस्तीफा दें। उनके अनुसार, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और लोकतंत्र की सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक कांग्रेस का सत्याग्रह जारी रहेगा।
पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें भी सद्बुद्धि मिले, ताकि वे गलत काम छोड़कर देश के हित में काम करें।
कांग्रेस नेता के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी ने अपने विरोध के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया से संबंधित आरोपों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के पद को लेकर जवाबदेही की मांग भी रखी है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप और इस्तीफे की मांग पार्टी का राजनीतिक रुख हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का जवाब अलग से देखना आवश्यक है।
राजघाट पर आयोजित सत्याग्रह के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से संबंधित अपनी चिंताओं को सामने रखते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।
पार्टी का आरोप है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसी आधार पर कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
चुनाव आयोग देश में चुनावों के संचालन और संबंधित प्रक्रियाओं की निगरानी करने वाली संवैधानिक संस्था है। इसलिए चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोप राजनीतिक और संस्थागत, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे मामलों में आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित संस्थाओं के जवाब और लागू कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर स्थिति का आकलन करना आवश्यक होता है।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वह आंदोलन जारी रखेगी। इस रुख से संकेत मिलता है कि पार्टी आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बनाए रखने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस के संगठन महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने राजघाट पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने देश की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया था और उनका सत्याग्रह आज भी लोकतांत्रिक संघर्ष के लिए प्रेरणा देता है।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजघाट पर महात्मा गांधी को याद करना और उनसे प्रेरणा लेना जनता को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। उनके मुताबिक, कांग्रेस का आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर है।
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि पार्टी अपने आंदोलन की अगली रणनीति के बारे में जल्द जानकारी देगी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व विरोध प्रदर्शन को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
कांग्रेस की ओर से सत्याग्रह को गांधीवादी परंपरा से जोड़ने का प्रयास पार्टी के आंदोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि को सामने लाता है। पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध के माध्यम से सरकार और संबंधित संस्थाओं तक अपनी मांगें पहुंचाई जाएंगी।
राजघाट पर प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा से जुड़ा एक अन्य विवाद भी चर्चा में रहा। महिला पुलिसकर्मी को कोहनी मारने के आरोपों पर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने उनका बचाव किया।
प्रतापगढ़ी ने कहा कि प्रियंका गांधी अपने कार्यकर्ताओं को बचाने का प्रयास कर रही थीं। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति को बचाते समय यदि हल्का धक्का लग जाता है, तो उसे जानबूझकर धक्का मारने की घटना नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने भाजपा पर इस मामले को लेकर गलत माहौल बनाने का आरोप लगाया। प्रतापगढ़ी ने कहा कि ऐसे आरोपों और अफवाहों के जरिए कांग्रेस के सत्याग्रह तथा विरोध प्रदर्शन से जनता का ध्यान नहीं भटकाया जा सकता।
यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बन गया है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों का निष्पक्ष आकलन करने के लिए उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित पक्षों के दावों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। किसी आरोप को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है।
राजघाट पर कांग्रेस के सत्याग्रह ने चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और विपक्ष के विरोध के अधिकार से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस ने कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
इस राजनीतिक विवाद के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा, मतदाता के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे विषय हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान तथ्यात्मक जांच, संस्थागत प्रक्रियाओं और सार्वजनिक जवाबदेही के माध्यम से किया जाना महत्वपूर्ण है।
विपक्षी दलों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन अपनी मांगें सार्वजनिक करने का एक माध्यम है। वहीं, लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित तथ्यों, साक्ष्यों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर होना चाहिए।
कांग्रेस ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद सत्याग्रह जारी रखने की घोषणा की है। पार्टी नेतृत्व ने आगे की रणनीति जल्द सामने लाने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस अपने आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाती है और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित उठाए गए सवालों पर क्या संस्थागत या राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आती है।
फिलहाल राजघाट पर आयोजित सत्याग्रह के जरिए कांग्रेस ने लोकतंत्र, मताधिकार और चुनावी जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में रखा है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस विरोध प्रदर्शन को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन दिया है। हालांकि, कांग्रेस के आरोपों, इस्तीफे की मांग और घटना से जुड़े विवादों पर अंतिम निष्कर्ष तथ्यों तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


