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- 11h ago
नई दिल्ली। दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित बैठक में किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना के लिए राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली सहित संबंधित राज्यों की भागीदारी रही। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस समझौते को राज्यों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय की महत्वपूर्ण मिसाल बताया। उन्होंने परियोजना के लिए केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्यों के बीच सहमति और सहयोग की भावना को मजबूत किया है। उनके अनुसार, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के कारण लंबे समय से विभिन्न कारणों से अटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल रहा है।
उन्होंने कहा कि जल संसाधनों से जुड़ी परियोजनाएं केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनका सीधा संबंध आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा, कृषि, पेयजल उपलब्धता और क्षेत्रीय विकास से होता है। ऐसे में किशाऊ बांध परियोजना के लिए हुआ समझौता संबंधित राज्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश को कई बड़ी जल परियोजनाओं और जल समझौतों का लाभ मिला है। उन्होंने यमुना जल समझौता, रामजल सेतु लिंक परियोजना, नर्मदा जल समझौता और किशाऊ बांध परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से राजस्थान की दीर्घकालिक जल आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान भौगोलिक रूप से ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां जल संसाधनों की उपलब्धता और उनका समान एवं प्रभावी वितरण हमेशा महत्वपूर्ण विषय रहा है। ऐसे में अंतरराज्यीय जल समझौतों के माध्यम से प्रदेश को अतिरिक्त जल संसाधनों का लाभ मिलना कृषि, पेयजल और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जल समझौते केवल सरकारों के बीच होने वाले प्रशासनिक समझौते नहीं हैं, बल्कि इनका व्यापक प्रभाव आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है। पर्याप्त जल उपलब्ध होने से किसानों को सिंचाई सुविधा, शहरों और गांवों को पेयजल तथा विभिन्न क्षेत्रों को विकास के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार, किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना से राजस्थान सहित छह राज्यों में सिंचाई, पेयजल और अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। परियोजना के माध्यम से जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना के आगे बढ़ने से संबंधित राज्यों में जल प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों को लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में भी परियोजना की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल उपलब्धता बढ़ने से केवल कृषि क्षेत्र ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि इससे उद्योग, शहरी विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस प्रकार जल परियोजनाएं किसी क्षेत्र के समग्र विकास की आधारशिला बन सकती हैं।
किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना लंबे समय से चर्चा में रही है। अलग-अलग राज्यों की आवश्यकताओं और जल बंटवारे से जुड़े विषयों के कारण परियोजना को लेकर सहमति बनाने में समय लगा। अब केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच एमओयू होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने अंतरराज्यीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। राज्यों के बीच जल संसाधनों को लेकर सहमति बनाना अक्सर जटिल प्रक्रिया होती है। ऐसे में समझौते के माध्यम से साझा हितों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जल संसाधनों से जुड़े ये समझौते आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण और जल सुरक्षा की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार की जाने वाली परियोजनाएं भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थान को मिली जल परियोजनाओं और समझौतों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। सिंचाई के लिए पानी मिलने से कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल सकता है, जबकि पेयजल परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी आबादी को लाभ पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
नई दिल्ली में आयोजित बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित संबंधित राज्यों के मंत्रीगण एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के बाद एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्र सरकार और राज्यों के बीच हुए इस समझौते को अंतरराज्यीय जल सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना का उद्देश्य जल संसाधनों का बहुउद्देश्यीय उपयोग करना है। सिंचाई और पेयजल के अलावा जल संसाधनों की उपलब्धता से संबंधित क्षेत्रों में विकास की अन्य गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना रहती है।
राजस्थान सरकार की ओर से इस समझौते को प्रदेश की दीर्घकालिक जल आवश्यकताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परियोजनाओं पर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा चल रही थी, उनमें राज्यों की सहमति बनना विकास की दिशा में सकारात्मक कदम है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग से ऐसे विषयों का समाधान संभव है, जिनका प्रभाव एक से अधिक राज्यों पर पड़ता है। किशाऊ परियोजना के लिए हुआ समझौता इसी समन्वय का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान के संदर्भ में चार प्रमुख जल परियोजनाओं और समझौतों का उल्लेख किया—
मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं से राजस्थान की जल सुरक्षा को मजबूत करने और प्रदेश की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
किशाऊ परियोजना को लेकर हुए एमओयू के बाद अब इसके क्रियान्वयन से जुड़े आगामी चरणों पर संबंधित राज्यों और केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। परियोजना से मिलने वाले जल का उपयोग, वितरण और इससे जुड़े अन्य विषय आगे की प्रक्रिया में निर्धारित किए जाएंगे। राज्यों के बीच बनी सहमति को परियोजना के आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


