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- 13h ago
काबुल/इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 1 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद प्रांतों में हवाई हमले किए गए। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 11 अन्य घायल हुए हैं। अफगान पक्ष के अनुसार हमलों में तीन मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने हमलों की पुष्टि करते हुए कहा है कि उसकी कार्रवाई का निशाना सशस्त्र समूहों के ठिकाने और उनके कैंप थे। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय के मुताबिक शुरुआती रिपोर्टों में 22 लड़ाकों के मारे जाने की बात सामने आई है। पाकिस्तान का कहना है कि कार्रवाई के दौरान हथियार और गोला-बारूद के भंडार भी नष्ट किए गए तथा नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी बरती गई।
दोनों देशों के दावों में बड़ा अंतर है। अफगानिस्तान जहां हमलों में नागरिकों के मारे जाने की बात कह रहा है, वहीं पाकिस्तान इन्हें सशस्त्र समूहों के ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई बता रहा है। इन दोनों पक्षों के हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
अफगान तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार पाकिस्तान के हवाई हमलों ने कुनार और हेलमंद में तीन मकानों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत नौ लोगों की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए।
मुजाहिद ने हमलों की निंदा करते हुए इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। अफगान सरकार का कहना है कि दूसरे देश द्वारा अफगान क्षेत्र में इस तरह की सैन्य कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
रिपोर्टों के मुताबिक कुनार अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्व में स्थित है, जबकि हेलमंद देश के दक्षिणी हिस्से में है। दोनों क्षेत्रों में हुए हमलों की खबर ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और गंभीर बना दिया है।
पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि हवाई कार्रवाई दो स्थानों पर मौजूद सशस्त्र समूहों के ठिकानों के खिलाफ की गई। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने दावा किया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार 22 लड़ाके मारे गए और हथियार तथा गोला-बारूद भी नष्ट किए गए।
पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई सीमा पार से होने वाले हमलों के जवाब में की जा रही है। इस्लामाबाद लंबे समय से अफगानिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य सशस्त्र समूहों पर पाकिस्तान में हमले करने का आरोप लगाता रहा है।
पाकिस्तान के अनुसार इन समूहों के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान सरकार पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करती है।
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। तालिबान सरकार का कहना है कि अफगान क्षेत्र में हवाई हमले उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन हैं।
काबुल का आरोप है कि पाकिस्तान बार-बार अफगान क्षेत्र में कार्रवाई कर रहा है और ऐसी कार्रवाइयों से आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं। अफगान सरकार ने पाकिस्तान के इस दावे को भी स्वीकार नहीं किया कि उसकी जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली गतिविधियों के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाए।
दोनों देशों के बीच हालिया तनाव ऐसे समय बढ़ा है जब करीब तीन महीने तक स्थिति अपेक्षाकृत शांत रही थी। अब सीमा पार हिंसा, सैन्य कार्रवाई और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों के कारण दोनों देशों के रिश्ते फिर तनावपूर्ण हो गए हैं।
Reuters के अनुसार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में पिछले कुछ समय में लगातार गिरावट आई है। पाकिस्तान अफगानिस्तान पर सशस्त्र समूहों को पनाह देने का आरोप लगाता है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा TTP है। इस्लामाबाद का आरोप है कि इस संगठन से जुड़े लड़ाके अफगान क्षेत्र में मौजूद ठिकानों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करते हैं।
अफगान तालिबान सरकार पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि पाकिस्तान में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों को अफगानिस्तान की समस्या नहीं माना जाना चाहिए। यही आरोप-प्रत्यारोप दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा और सैन्य कार्रवाई को लेकर तनाव का बड़ा कारण बने हुए हैं।
ताजा हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तनाव पर निगाहें टिक गई हैं। हाल के महीनों में सीमा पार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार स्थिति तनावपूर्ण हुई है।
विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय यह है कि यदि हवाई हमलों और सीमा पार कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता है तो इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद विवाद और गहरा सकता है। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अफगानिस्तान की ओर से महिलाओं और बच्चों के मारे जाने तथा घायल होने का दावा किए जाने के बाद नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं पाकिस्तान लगातार यह कहता रहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई सशस्त्र समूहों को निशाना बनाकर की जाती है और नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी बरती जाती है।
फिलहाल स्वतंत्र स्रोतों के जरिए यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि हमलों में वास्तव में कितने नागरिक या लड़ाके मारे गए। इसलिए दोनों पक्षों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों को दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। सीमा पार सैन्य कार्रवाई और नागरिकों के हताहत होने की रिपोर्टों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ी है।
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान ने हाल ही में कहा था कि 2026 में सीमा पार हिंसा के कारण अफगानिस्तान में 1,100 से अधिक नागरिकों के मारे जाने या घायल होने का दस्तावेजीकरण किया गया है। यह आंकड़ा व्यापक सीमा-पार हिंसा से संबंधित है और केवल 1 अक्टूबर के इन हवाई हमलों से संबंधित नहीं है।
ताजा घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने हमलों को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
अफगानिस्तान का दावा:
पाकिस्तान का दावा:
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ताजा हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। यदि सीमा पार हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में तनाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की कार्रवाई का विरोध किया है, जबकि पाकिस्तान अपनी कार्रवाई को सशस्त्र समूहों के खिलाफ सुरक्षा अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, सशस्त्र समूहों की मौजूदगी और सीमा पार हमलों को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है।
1 अक्टूबर 2026 की इस घटना में हताहतों को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं और स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाली आधिकारिक और स्वतंत्र रिपोर्टों के बाद ही नुकसान और हताहतों की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


