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- 11h ago
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार देश के केमिकल और पेट्रोकेमिकल उद्योग को नई ऊंचाई देने तथा राज्य को वैश्विक केमिकल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार अक्टूबर के आखिर तक एक डेडिकेटेड केमिकल सेक्टर पॉलिसी लाने की तैयारी में है। इसके साथ ही पालघर, रायगढ़ और रत्नागिरी में करीब 2,500 से 5,000 एकड़ क्षेत्रफल वाले केमिकल पार्क विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
राज्य सरकार अनुसंधान एवं विकास, टेक्नोलॉजी रेडीनेस और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹1,000 करोड़ के महाराष्ट्र इंडस्ट्रीज एंड इन्वेस्टमेंट फंड की योजना भी बना रही है। सरकार का मानना है कि इन पहलों के जरिए महाराष्ट्र के पहले से मजबूत केमिकल मैन्युफैक्चरिंग बेस को नई तकनीक, निवेश और उच्च मूल्य वाले उत्पादों से जोड़ा जा सकेगा।
मुंबई में आयोजित एसोचैम महाकेम 2026 में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने केमिकल सेक्टर के लिए प्रस्तावित नीति और औद्योगिक विस्तार की योजनाओं की जानकारी दी।
महाराष्ट्र सरकार के इंडस्ट्रीज, इन्वेस्टमेंट एंड सर्विसेज डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. पी. अनबालागन ने कहा कि राज्य केमिकल सेक्टर के लिए एक मजबूत और भविष्य के अनुरूप इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसी डेडिकेटेड पॉलिसी तैयार कर रही है, जो केमिकल उद्योग की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करेगी और नए निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगी।
डॉ. अनबालागन ने कहा, “महाराष्ट्र एक डेडिकेटेड केमिकल सेक्टर पॉलिसी पर काम कर रहा है और हमें उम्मीद है कि यह अक्टूबर के आखिर तक लागू हो जाएगी। यह पॉलिसी सेक्टर की खास जरूरतों को पूरा करेगी और बायोप्लास्टिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, बायोमैन्युफैक्चरिंग और दूसरे उभरते हुए क्षेत्रों में पहले से डेवलप की जा रही कोशिशों को सपोर्ट करेगी।”
सरकार की योजना केवल पारंपरिक केमिकल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित रहने की नहीं है। प्रस्तावित नीति में उच्च मूल्य वाले और तकनीक आधारित क्षेत्रों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा।
डॉ. अनबालागन ने बताया कि राज्य सरकार पालघर, रायगढ़ और रत्नागिरी जैसे औद्योगिक एवं तटीय क्षेत्रों में 2,500 से 5,000 एकड़ तक के केमिकल पार्क विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।
इन पार्कों को केवल उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने के बजाय एकीकृत औद्योगिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की योजना है। इनमें साझा बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स, उपयोगिताएं, पर्यावरण प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और उद्योगों के लिए आवश्यक अन्य सुविधाएं विकसित किए जाने की संभावना है।
बड़े औद्योगिक पार्क बनने से कंपनियों को जमीन और बुनियादी ढांचे की तलाश में लगने वाला समय कम हो सकता है। साथ ही एक ही क्षेत्र में विभिन्न उद्योगों के आने से सप्लाई चेन और इंटरमीडिएट उत्पादों का स्थानीय नेटवर्क विकसित हो सकता है।
महाराष्ट्र सरकार प्रस्तावित ₹1,000 करोड़ के महाराष्ट्र इंडस्ट्रीज एंड इन्वेस्टमेंट फंड के जरिए केमिकल और इससे जुड़े उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास तथा तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।
इस फंड का उद्देश्य नई तकनीकों को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाने, टेक्नोलॉजी रेडीनेस बढ़ाने और नई कंपनियों के लिए फाइनेंसिंग इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करना है।
केमिकल उद्योग में नई तकनीक विकसित करने और उसे बड़े स्तर पर उत्पादन में बदलने के बीच काफी पूंजी और समय की जरूरत होती है। ऐसे में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन आधारित कंपनियों के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने से नए उत्पादों और प्रक्रियाओं को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र पहले से ही देश के प्रमुख केमिकल उत्पादन केंद्रों में शामिल है। अब राज्य की रणनीति पारंपरिक बल्क केमिकल्स से आगे बढ़कर स्पेशलिटी केमिकल्स और हाई-वैल्यू डेरिवेटिव्स की ओर जाने की है।
स्पेशलिटी केमिकल्स का इस्तेमाल फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, कृषि, रक्षा, निर्माण, ऊर्जा और कई अन्य उद्योगों में होता है। इन उत्पादों में तकनीकी क्षमता और अनुसंधान की भूमिका अधिक होती है।
प्रस्तावित नीति के जरिए ऐसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जा सकता है, जहां अधिक मूल्यवर्धन, तकनीकी क्षमता और निर्यात की संभावना मौजूद है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग के साथ बैटरी मटीरियल का महत्व तेजी से बढ़ा है। इसी तरह सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार के साथ इलेक्ट्रॉनिक-ग्रेड केमिकल्स की मांग भी बढ़ रही है।
महाराष्ट्र सरकार इन क्षेत्रों को भविष्य के औद्योगिक विकास के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रही है।
बैटरी मटीरियल, इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स, एडवांस्ड पॉलीमर्स, स्पेशलिटी कोटिंग्स और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में निवेश से राज्य को वैश्विक वैल्यू चेन में ऊपर जाने का अवसर मिल सकता है।
प्रस्तावित केमिकल सेक्टर पॉलिसी में बायोप्लास्टिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और बायोमैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा देने की तैयारी है।
दुनिया में टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन की मांग बढ़ने के साथ पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्पों की खोज तेज हुई है। ऐसे में बायोप्लास्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश महाराष्ट्र के लिए भविष्य के बाजारों को पकड़ने का अवसर बन सकता है।
बायोमैन्युफैक्चरिंग भी आने वाले समय में केमिकल, फार्मा और जैव आधारित उद्योगों के बीच नई कड़ियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर और महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर प्रवीण परदेशी ने कहा कि केमिकल और फार्मास्यूटिकल सेक्टर महाराष्ट्र की 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
उन्होंने कहा कि केवल उद्योग स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए कंपनियों को प्रतिस्पर्धी लागत पर बिजली, पानी और अन्य उपयोगिताओं की उपलब्धता के साथ-साथ बेहतर नीतिगत वातावरण भी चाहिए।
उन्होंने कहा, “इसे पाने के लिए तेज ग्रोथ के साथ-साथ एक ऐसा इकोसिस्टम भी चाहिए होगा जो ज्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को अट्रैक्ट करे। केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स के लिए कॉम्पिटिटिव यूटिलिटी कॉस्ट, फ्लेक्सिबल एनर्जी एक्सेस, सस्टेनेबल वॉटर मैनेजमेंट और सपोर्टिव पॉलिसी रिफॉर्म्स महाराष्ट्र की इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस को मजबूत करने के लिए जरूरी होंगे।”
केमिकल उद्योग में ऊर्जा और पानी दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए भविष्य के केमिकल पार्कों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, ऊर्जा की प्रतिस्पर्धी कीमत और टिकाऊ जल प्रबंधन व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
प्रवीण परदेशी ने भी इसी ओर संकेत करते हुए कहा कि महाराष्ट्र को अपने औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को बनाए रखने के लिए उपयोगिताओं की लागत और उपलब्धता पर लगातार ध्यान देना होगा।
विशेष रूप से जल प्रबंधन के क्षेत्र में रिसाइक्लिंग, पुन: उपयोग और आधुनिक ट्रीटमेंट सिस्टम को बढ़ावा देना आवश्यक होगा। इससे उद्योगों की जरूरत पूरी करने के साथ पर्यावरणीय दबाव को भी कम किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार केमिकल सेक्टर में नए निवेश आकर्षित करने और उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि तेज क्लियरेंस, पॉलिसी इंसेंटिव और मैत्री सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों के लिए प्रक्रिया आसान बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को महाराष्ट्र में नई परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, “हम इन्वेस्टर्स को अपने अगले बड़े वेंचर के लिए महाराष्ट्र को देखने के लिए इनवाइट करते हैं। राज्य सिंगल-विंडो मैत्री प्लेटफॉर्म, तेज क्लियरेंस और मजबूत पॉलिसी इंसेंटिव के जरिए प्रो-बिजनेस एनवायरनमेंट बनाने के लिए कमिटेड है। एक सेक्टर-स्पेसिफिक केमिकल सेक्टर पॉलिसी जल्द ही अनाउंस की जाएगी, जो इन्वेस्टमेंट अट्रैक्ट करने और ग्रोथ को तेज करने में और मदद करेगी।”
मुख्यमंत्री ने केमिकल और पेट्रोकेमिकल उद्योग को महाराष्ट्र के 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी विजन का प्रमुख इंजन बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार इनोवेशन आधारित और टिकाऊ औद्योगिक भविष्य तैयार करने के लिए वित्तीय, लॉजिस्टिक और प्रशासनिक सहयोग जारी रखेगी।
राज्य सरकार का फोकस ऐसे उद्योगों पर है, जिनमें उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उच्च मूल्यवर्धन और निर्यात की संभावना हो। इससे महाराष्ट्र को केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि रिसर्च, डिजाइन, तकनीक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद मिल सकती है।
महाकेम 2026 में जारी एसोचैम-ईवाई रिपोर्ट ‘महाराष्ट्र: फ्यूलिंग इंडियाज ट्रिलियन-डॉलर केमिकल विजन’ के अनुसार महाराष्ट्र के केमिकल सेक्टर की अनुमानित वैल्यू करीब 22 बिलियन डॉलर है।
रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 3,600 से अधिक केमिकल फैक्ट्रियां और 13 निर्धारित केमिकल जोन मौजूद हैं। देश के केमिकल सेक्टर के विकास में महाराष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र भारत के केमिकल सेक्टर के जीवीए में करीब 19 प्रतिशत और देश के केमिकल एक्सपोर्ट में लगभग 17 प्रतिशत योगदान देता है। राज्य के औद्योगिक उत्पादन में केमिकल सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 13.5 प्रतिशत है और इससे लगभग 3 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।
ये आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र के लिए केमिकल उद्योग केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि रोजगार, निर्यात और निवेश का बड़ा आधार है।
रिपोर्ट में महाराष्ट्र के लिए कई ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां राज्य अपनी मौजूदा औद्योगिक क्षमता का इस्तेमाल कर उच्च मूल्य वाले उत्पादों की ओर बढ़ सकता है।
इनमें स्पेशलिटी केमिकल्स, बैटरी मटीरियल, इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स, एडवांस्ड पॉलीमर्स, स्पेशलिटी कोटिंग्स, फार्मास्यूटिकल और एग्रोकेमिकल इंटरमीडिएट्स, बायोप्लास्टिक्स तथा अन्य उभरते हुए क्षेत्र शामिल हैं।
इस बदलाव का अर्थ यह होगा कि महाराष्ट्र केवल अधिक मात्रा में केमिकल उत्पादन करने के बजाय ऐसे उत्पादों पर जोर देगा, जिनमें तकनीकी ज्ञान, आरएंडडी और अधिक मूल्यवर्धन शामिल हो।
केमिकल सेक्टर के विस्तार से केवल फैक्ट्रियों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि तकनीकी और उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
आरएंडडी, केमिकल इंजीनियरिंग, प्रोसेस डिजाइन, ऑटोमेशन, क्वालिटी कंट्रोल, पर्यावरण प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, डेटा एनालिटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ सकती है।
यदि राज्य सरकार उद्योगों के साथ मिलकर कौशल विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाती है तो स्थानीय युवाओं को इन नई औद्योगिक परियोजनाओं में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
केमिकल पार्कों के विकसित होने का फायदा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़ी कंपनियों के आसपास सप्लायर, पैकेजिंग कंपनियां, लॉजिस्टिक्स फर्म, मशीनरी निर्माता, मेंटेनेंस कंपनियां और अन्य सहायक उद्योग भी विकसित हो सकते हैं।
इससे एमएसएमई के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
एकीकृत पार्कों में कंपनियों के बीच इंटरमीडिएट उत्पादों और सेवाओं की स्थानीय आपूर्ति बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत और समय को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र पहले से ही देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में शामिल है। केमिकल सेक्टर में स्पेशलिटी और हाई-वैल्यू उत्पादों का विस्तार होने से राज्य के निर्यात पोर्टफोलियो में भी बदलाव आ सकता है।
विशेष रूप से यूरोप, एशिया, पश्चिम एशिया और अन्य वैश्विक बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले केमिकल उत्पादों की मांग को देखते हुए महाराष्ट्र की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यदि नई नीति के साथ गुणवत्ता प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह कनेक्टिविटी और निर्यात प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया जाता है तो वैश्विक बाजार में महाराष्ट्र की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
केमिकल उद्योग के विस्तार के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और टिकाऊ उत्पादन भी बड़ी प्राथमिकता होगी। भविष्य के केमिकल पार्कों में अपशिष्ट प्रबंधन, पानी का पुनर्चक्रण, उत्सर्जन नियंत्रण और सुरक्षित औद्योगिक प्रक्रियाओं को डिजाइन का हिस्सा बनाना होगा।
हरित केमिस्ट्री, कम कार्बन उत्पादन और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर महाराष्ट्र आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है।
एसोचैम महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल के चेयरमैन मिलिंद हार्डिकर ने कहा कि केमिकल सेक्टर इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है।
उन्होंने कहा कि उद्योग की अगली विकास यात्रा केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकती। अब स्पेशलिटी केमिकल्स और हाई-वैल्यू डेरिवेटिव्स की ओर बढ़ना जरूरी होगा।
उनके मुताबिक, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए भारतीय कंपनियों को लगातार तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी और ऐसे उत्पाद विकसित करने होंगे जिनमें उच्च मूल्यवर्धन हो।
दुनिया में कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में भारत और विशेष रूप से महाराष्ट्र के लिए वैश्विक केमिकल सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मौजूद है।
महाराष्ट्र के पास बंदरगाह, औद्योगिक क्लस्टर, बड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था, फार्मास्यूटिकल और ऑटोमोबाइल उद्योग का मजबूत आधार तथा कुशल मानव संसाधन जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं।
यदि इन ताकतों को नई सेक्टर पॉलिसी, आधुनिक केमिकल पार्क, आरएंडडी फंड और तेज मंजूरी व्यवस्था के साथ जोड़ा जाता है तो राज्य वैश्विक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बन सकता है।
महाराष्ट्र की नई केमिकल नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही दिखाई देता है कि राज्य पारंपरिक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हाई-वैल्यू और टेक्नोलॉजी-इंटेंसिव केमिकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देना चाहता है।
स्पेशलिटी केमिकल्स, बैटरी मटीरियल, इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स, एडवांस्ड पॉलीमर्स, बायोप्लास्टिक्स और बायोमैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।
यदि अक्टूबर के अंत तक प्रस्तावित डेडिकेटेड केमिकल सेक्टर पॉलिसी लागू होती है और इसके साथ केमिकल पार्क तथा ₹1,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश एवं इनोवेशन फंड को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाता है, तो महाराष्ट्र केमिकल उद्योग में अपनी मौजूदा बढ़त को और मजबूत कर सकता है।
राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—केमिकल उद्योग को केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि अनुसंधान, तकनीक, निवेश, रोजगार, निर्यात और टिकाऊ औद्योगिक विकास का प्रमुख इंजन बनाना। यही रणनीति महाराष्ट्र के 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में केमिकल और फार्मास्यूटिकल सेक्टर की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकती है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


