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- 13h ago
नई दिल्ली। ऐतिहासिक लालकिला मैदान स्थित माधवदास पार्क में श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला का शुभारंभ विधि-विधान के साथ गणेश पूजन और भगवान गणेश की वंदना से हुआ। प्रथम पूज्य भगवान गणपति की आराधना के साथ शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया। रामलीला के शुभारंभ अवसर पर भगवान गणेश की एकदंत कथा का मंचन भी किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को पौराणिक परंपराओं और गणपति महिमा से रूबरू कराया।
रामलीला मंचन से पहले आयोजित गणेश पूजन में श्री धार्मिक लीला कमेटी के पदाधिकारियों और कलाकारों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश से रामलीला के सफल, शांतिपूर्ण और निर्विघ्न आयोजन की प्रार्थना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से की जाती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए कमेटी ने रामलीला के शुभारंभ को विशेष धार्मिक स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर कमेटी के महासचिव धीरजधर गुप्ता, सचिव प्रदीप शरण और प्रवक्ता रवि जैन ने आयोजन से जुड़ी जानकारी साझा की। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे। पूजन के दौरान श्रद्धालुओं और कलाकारों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
गणेश पूजन के अवसर पर भगवान गणेश की एकदंत कथा का मंचन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। कलाकारों ने पौराणिक प्रसंग को मंच के माध्यम से प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के जीवन और उनकी धार्मिक महत्ता से परिचित कराया। कथा के जरिए प्रथम पूज्य गणपति के प्रति श्रद्धा और भारतीय धार्मिक परंपराओं में उनके विशेष स्थान को दर्शाया गया।
एकदंत स्वरूप भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, शुभारंभ और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। कथा मंचन ने धार्मिक आयोजन में आध्यात्मिक भाव को और गहरा किया। गणपति बप्पा के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कार्यक्रम का आनंद लिया।
गणेश पूजन और एकदंत कथा के मंचन के बाद कमेटी की ओर से गुरुजी के सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग के दौरान श्रद्धा, भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन और भारतीय धार्मिक परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित लोगों को धर्म और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
सत्संग ने कार्यक्रम को केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित न रखकर आध्यात्मिक संदेश से भी जोड़ा। ऐसे आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपनी परंपराओं से जुड़ने और जीवन में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने का अवसर मिलता है।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामलीला लोगों को सत्य, धर्म, कर्तव्य, त्याग और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि रामलीला का मंचन नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से बच्चों और युवाओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों को समझने का अवसर मिलता है।
श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला का गणेश पूजन के साथ शुभारंभ धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बना। भगवान गणेश की आराधना, एकदंत कथा का मंचन और गुरुजी के सत्संग ने आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
रामलीला जैसे पारंपरिक आयोजन भारतीय समाज में धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में भी अहम योगदान देते हैं। ऐसे मंचों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपराएं आगे बढ़ती हैं और समाज को आदर्श जीवन मूल्यों का संदेश मिलता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


