यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
मथुरा। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ, इकाई मथुरा की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को जवाहर विद्यालय इंटर कॉलेज, मथुरा में आयोजित की गई। बैठक में जिले के माध्यमिक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित विभिन्न समस्याओं को लेकर गहन मंथन किया गया। विशेष रूप से शिक्षकों के एनपीएस एरियर, वेतन भुगतान, सेवा संबंधी प्रकरणों तथा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लंबित मामलों के निस्तारण में हो रही देरी को लेकर संगठन के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक अपने विभागीय एवं सेवा संबंधी प्रकरणों के समाधान के लिए लंबे समय से कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई मामलों में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी प्रकरणों के निस्तारण में अपेक्षित गति नहीं दिखाई दे रही है। इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर आंदोलन को तेज किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय धरना-आंदोलन का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा।
बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश सिंह राणा ने कहा कि शिक्षकों के एनपीएस एरियर सहित अन्य अधिकारों से जुड़े प्रकरणों में लगातार देरी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने कार्यों और जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रहे हैं, ऐसे में उनके वैधानिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों के मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जाना उचित नहीं है। संगठन शिक्षकों की समस्याओं को लेकर लगातार अधिकारियों के समक्ष आवाज उठाता रहा है और आगे भी शिक्षक हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक को अपने व्यक्तिगत प्रकरण के समाधान के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए संगठन स्तर पर समस्याओं को संकलित किया जाएगा। प्रत्येक लंबित प्रकरण की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष उसे रखा जाएगा और उसके निस्तारण की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी।
मंडलीय मंत्री जयप्रकाश शर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कार्यरत कुछ बाबुओं के कार्य व्यवहार को लेकर शिक्षकों की ओर से सामने आ रही शिकायतों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन के संज्ञान में ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें शिक्षकों के प्रकरणों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब की शिकायतें हैं। उन्होंने कहा कि कार्यालयीन कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रत्येक प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो और शिक्षक को अपने मामले की जानकारी प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकरण में भ्रष्टाचार, अनुचित मांग अथवा नियमों के विपरीत किसी प्रकार की कार्यवाही से संबंधित शिकायत सामने आती है तो संगठन उसे प्रमाण सहित सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखेगा। उन्होंने कहा कि संगठन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाने के बजाय दस्तावेज और तथ्यों के आधार पर समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखने में विश्वास रखता है।
उपाध्यक्ष मनोज सिंह छौंकर ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में संबद्ध लिपिकों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यालय में लंबे समय से संबद्ध कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि कार्यालय में संबद्ध लिपिकों को तत्काल उनके मूल तैनाती स्थलों पर वापस भेजा जाए, ताकि कार्यालयीन व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और विभागीय कार्यों का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार हो।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यालय में कर्मचारियों की जिम्मेदारियां और तैनाती व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। यदि कर्मचारी लंबे समय तक मूल तैनाती स्थल से अलग स्थान पर संबद्ध रहेंगे तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। संगठन ने मांग की कि इस संबंध में सक्षम अधिकारी आवश्यक कार्रवाई करें।
बैठक में शिक्षकों ने यह भी कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। शिक्षकों के प्रकरण किस स्तर पर लंबित हैं, किस अधिकारी या पटल पर लंबित हैं तथा उनके निस्तारण में कितना समय लगेगा, इसकी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। संगठन ने कहा कि विभागीय कार्यों में अनावश्यक देरी से शिक्षक मानसिक रूप से परेशान होते हैं और उनका समय भी कार्यालयों के चक्कर लगाने में व्यर्थ होता है।
जिला अध्यक्ष शिवकुमार सिंह ने कहा कि संगठन शिक्षक हितों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान, एनपीएस एरियर, चयन वेतनमान, पदोन्नति, सेवा पुस्तिका, अवकाश, जीपीएफ तथा अन्य सेवा संबंधी मामलों में यदि किसी शिक्षक का प्रकरण लंबित है तो वह संगठन को उसकी जानकारी उपलब्ध कराए।
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे व्यक्तिगत रूप से परेशान होने के बजाय संगठन के माध्यम से अपनी समस्याओं को सामने लाएं। संबंधित प्रकरण के सभी आवश्यक दस्तावेज, आवेदन की प्रति तथा प्राप्ति प्रमाण संगठन को उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रत्येक मामले को व्यवस्थित तरीके से संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जा सके।
उन्होंने कहा कि संगठन केवल शिकायतें दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लंबित प्रकरणों की प्रगति की भी जानकारी लेगा। जिन मामलों में लंबे समय से कार्रवाई नहीं हो रही है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
बैठक में आगामी आंदोलन को लेकर भी विस्तार से रणनीति तैयार की गई। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान यदि संवाद और विभागीय स्तर पर हो जाता है तो आंदोलन की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन यदि लगातार ज्ञापन और वार्ता के बावजूद समस्याएं लंबित रहती हैं तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि पहले लंबित प्रकरणों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया जाएगा। निर्धारित समय में समाधान नहीं होने पर ज्ञापन, प्रदर्शन, धरना और आवश्यकता के अनुसार चरणबद्ध आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि कार्यालयीन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित कराना है।
शिक्षकों ने कहा कि विभागीय कार्यालयों में आने वाले प्रत्येक शिक्षक के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। किसी भी प्रकरण में यदि दस्तावेज अधूरे हैं तो शिक्षक को स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी दी जाए, ताकि वह आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सके। इसके साथ ही पूर्ण दस्तावेज वाले मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संगठन की मजबूती शिक्षकों की एकजुटता पर निर्भर करती है। यदि शिक्षक अपने-अपने स्तर पर समस्याओं को उठाने के बजाय सामूहिक रूप से संगठन के माध्यम से आवाज उठाएंगे तो समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तरीके से प्रयास किया जा सकेगा।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज का महत्वपूर्ण वर्ग है और उसे अपने सेवा संबंधी अधिकारों के लिए बार-बार परेशान नहीं होना चाहिए। संगठन शिक्षकों की समस्याओं को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर उठाएगा तथा जरूरत पड़ने पर अधिकारियों से लेकर उच्च स्तर तक मामला पहुंचाया जाएगा।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शिक्षकों को अपने सभी विभागीय प्रकरणों से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। आवेदन देने के बाद उसकी प्राप्ति अवश्य लेनी चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रकरण की स्थिति स्पष्ट रूप से रखी जा सके।
जिला अध्यक्ष शिवकुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक हितों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक संघर्ष ही संगठन की पहचान है। उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी शिक्षक को अकेला नहीं छोड़ेगा और प्रत्येक जायज समस्या को उचित मंच पर उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यदि लंबित समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर आंदोलन को विस्तार दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से लामबंद किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया जाएगा।
बैठक का संचालन जिला अध्यक्ष शिवकुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर राकेश ठकुरेला, प्रमोद कुमार पटेल, दिग्विजय लाल श्रीवास्तव, इरशाद अहमद सिद्दीकी, विधानचंद्र वर्मा, रामदेव सिंह, जीवन लाल, दिनेश यादव, सौरभ कुमार, भागवत चौहान, सुधीर कुमार, अरुण कुमार, रोहिताश कुमार, संजय कुमार, रजनीश जायसवाल, अमित कुमार, समर बहादुर, उमाशंकर, शैलेंद्र कुमार, जितेंद्र सिंह सेगर, अनिल कुमार विश्वकर्मा, बलदेव प्रसाद, शिशिर कुमार पटेल, सुनील कुमार, जयन्त कुमार, अवधेश कुमार पटेल, अजय कुमार, अमित कुमार, सत्येंद्र सिंह, रिहान अली, डॉ. राजेश प्रजापति, पारुल देवी, मोनी सिंह, प्रतिज्ञा सिंह, डॉ. राजीव कुमार, भूपेंद्र सिंह, डालचंद कुशवाहा, रंजीत सेमल, रामगोपाल, चंद्रकांत दीक्षित, दशरथ सिंह, विमल लता सिंह, गोविंद त्रिपाठी, डॉ. प्रवीण यादव, विशंभर दयाल, हरी सिंह, लोकेश कुमार, भूपेंद्र सिंह, रामाश्रय यादव, शिव आधार सिंह यादव, सुनील कुमार वर्मा, जयप्रकाश शर्मा, शालिनी शर्मा, शिल्पी श्रीवास्तव, डॉ. अंजू राय सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में शिक्षकों की समस्याओं को लेकर संगठन की गतिविधियां और तेज की जाएंगी। लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी और समाधान की समयसीमा पर भी नजर रखी जाएगी। शिक्षकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।


