17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 11h ago
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से देश की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं और भारत की आध्यात्मिक चेतना को लेकर बड़ा संदेश दिया। जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करते हुए आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के लिए उसकी संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश को धर्म, न्याय, सत्य और लोककल्याण से जोड़ते हुए कहा कि श्रीकृष्ण की शिक्षाएं आज भी समाज को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
जन्मभूमि परिसर में मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और लगातार गूंजते ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष के बीच मुख्यमंत्री का भाषण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बना रहा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह स्थान केवल मथुरा या ब्रज की धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ भारत की आध्यात्मिक चेतना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म और उनकी जीवनलीला भारतीय संस्कृति के उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है, जिनमें धर्म, सत्य, न्याय और लोककल्याण को प्रमुख स्थान दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब-जब समाज में अन्याय और अधर्म बढ़ता है, तब धर्म और न्याय की स्थापना का संदेश और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक आक्रांताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बाबर और औरंगजेब का नाम लेते हुए कहा कि भारत अब अपनी सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों के गौरव को प्राथमिकता देने वाली चेतना के साथ आगे बढ़ रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नए भारत में उन शक्तियों और व्यक्तित्वों के महिमामंडन की मानसिकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाया।
मुख्यमंत्री के इस बयान पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया। संबोधन के दौरान कई मौकों पर जय श्रीकृष्ण के जयकारे भी गूंजे।
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को धर्म और न्याय की स्थापना से जोड़ते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उनका जीवन समाज को सत्य के पक्ष में खड़े होने, अन्याय का विरोध करने और लोककल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने जीवन के अलग-अलग चरणों में समाज के सामने अलग-अलग आदर्श प्रस्तुत किए। बाल्यकाल की लीलाओं से लेकर महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को दिए गए गीता के संदेश तक श्रीकृष्ण का जीवन भारतीय दर्शन और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपने इतिहास, महापुरुषों और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी होती है, वही आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा, धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों और देश की गौरवशाली विरासत से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को यह समझना होगा कि भारत की पहचान केवल आधुनिक विकास से नहीं बल्कि उसकी प्राचीन सभ्यता, ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से भी बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, लेकिन विकास की इस यात्रा में अपनी सांस्कृतिक पहचान को पीछे छोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि नया भारत आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी सम्मान दे रहा है।
उनका संदेश था कि विकास और विरासत एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। बल्कि दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही भारत की विशिष्ट पहचान को मजबूत कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ब्रज क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रही है।
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में सड़क, यातायात, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में विभिन्न परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह है कि देश और दुनिया से ब्रज आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और धार्मिक स्थलों की गरिमा भी बनी रहे।
ब्रज क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। मथुरा-वृंदावन के अलावा गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव और बलदेव जैसे धार्मिक स्थलों को भी बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन, स्वच्छ वातावरण, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित धार्मिक यात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
मुख्यमंत्री ने ब्रज की प्राचीन धार्मिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के दौरान यह ध्यान रखना जरूरी है कि ब्रज की मौलिक पहचान और आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित न हो।
मथुरा और वृंदावन की गलियां, मंदिर, घाट और धार्मिक स्थल सदियों से ब्रज संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में आधुनिक विकास के साथ इनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचे।
वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान भी पूरा परिसर ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंजता रहा।
मुख्यमंत्री का संबोधन ऐसे समय में हुआ जब मथुरा और पूरे ब्रज क्षेत्र में जन्माष्टमी को लेकर देश-दुनिया से श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं। ऐसे में जन्मभूमि से दिया गया सांस्कृतिक विरासत का संदेश व्यापक महत्व रखता है।
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में धर्म और संस्कृति को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखते हुए इसे राष्ट्र की पहचान और सामाजिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी प्राचीन विरासत पर गर्व होना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देता है। उनका जीवन संघर्ष, कर्तव्य और लोककल्याण का संदेश देता है।
गीता के माध्यम से श्रीकृष्ण ने कर्म, कर्तव्य और धर्म के जिस दर्शन को दुनिया के सामने रखा, वह आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक समय की चुनौतियों के बीच भी श्रीकृष्ण की शिक्षाएं समाज को संतुलन और सही दिशा प्रदान कर सकती हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री का श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचना ब्रजवासियों के लिए भी खास रहा। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान ब्रज के विकास और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा और कार्यक्रम हुए। इससे स्थानीय लोगों में विकास कार्यों को लेकर उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
मुख्यमंत्री के संबोधन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि उन्होंने धार्मिक आस्था को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। उन्होंने भारत की पहचान को उसकी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ते हुए कहा कि अपनी विरासत का सम्मान करना आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी है।
उनका कहना था कि भारत की प्राचीन परंपराएं आज भी दुनिया को दिशा देने की क्षमता रखती हैं। इसलिए आधुनिक विकास के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करना आवश्यक है।
श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन केवल ब्रज तक सीमित नहीं रहा। उनके वक्तव्य में सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, धार्मिक पर्यटन, नई पीढ़ी और विकास जैसे कई विषय एक साथ जुड़े।
जन्माष्टमी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व पर मथुरा से दिया गया यह संदेश मुख्यमंत्री की उस सोच को भी सामने रखता है, जिसमें सांस्कृतिक पहचान को विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रज क्षेत्र में विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए धार्मिक स्थलों की सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यातायात और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है।
मथुरा-वृंदावन में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नए मार्ग, बेहतर सड़कें, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि श्रद्धालुओं को धार्मिक स्थलों पर पहुंचने में परेशानी न हो। इसके लिए आधुनिक शहरी सुविधाओं को धार्मिक पर्यटन केंद्रों से जोड़ा जा रहा है।
हालांकि विकास के साथ ब्रज की पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने इसी संतुलन पर जोर देते हुए धार्मिक स्थलों की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने की बात कही।
मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान जन्मभूमि परिसर में मौजूद श्रद्धालु लगातार धार्मिक उत्साह में नजर आए। जैसे-जैसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का समय नजदीक आ रहा था, वैसे-वैसे पूरे परिसर में भक्तिभाव और उत्साह बढ़ता दिखाई दिया।
मंदिर परिसर में गूंजते जयकारे और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्यमंत्री का सांस्कृतिक विरासत पर दिया गया संदेश कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और भारतीय संस्कृति के माध्यम से देश की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी हजारों वर्ष पुरानी परंपराओं और विरासत पर गर्व करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री के भाषण में श्रीकृष्ण की जन्मभूमि, सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्मृतियां, नई पीढ़ी और आधुनिक विकास—इन सभी मुद्दों को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।
मथुरा की पावन धरती से मुख्यमंत्री का संदेश साफ था—भारत आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़े, लेकिन अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को साथ लेकर।
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि से दिया गया यह संदेश आने वाले समय में ब्रज के धार्मिक पर्यटन, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक विकास की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जा रहा है।


