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- 13h ago
नई दिल्ली। वोट चोरी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष के इस मार्च में बड़ी संख्या में नेता, कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक माहौल गरमाया रहा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष ने अपनी चिंताएं सामने रखीं। इस मार्च के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और नेहा बोरा आगे की कतार में नजर आए।
प्रदर्शन के बीच एक ऐसा क्षण भी सामने आया, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मार्च के दौरान कुछ लोग राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा की ओर बढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। भीड़ के बीच अचानक हलचल बढ़ी तो सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। इसी दौरान राहुल गांधी प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के पास खड़े होकर उन्हें सुरक्षित रखने की कोशिश करते नजर आए। पीछे से धक्का लगने पर वह खुद को संभालने के साथ-साथ दोनों को भी संभालते दिखाई दिए।
इस घटनाक्रम का वीडियो कैमरे में कैद हो गया। सोशल मीडिया पर इस दृश्य को लेकर चर्चा होने की संभावना के बीच राहुल गांधी का यह अंदाज राजनीतिक घटनाक्रम का एक प्रमुख दृश्य बन गया। समर्थकों की नजर में यह बहन प्रियंका गांधी और पार्टी की अन्य महिला कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी सजगता का प्रतीक है। हालांकि, भीड़भाड़ वाले मार्च में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों के बीच उचित दूरी बनाए रखने की आवश्यकता भी सामने आती है।
INDIA गठबंधन के मार्च में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी लगातार विपक्ष के प्रमुख चेहरों के रूप में आगे दिखाई दिए। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ आगे बढ़ने के कारण रास्ते में भीड़ और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनी। ऐसे माहौल में सुरक्षाकर्मियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, क्योंकि किसी भी अप्रत्याशित हलचल से नेताओं और आम प्रदर्शनकारियों को परेशानी हो सकती है।
इसी दौरान राहुल गांधी का प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के पास रहना चर्चा का विषय बना। जब पीछे से दबाव बढ़ता दिखाई दिया, तब राहुल गांधी ने उन्हें संभालने का प्रयास किया। घटना का यह हिस्सा कैमरे में रिकॉर्ड हुआ और मार्च की राजनीतिक तस्वीरों के बीच खास तौर पर सामने आया।
विपक्ष के इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाना और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जवाब मांगना था। मार्च में शामिल नेताओं ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता, एसआईआर की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां व्यक्त कीं। विपक्ष का कहना है कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर से संबंधित अपने आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। राहुल गांधी की ओर से भी इस मामले में याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। विपक्ष की कोशिश है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उसके सवालों पर न्यायिक स्तर पर विचार हो और संबंधित मुद्दों पर स्पष्टता आए।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से नहीं छूटना चाहिए और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से शामिल नहीं होना चाहिए। चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक चरण में स्पष्ट नियमों का पालन हो और शिकायतों का निष्पक्ष समाधान किया जाए।
हालांकि, वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं से जुड़े आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण संबंधित साक्ष्यों, कानूनी प्रक्रिया और सक्षम संस्थाओं के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होना अपने आप में आरोपों के सही साबित होने का प्रमाण नहीं है।
इस मार्च में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विभिन्न राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य राजनीतिक प्रतिनिधि भी प्रदर्शन में मौजूद रहे।
विपक्षी नेताओं की एकजुटता के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दे किसी एक दल तक सीमित नहीं हैं। INDIA गठबंधन के नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
मार्च में शामिल नेताओं ने सरकार और चुनाव आयोग से अपनी चिंताओं पर विचार करने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए संस्थाओं का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करना जरूरी है। वहीं, इन मुद्दों पर आगे की कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई को लेकर भी विपक्षी दलों ने अपना रुख स्पष्ट किया।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान स्पष्ट किया कि आंदोलन और धरना-प्रदर्शन आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना सभी विपक्षी दलों की जिम्मेदारी है। अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था का इस्तेमाल सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है।
अखिलेश यादव के मुताबिक, विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों को लगातार उठाता रहेगा। उन्होंने फर्जी मतदाताओं के नाम शामिल करने, गलत तरीके से वोट डलवाने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित तथ्यों और जांच के आधार पर होनी बाकी है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए कानूनी और व्यावहारिक, दोनों तरह के रास्ते अपनाएगा। सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर विचार करना चाहिए। अखिलेश यादव ने भाजपा से अपनी कथित गलतियों को स्वीकार करने की भी मांग की।
उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि विपक्ष किसी मुद्दे पर सवाल उठाता है तो उसका जवाब संवाद और तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक विपक्ष की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन की राजनीति जारी रह सकती है।
अखिलेश यादव ने विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल प्रदर्शन की जगह बदल देने से मूल समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यदि सरकार लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहती है तो उसे विरोध दर्ज कराने के लिए पर्याप्त स्थान और अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने से उनकी शिकायतें खत्म नहीं हो जातीं। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है और शांतिपूर्ण विरोध के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि विरोध-प्रदर्शन केवल राजनीतिक दलों की गतिविधि नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से नागरिक अपनी चिंताओं को भी सामने रखते हैं। यदि किसी विषय पर बड़ी संख्या में लोग अपनी आवाज उठा रहे हैं तो उस पर बातचीत की पहल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता रहेगा। उनके अनुसार, विरोध की जगह बदलने से सरकार के सामने उठाए जा रहे सवाल समाप्त नहीं होंगे और विपक्ष अपना संघर्ष जारी रखेगा।
प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव ने छात्रों और युवाओं के साथ कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन में पहुंचे युवा छात्रों के साथ पुलिस प्रशासन और भाजपा सरकार का व्यवहार उचित नहीं रहा।
उन्होंने विशेष रूप से उन युवाओं का जिक्र किया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर अपनी बात रखने आए थे। अखिलेश यादव ने कहा कि युवाओं को अपनी समस्याएं शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अवसर मिलना चाहिए और उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। छात्र और युवा देश की राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इस बात से भी तय होती है कि वह असहमति रखने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती है।
अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को भी आगे उठाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन और विरोध जारी रहेंगे।
वोट चोरी, एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ यह मार्च विपक्ष और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच जारी राजनीतिक टकराव की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष इन मुद्दों को लोकतंत्र और चुनावी निष्पक्षता से जोड़ रहा है, जबकि आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया और आगे होने वाली सुनवाई पर भी नजर रहेगी। वहीं, विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राजनीतिक मंचों के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी उठाएगा।
मार्च के दौरान राहुल गांधी का प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के पास रहकर भीड़ के बीच स्थिति संभालने का दृश्य राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना। एक ओर विपक्ष चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर उसके नेता आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने की कोशिश में जुटे हैं।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम में तीन बातें प्रमुखता से सामने आईं—चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियां, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के जरिए कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की कोशिश और धरना-प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और न्यायिक प्रक्रिया, दोनों पर नजर बनी रहेगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


