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- 13h ago
नई दिल्ली। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के पूर्वी दिल्ली परिसर में तकनीकी नवाचार, रचनात्मक अभिव्यक्ति और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो वार्षिक महोत्सवों ‘एलिसियन 4.0’ और ‘सिन्थेसिया 3.0’ का आयोजन किया गया। इन दोनों महोत्सवों ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने और पारंपरिक शैक्षणिक गतिविधियों से आगे बढ़कर सीखने का अवसर प्रदान किया।
विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स (यूएसएआर) की ओर से आयोजित चौथे वार्षिक तकनीकी महोत्सव ‘एलिसियन 4.0’ की थीम ‘विचार सीमाओं से परे’ रही। वहीं, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ डिजाइन एंड इनोवेशन (यूएसडीआई) के तीसरे डिजाइन महोत्सव ‘सिन्थेसिया 3.0’ की थीम ‘अनदेखे को महसूस करो’ रखी गई। दोनों आयोजनों की विषयवस्तु ने तकनीकी दक्षता, स्वतंत्र चिंतन, कल्पनाशीलता और प्रयोग आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
महोत्सवों के दौरान विद्यार्थियों ने तकनीकी प्रतियोगिताओं, हैकाथॉन, डिजाइन गतिविधियों, कार्यशालाओं और नवाचार आधारित कार्यक्रमों में भाग लेकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में समस्याओं की पहचान करने, उनके समाधान खोजने और अपने विचारों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए तैयार करना था।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इन कार्यक्रमों ने तकनीक और कला के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी सामने रखा। जहां तकनीकी महोत्सव में प्रोग्रामिंग, ऑटोमेशन, समस्या-समाधान और उद्यमशीलता पर जोर दिया गया, वहीं डिजाइन महोत्सव में कल्पनाशीलता, सामग्री के रचनात्मक उपयोग, दृश्य अभिव्यक्ति और नए डिजाइन विचारों को साकार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स का चौथा वार्षिक तकनीकी महोत्सव ‘एलिसियन 4.0’ विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता, नवाचार और उद्यमशील सोच को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। ‘विचार सीमाओं से परे’ की थीम के अनुरूप महोत्सव में ऐसी गतिविधियां शामिल की गईं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने, तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजने और अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग करने का अवसर मिला।
महोत्सव के अंतर्गत एजिनहैक 2026, हैकटोबरफेस्ट, हैकफेस्ट 3.0, सिलिकॉन क्वेस्ट, पासवर्ड हाइस्ट, गेमफोर्ज और स्टूडेंट वेंचर स्टार्टअप सहित विभिन्न तकनीकी प्रतियोगिताओं, हैकाथॉन और नवाचार आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ तार्किक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और टीम के साथ मिलकर काम करने के कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।
हैकाथॉन जैसी गतिविधियों का विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि इनमें प्रतिभागियों को सीमित समय के भीतर किसी समस्या को समझने, संभावित समाधान तैयार करने और अपने विचार को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप तैयार करने में मदद करती हैं।
‘एलिसियन 4.0’ के विभिन्न कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों को तकनीकी चुनौतियों के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों के लिए यह अपने ज्ञान को परखने, नए उपकरणों और तकनीकों के उपयोग की संभावनाएं तलाशने तथा दूसरे विद्यार्थियों के विचारों से सीखने का अवसर भी रहा।
महोत्सव में शामिल हैकाथॉन और अन्य तकनीकी गतिविधियों ने समस्या-समाधान आधारित शिक्षा के महत्व को सामने रखा। आज के दौर में तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रोग्रामिंग या उपकरणों का संचालन सीखना नहीं है, बल्कि ऐसी सोच विकसित करना भी है, जिसके माध्यम से जटिल समस्याओं के सरल, प्रभावी और उपयोगी समाधान तैयार किए जा सकें।
विद्यार्थियों के लिए ऐसी प्रतियोगिताएं अपने विचारों को व्यवस्थित करने, समाधान की उपयोगिता पर विचार करने और टीम के सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित करने का अवसर देती हैं। इससे संवाद कौशल, समय प्रबंधन, निर्णय लेने की क्षमता और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे गुणों के विकास में भी सहायता मिलती है।
‘एलिसियन 4.0’ में शामिल विभिन्न गतिविधियों ने तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच संबंध को मजबूत करने पर जोर दिया। इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्रों को पहचानने और भविष्य में तकनीकी परियोजनाओं, अनुसंधान तथा नवाचार आधारित कार्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
एलिसियन 4.0 के अंतर्गत ‘स्टूडेंट वेंचर स्टार्टअप’ जैसी गतिविधि का शामिल होना विद्यार्थियों के बीच उद्यमशीलता की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। किसी भी नए उद्यम की शुरुआत एक विचार से होती है, लेकिन उस विचार को उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलने के लिए समस्या की सही पहचान, योजना, संसाधनों का प्रबंधन और संभावित उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को समझना आवश्यक होता है।
विद्यार्थियों को ऐसे अवसर मिलने से वे अपने तकनीकी विचारों को व्यावहारिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखना सीख सकते हैं। इससे उन्हें नवाचार को केवल प्रयोगशाला या कक्षा तक सीमित न रखते हुए समाज और बाजार की आवश्यकताओं से जोड़ने की समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
महोत्सव ने इस विचार को प्रमुखता दी कि तकनीकी शिक्षा और उद्यमशीलता एक-दूसरे के पूरक हैं। तकनीकी दक्षता नए समाधान विकसित करने में सहायक होती है, जबकि उद्यमशील सोच उन समाधानों को उपयोगी, सुलभ और व्यावहारिक बनाने की दिशा प्रदान करती है।
यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ डिजाइन एंड इनोवेशन की ओर से आयोजित तीसरे डिजाइन महोत्सव ‘सिन्थेसिया 3.0’ की थीम ‘अनदेखे को महसूस करो’ रही। इस थीम ने विद्यार्थियों को सामान्य वस्तुओं, सामग्रियों और विचारों को नए नजरिए से देखने तथा कल्पनाशीलता के माध्यम से नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया।
महोत्सव में डिजाइनाथॉन, वॉल कार्पेट आर्ट, किरीगामी कार्यशाला, ग्लास वर्कशॉप, गियर कार्नेज, स्क्रैप टू स्कल्पचर और कॉन्सेप्ट टू रियलिटी जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजाइन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को समझने, सामग्री के साथ प्रयोग करने और अपने विचारों को रचनात्मक रूप देने का अवसर मिला।
डिजाइन शिक्षा में कल्पनाशीलता के साथ-साथ अवलोकन, उपयोगिता, संरचना, सामग्री और मानवीय आवश्यकताओं को समझना भी महत्वपूर्ण होता है। ‘सिन्थेसिया 3.0’ की गतिविधियों ने इन पहलुओं को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
महोत्सव में शामिल विभिन्न गतिविधियों ने यह दिखाया कि रचनात्मकता केवल चित्र बनाने या कलात्मक वस्तुएं तैयार करने तक सीमित नहीं है। यह किसी समस्या को अलग दृष्टिकोण से देखने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और किसी विचार को उपयोगी स्वरूप प्रदान करने की प्रक्रिया भी है।
‘सिन्थेसिया 3.0’ में आयोजित डिजाइनाथॉन ने विचार निर्माण और डिजाइन आधारित समस्या-समाधान की अवधारणा को प्रमुखता दी। डिजाइनाथॉन जैसी गतिविधियों में प्रतिभागियों को किसी आवश्यकता या चुनौती को समझकर उसके अनुरूप नए विचार विकसित करने और संभावित समाधानों की रूपरेखा तैयार करने का अवसर मिलता है।
डिजाइन की प्रक्रिया में किसी वस्तु का बाहरी स्वरूप ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उसकी उपयोगिता, सुविधा, उद्देश्य और उपयोगकर्ता के अनुभव पर भी ध्यान देना आवश्यक है। इसी कारण मानव-केंद्रित डिजाइन आधुनिक शिक्षा, उत्पाद विकास और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
विद्यार्थियों के लिए डिजाइनाथॉन जैसी गतिविधियां रचनात्मक सोच के साथ व्यावहारिक निर्णय लेने का अनुभव प्रदान करती हैं। इससे वे यह समझ सकते हैं कि किसी आकर्षक विचार को उपयोगी समाधान में बदलने के लिए अनुसंधान, परीक्षण, संशोधन और प्रतिक्रिया की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
महोत्सव में किरीगामी कार्यशाला और ग्लास वर्कशॉप जैसी गतिविधियों ने डिजाइन के व्यावहारिक पक्ष को सामने रखा। किरीगामी कागज को काटने और मोड़ने की तकनीक पर आधारित कला है, जिसके माध्यम से साधारण कागज को जटिल संरचनाओं और आकर्षक रूपों में बदला जा सकता है।
इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को आकार, संरचना, संतुलन और स्थान के उपयोग जैसे डिजाइन संबंधी सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद करती हैं। वहीं, ग्लास वर्कशॉप जैसी गतिविधियां सामग्री की विशेषताओं, उसकी संभावनाओं और उसके साथ काम करते समय आवश्यक तकनीकी सावधानियों के महत्व को सामने लाती हैं।
इन कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थी यह अनुभव कर सकते हैं कि किसी सामग्री का प्रभावी उपयोग उसकी प्रकृति और सीमाओं को समझने पर निर्भर करता है। डिजाइन प्रक्रिया में सामग्री का चयन, निर्माण की तकनीक और अंतिम उत्पाद की उपयोगिता एक-दूसरे से जुड़े हुए पहलू हैं।
‘सिन्थेसिया 3.0’ की गतिविधियों में ‘स्क्रैप टू स्कल्पचर’ विशेष रूप से रचनात्मक पुनःउपयोग की अवधारणा से जुड़ी रही। इस तरह की गतिविधि में अनुपयोगी या बची हुई सामग्रियों को रचनात्मक दृष्टिकोण से देखते हुए उन्हें कलात्मक संरचनाओं या उपयोगी वस्तुओं में बदलने की संभावनाएं तलाश की जाती हैं।
यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों को संसाधनों की उपयोगिता पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित करता है। सामान्य रूप से बेकार समझी जाने वाली सामग्री भी उचित कल्पनाशीलता और तकनीक के माध्यम से नए उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
इस तरह की गतिविधियां रचनात्मकता के साथ संसाधन दक्षता और जिम्मेदार उपभोग के विचार को भी प्रोत्साहित करती हैं। डिजाइन के क्षेत्र में यह समझ महत्वपूर्ण है कि किसी वस्तु के निर्माण के दौरान केवल उसके रूप पर नहीं, बल्कि सामग्री के उपयोग, अपशिष्ट में कमी और संभावित पर्यावरणीय प्रभाव पर भी विचार किया जाना चाहिए।
‘सिन्थेसिया 3.0’ में शामिल ‘कॉन्सेप्ट टू रियलिटी’ जैसी गतिविधि ने कल्पना को वास्तविक स्वरूप देने की प्रक्रिया के महत्व को सामने रखा। किसी विचार को उपयोगी उत्पाद या संरचना में बदलने के लिए शुरुआती अवधारणा से लेकर उसकी योजना, डिजाइन, सामग्री के चयन और निर्माण तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों को अपने विचारों की व्यावहारिकता पर विचार करने और संभावित चुनौतियों का समाधान तलाशने का अवसर मिलता है। प्रारंभिक डिजाइन में कमियों की पहचान करना, आवश्यक संशोधन करना और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप समाधान विकसित करना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों को यह समझने में मदद करती हैं कि रचनात्मक विचार तभी प्रभावी बनता है, जब उसे व्यावहारिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए। इस प्रकार डिजाइन महोत्सव ने कल्पनाशीलता और क्रियान्वयन के बीच संबंध को स्पष्ट किया।
‘एलिसियन 4.0’ और ‘सिन्थेसिया 3.0’ दोनों महोत्सवों ने तकनीकी ज्ञान और रचनात्मक सोच के बीच सहयोग की संभावनाओं को सामने रखा। आधुनिक समय में इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डिजाइन जैसे क्षेत्रों को अलग-अलग विषयों के रूप में देखने के बजाय उनके पारस्परिक संबंधों को समझना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
तकनीकी विशेषज्ञता किसी समाधान की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता विकसित करने में मदद करती है, जबकि डिजाइन की सोच उस समाधान को उपयोगकर्ता के लिए सहज, उपयोगी और प्रभावी बनाने पर जोर देती है। दोनों दृष्टिकोणों का समन्वय ऐसे उत्पादों और प्रणालियों के विकास में सहायक हो सकता है, जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ मानवीय जरूरतों के अनुरूप भी हों।
उदाहरण के तौर पर, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के क्षेत्र में किसी उपकरण का तकनीकी रूप से काम करना पर्याप्त नहीं होता। उसे उपयोग में आसान, सुरक्षित और संबंधित कार्य के अनुकूल बनाना भी आवश्यक है। इसी तरह, डिजाइन के क्षेत्र में किसी उत्पाद का आकर्षक दिखाई देना पर्याप्त नहीं है; उसकी कार्यक्षमता, टिकाऊपन और उपयोगिता भी महत्वपूर्ण होती है।
दोनों महोत्सवों ने इसी व्यापक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया कि नवाचार के लिए तकनीकी दक्षता और रचनात्मक चिंतन का साथ-साथ विकास जरूरी है।
उच्च शिक्षा में व्यावहारिक गतिविधियों, परियोजनाओं और प्रतियोगिताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान विद्यार्थियों को बुनियादी अवधारणाएं समझने में मदद करता है, जबकि प्रयोग और परियोजनाएं उन्हें इन अवधारणाओं को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने का अनुभव देती हैं।
‘एलिसियन 4.0’ और ‘सिन्थेसिया 3.0’ ने विद्यार्थियों को इसी प्रकार के अनुभव उपलब्ध कराने पर जोर दिया। तकनीकी प्रतियोगिताओं में भाग लेने से उन्हें अपनी विश्लेषणात्मक क्षमता और तकनीकी समझ को परखने का अवसर मिला, जबकि डिजाइन आधारित गतिविधियों ने उन्हें कल्पनाशीलता, अवलोकन और सामग्री के रचनात्मक उपयोग की संभावनाओं से परिचित कराया।
ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने और उन्हें अपने विचार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करने में भी सहायक हो सकते हैं। साथ ही, दूसरे प्रतिभागियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने से उन्हें अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने और सहयोग की भावना विकसित करने का अवसर मिलता है।
व्यावहारिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पक्ष असफल प्रयोगों से सीखना भी है। किसी तकनीकी मॉडल या डिजाइन में शुरुआती प्रयास सफल न होने पर कारणों की पहचान करना, समाधान में सुधार करना और दोबारा प्रयास करना नवाचार की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। इस दृष्टि से महोत्सव विद्यार्थियों को प्रयोग, संशोधन और निरंतर सीखने की संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बने।
तकनीकी और रचनात्मक महोत्सवों का महत्व केवल प्रतियोगिताओं में भाग लेने या तैयार परियोजनाओं को प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं रहता। ऐसे आयोजनों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने के लिए भी समन्वय, संवाद, समय प्रबंधन और सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है।
‘एलिसियन 4.0’ और ‘सिन्थेसिया 3.0’ की गतिविधियों में विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, आयोजकों और स्वयंसेवकों की भागीदारी ने सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया। किसी भी शैक्षणिक आयोजन की सफलता के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले लोगों के बीच प्रभावी तालमेल आवश्यक होता है।
विद्यार्थियों के लिए आयोजन संबंधी जिम्मेदारियों में भाग लेना नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। इससे उन्हें योजनाओं को व्यवस्थित करना, कार्यों का विभाजन करना, समयसीमा का ध्यान रखना और समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक रूप से काम करना सीखने का अवसर मिलता है।
इस प्रकार ऐसे महोत्सव औपचारिक पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के समग्र विकास में योगदान दे सकते हैं।
‘एलिसियन’ और ‘सिन्थेसिया’ के क्रमिक संस्करण विश्वविद्यालय परिसर में तकनीकी और रचनात्मक गतिविधियों को नियमित शैक्षणिक जीवन से जोड़ने की पहल को दर्शाते हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचियों को पहचानने, नए क्षेत्रों में प्रयोग करने और अलग-अलग विषयों के साथ काम करने का अवसर मिलता है।
विश्वविद्यालयों में नवाचार संस्कृति विकसित करने के लिए केवल आधुनिक तकनीक तक पहुंच होना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ऐसा शैक्षणिक वातावरण भी जरूरी है, जिसमें विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, नए विचार प्रस्तुत करने, प्रयोग करने और अपने कार्यों में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
तकनीकी महोत्सव और डिजाइन उत्सव इस दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं। इनसे विद्यार्थियों को अपने ज्ञान को व्यवहार में लाने के साथ-साथ अपने काम के परिणामों पर विचार करने और दूसरों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
आईपीयू के पूर्वी दिल्ली परिसर में आयोजित इन दोनों महोत्सवों ने इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टिकोण को सामने रखा, जिसमें तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता, सहयोग और व्यावहारिक अनुभव को एक साथ महत्व दिया गया।
आज के समय में तकनीकी विकास और डिजाइन की भूमिका केवल नए उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इन दोनों क्षेत्रों से समाज की विभिन्न आवश्यकताओं को समझने और उनके अनुरूप उपयोगी समाधान विकसित करने की अपेक्षा भी की जाती है।
तकनीकी नवाचार के माध्यम से परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, ऊर्जा दक्षता और औद्योगिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान तलाशे जा सकते हैं। इसी प्रकार मानव-केंद्रित डिजाइन किसी सेवा या उत्पाद को अधिक सुलभ, सुविधाजनक और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने में योगदान दे सकता है।
विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही समस्याओं को व्यापक दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। किसी भी समाधान की उपयोगिता का आकलन करते समय उसकी तकनीकी व्यवहार्यता के साथ-साथ लागत, सुरक्षा, उपलब्धता और सामाजिक प्रभाव पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।
‘एलिसियन 4.0’ और ‘सिन्थेसिया 3.0’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों को इन पहलुओं के प्रति जागरूक करने और अपने ज्ञान को व्यापक संदर्भ में देखने का अवसर प्रदान करते हैं।
आईपीयू के पूर्वी दिल्ली परिसर में आयोजित दोनों महोत्सवों ने इस विचार को रेखांकित किया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना या परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं है। शिक्षा का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, समस्याओं का विश्लेषण करने, सहयोग के साथ काम करने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नए समाधान विकसित करने में सक्षम बनाना भी है।
‘एलिसियन 4.0’ ने तकनीकी नवाचार, ऑटोमेशन, समस्या-समाधान और उद्यमशीलता की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि ‘सिन्थेसिया 3.0’ ने रचनात्मक अभिव्यक्ति, डिजाइन आधारित चिंतन और व्यावहारिक प्रयोगों को प्रमुखता दी। दोनों के विषय अलग होने के बावजूद उनका साझा उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग के लिए तैयार करना रहा।
इन आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने, नई संभावनाओं का अन्वेषण करने और भविष्य की चुनौतियों के प्रति समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिला।
निष्कर्षतः, ‘एलिसियन 4.0’ और ‘सिन्थेसिया 3.0’ ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के पूर्वी दिल्ली परिसर में तकनीक और रचनात्मकता के समन्वय को प्रमुखता दी। इन महोत्सवों ने व्यावहारिक शिक्षा, नवाचार, टीमवर्क और उद्यमशील सोच के महत्व को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि भविष्य के सक्षम पेशेवरों के निर्माण के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ कल्पनाशीलता, सामाजिक संवेदनशीलता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति भी आवश्यक है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


