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- 13h ago
नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने एक बड़ा फैसला लेते हुए तीनों फॉर्मेट की कप्तानी से हटने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि टीम को एक मजबूत स्थिति में छोड़कर आगे बढ़ने का समय आ गया है। हरमनप्रीत ने साफ किया कि कप्तानी छोड़ने के बावजूद भारतीय क्रिकेट और टीम के प्रति उनका प्यार और जुड़ाव हमेशा बना रहेगा।
हरमनप्रीत कौर ने जून 2022 में दिग्गज मिताली राज के संन्यास के बाद भारतीय महिला टीम की तीनों फॉर्मेट में कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में भारतीय महिला क्रिकेट ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। सबसे बड़ी उपलब्धि 2025 वनडे विश्व कप का खिताब जीतना रही, जब भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार महिला वनडे विश्व कप अपने नाम किया।
विश्व कप अभियान में भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम को शिकस्त दी और इसके बाद फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर ऐतिहासिक खिताब अपने नाम किया। हरमनप्रीत के कप्तानी कार्यकाल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स में भी लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की।
हरमनप्रीत ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए कप्तानी छोड़ने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि सभी फॉर्मेट में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी से हटना उनके लिए आसान फैसला नहीं है। इस फैसले के पीछे वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और ऐसे अनेक पल हैं, जो उनके जीवन का हिस्सा हमेशा बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट और टीम को अपना सब कुछ दिया है। इसमें उनका समय, मेहनत, पसीना और कई बार उनके व्यक्तिगत खेल तथा निजी महत्वाकांक्षाओं का हिस्सा भी शामिल रहा। उनके मुताबिक कई ऐसे मौके आए जब उन्हें अपनी व्यक्तिगत परफॉर्मेंस, व्यक्तिगत विकास और अपनी इच्छाओं को पीछे रखना पड़ा, क्योंकि उनके लिए टीम हमेशा सबसे ऊपर रही।
हरमनप्रीत ने अपने संदेश में कप्तानी के दौरान सामने आई चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कप्तान के रूप में उन्हें कई ऐसे फैसले लेने पड़े, जो आसान नहीं थे और जिन्हें हर कोई हमेशा समझ नहीं पाता था। कई फैसलों की व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी।
उनका कहना है कि उनके हर फैसले के पीछे एक ही उद्देश्य था—भारतीय टीम को बेहतर बनाना और टीम की दूसरी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने, खुद पर भरोसा करने तथा अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का अवसर देना।
कप्तानी के दौरान उन्हें जीत के साथ-साथ हार, निराशा, आलोचना और संदेह के दौर से भी गुजरना पड़ा। लेकिन इन मुश्किलों के साथ उन्होंने ऐसे पल भी देखे, जब भारतीय टीम ने शानदार जीत हासिल की, जश्न मनाया और देश का प्रतिनिधित्व करने का गर्व महसूस किया।
हरमनप्रीत के कप्तानी छोड़ने का फैसला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने भारतीय टीम को विश्व चैंपियन बनाने के बाद यह कदम उठाया है। लंबे समय तक टीम की कमान संभालने के बाद उन्होंने अब नेतृत्व की जिम्मेदारी किसी और को सौंपने का फैसला किया है।
उनके संदेश से स्पष्ट है कि वह टीम के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में प्रतिभा, चरित्र, विश्वास और भविष्य की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं। यही भरोसा उन्हें कप्तानी छोड़ने के फैसले के बाद भी संतुष्टि दे रहा है।
पूर्व कप्तान ने कहा कि वह भावनाओं से भरे दिल के साथ कप्तानी छोड़ रही हैं, लेकिन उनके मन में शांति है। उन्हें विश्वास है कि भारतीय महिला टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
हरमनप्रीत ने अपने संदेश में कहा कि उन्हें लगता है कि उन्होंने अपना फर्ज निभा दिया है। उन्होंने जिम्मेदारी को गर्व के साथ निभाया और भारतीय महिला क्रिकेट की अगुआई करने के अवसर के लिए हमेशा आभारी रहेंगी।
उनका यह बयान उनके लंबे कप्तानी कार्यकाल के प्रति संतुष्टि और टीम के भविष्य को लेकर उनके विश्वास को दर्शाता है।
हरमनप्रीत ने कहा कि कप्तानी का सफर भले ही अब समाप्त हो रहा है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए उनका प्यार कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह क्रिकेट से दूर नहीं जा रही हैं। बल्कि अब वह खुद को एक खिलाड़ी के रूप में फिर से खेल के प्रति उसी जुनून के साथ समर्पित करना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि अब वह खेल के प्यार के लिए खेलने को तैयार हैं। यानी कप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारियों से मुक्त होकर उनका ध्यान अब अपने खेल और टीम के प्रदर्शन पर केंद्रित रहेगा।
37 वर्षीय हरमनप्रीत कौर ने भारतीय महिला टीम की कप्तानी लंबे समय तक की। उनके नेतृत्व में उन्होंने 5 टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में टीम की कमान संभाली।
कप्तान के रूप में उनका आखिरी बड़ा काम पिछले महीने निशिन में भारतीय टीम को लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक दिलाना रहा। उनके कप्तानी कार्यकाल में भारतीय महिला क्रिकेट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।
उनके अनुभव का लाभ अब भी टीम को एक खिलाड़ी के रूप में मिलने की उम्मीद है।
हरमनप्रीत के कप्तानी छोड़ने के फैसले से एक दिन पहले एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई थी। उन्होंने भारतीय टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार के साथ बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया से मुलाकात की थी।
गुवाहाटी में हुई इस बैठक में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के भविष्य और आगे के रोडमैप को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद हरमनप्रीत का कप्तानी छोड़ने का फैसला सामने आया।
ऐसे में माना जा रहा है कि भारतीय महिला क्रिकेट के अगले चरण को लेकर टीम प्रबंधन और बोर्ड के स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श चल रहा है।
हरमनप्रीत ने अपने संदेश में यह भी बताया कि कप्तानी के दौरान उन्होंने कई बार अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को टीम की जरूरतों के पीछे रखा। उन्होंने कहा कि उनके लिए टीम हमेशा पहले रही।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन, विकास और निजी इच्छाओं को कई मौकों पर पीछे किया, ताकि टीम को आगे बढ़ाया जा सके। उनका मानना था कि कप्तान के रूप में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी टीम के हित को प्राथमिकता देना थी।
यह बयान उनके कप्तानी कार्यकाल के दौरान सामने आई उन चुनौतियों की ओर भी इशारा करता है, जिनमें एक कप्तान को व्यक्तिगत प्रदर्शन और टीम की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
हरमनप्रीत ने भारतीय महिला टीम के साथ अपने सफर में क्रिकेट के लगभग हर रंग को देखा। उन्होंने मुश्किल हार, निराशा, आलोचना और संदेह का सामना किया तो दूसरी ओर बड़ी जीत, जश्न और ऐतिहासिक उपलब्धियों का हिस्सा भी बनीं।
विशेष रूप से 2025 वनडे विश्व कप की जीत उनके कप्तानी करियर के सबसे यादगार अध्यायों में शामिल हो गई। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को सेमीफाइनल में हराने और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को मात देने के बाद भारतीय टीम ने महिला क्रिकेट में नया इतिहास रचा।
इस उपलब्धि ने हरमनप्रीत के कप्तानी करियर को एक यादगार अंत भी दिया।
हरमनप्रीत ने अपने संदेश में टीम की साथी खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ, सपोर्ट स्टाफ, टीम प्रबंधन, बीसीसीआई, परिवार और प्रशंसकों का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि अच्छे और बुरे दोनों समय में उनके साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों का योगदान उनके सफर में महत्वपूर्ण रहा है। कप्तानी के दौरान मिली आलोचना और समर्थन दोनों को उन्होंने अपने सफर का हिस्सा माना।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेट के लिए उनका जुड़ाव आगे भी कायम रहेगा।
हरमनप्रीत कौर के लिए यह विदाई किसी अंत की तरह नहीं है। उन्होंने खुद साफ कर दिया है कि कप्तानी भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन उनका क्रिकेट सफर जारी रहेगा।
कप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद अब उनके पास अपने व्यक्तिगत खेल पर अधिक ध्यान देने का अवसर होगा। टीम में उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
हरमनप्रीत ने अपने संदेश का अंत भावुक लेकिन दृढ़ शब्दों में किया—उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना खून, पसीना, त्याग और गर्व सब कुछ टीम को दे दिया है। अब कप्तानी का अध्याय समाप्त हो रहा है, लेकिन सफर अभी जारी है।
हरमनप्रीत कौर का कप्तानी छोड़ना भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। उनके नेतृत्व में टीम ने कई उतार-चढ़ाव देखे और अंततः विश्व कप जैसे बड़े मंच पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की।
अब भारतीय महिला टीम को एक नए कप्तान के नेतृत्व में आगे बढ़ना होगा। नई कप्तानी के साथ टीम के सामने नई चुनौतियां और नई उम्मीदें होंगी। वहीं हरमनप्रीत का अनुभव एक वरिष्ठ खिलाड़ी के तौर पर टीम के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा।
कुल मिलाकर, हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी की जिम्मेदारी को एक लंबे और चुनौतीपूर्ण सफर के बाद अलविदा कहा है। उनके शब्दों से साफ है कि उन्होंने इस फैसले को भावनात्मक रूप से जरूर लिया है, लेकिन वह इसे भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य के लिए सही कदम मानती हैं। कप्तानी खत्म हुई है, लेकिन हरमनप्रीत का भारतीय क्रिकेट से रिश्ता और उनका खेल का सफर अभी जारी है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


