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- 13h ago
नई दिल्ली। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, संस्कृति और सिनेमा के संगम का संदेश देने वाले एक विशेष समारोह में फिल्म ‘हनुमान अंश’ की पूरी टीम को गांधी स्मृति में सम्मानित किया गया। शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में फिल्म की टीम को ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ प्रदान किया गया।
फिल्म ‘शिरडी साईं बाबा’ के निर्माता तथा शिरडी साईं बाबा फाउंडेशन के संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी औषिम खेरतपाल ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ की टीम को यह सम्मान प्रदान किया। समारोह में फिल्म के माध्यम से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयासों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने समारोह को विशेष बना दिया। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल, शिरडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, औषिम खेरतपाल तथा साईं बाबा पीस अवॉर्ड्स की इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिस्ट संजना जॉन समारोह में उपस्थित रहे।
‘हनुमान अंश’ की ओर से निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, अभिनेता शोभिनव सत्य, बाल कलाकार विहान शेगड़े, निर्माता नम्रता और रागिनी सोना सहित फिल्म से जुड़े अन्य सदस्यों ने समारोह में हिस्सा लिया।
फिल्म में बाल कलाकार विहान शेगड़े ने 14 वर्षीय बाबा की भूमिका निभाई है। समारोह में उनकी भूमिका और फिल्म की विषयवस्तु को लेकर भी चर्चा हुई। फिल्म की टीम ने सम्मान को अपने लिए विशेष अवसर बताते हुए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर सिनेमा बनाने के प्रयासों को आगे जारी रखने की बात कही।
समारोह को संबोधित करते हुए औषिम खेरतपाल ने कहा कि करीब 26 वर्ष पहले उन्होंने साईं बाबा के जीवन और उनके संदेशों पर आधारित फिल्म ‘शिरडी साईं बाबा’ का निर्माण किया था।
उन्होंने कहा कि उस फिल्म को बनाने के पीछे उनका उद्देश्य साईं बाबा के संदेश, मानवता, सेवा और जनकल्याण की भावना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना था। उनके अनुसार सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए सामाजिक, आध्यात्मिक और मानवीय संदेशों को भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने ‘हनुमान अंश’ की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्म भी आस्था और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े विषय को सिनेमा के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में आध्यात्मिक कथाओं और चरित्रों का विशेष स्थान रहा है। रामायण, महाभारत और संत परंपरा से जुड़े अनेक प्रसंग सदियों से भारतीय समाज में कथाओं, लोकनाट्य, संगीत और साहित्य के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते रहे हैं।
आधुनिक समय में सिनेमा और डिजिटल माध्यम इन कथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। इसी संदर्भ में ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों के जरिए आध्यात्मिक विषयों को आधुनिक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने के प्रयास पर समारोह में चर्चा की गई।
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्में भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में योगदान देती हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक कथाओं की परंपरा बहुत पुरानी है और आज आवश्यकता है कि इन विषयों को समकालीन माध्यमों के जरिए युवाओं और बच्चों तक पहुंचाया जाए।
गांधी स्मृति जैसे ऐतिहासिक स्थल पर फिल्म की टीम को सम्मानित किया जाना भी समारोह का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति, विचार और आध्यात्मिक परंपराओं को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।
गांधी स्मृति देश के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और स्मृति स्थलों में से एक है। ऐसे स्थान पर आयोजित कार्यक्रम में जब आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषय पर आधारित फिल्म की टीम को सम्मानित किया गया तो समारोह का महत्व और बढ़ गया।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय परंपरा में सेवा, मानवता, आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों की चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को केवल इतिहास के रूप में देखने के बजाय उसे नई पीढ़ी तक संवाद और रचनात्मक माध्यमों के जरिए पहुंचाने की आवश्यकता है।
आज के दौर में फिल्में समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचने वाला प्रभावी माध्यम हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों के सामने जहां कहानी को दर्शकों के अनुरूप प्रस्तुत करने की चुनौती रहती है, वहीं उन्हें अपनी सांस्कृतिक विषयवस्तु के साथ संवेदनशीलता भी बनाए रखनी होती है।
‘हनुमान अंश’ की टीम को सम्मानित किए जाने के अवसर पर इसी तरह के प्रयासों की चर्चा हुई। कार्यक्रम में कहा गया कि आध्यात्मिक विषयों को आधुनिक सिनेमाई भाषा में प्रस्तुत करने से युवा दर्शकों के बीच भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को लेकर संवाद की संभावना बढ़ती है।
समारोह में फिल्म के बाल कलाकार विहान शेगड़े की भूमिका भी चर्चा का विषय रही। विहान ने फिल्म में 14 वर्षीय बाबा की भूमिका निभाई है।
बाल कलाकार के माध्यम से किसी ऐतिहासिक अथवा आध्यात्मिक चरित्र के जीवन के शुरुआती दौर को पर्दे पर प्रस्तुत करना कहानी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। फिल्म की टीम के साथ विहान की मौजूदगी ने समारोह में युवा प्रतिभाओं की भागीदारी को भी रेखांकित किया।
समारोह में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी, अभिनेता शोभिनव सत्य और निर्माता नम्रता एवं रागिनी सोना सहित फिल्म से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। टीम के सदस्यों ने इस सम्मान को फिल्म के निर्माण से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की पहचान बताया।
फिल्म निर्माण में निर्देशक से लेकर कलाकार, निर्माता और तकनीकी टीम तक बड़ी संख्या में लोग योगदान देते हैं। किसी फिल्म को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलना पूरी टीम के लिए उसके रचनात्मक प्रयासों की सराहना के रूप में देखा जाता है।
औषिम खेरतपाल ने अपने संबोधन में साईं बाबा से जुड़े संदेशों और जनकल्याण की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘शिरडी साईं बाबा’ के निर्माण के पीछे भी उनका उद्देश्य लोगों तक साईं बाबा के जीवन और संदेश को पहुंचाना था।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक विषयों पर काम करने वाले रचनाकारों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे विषयों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए सिनेमा जैसे व्यापक माध्यम का उपयोग करें।
समारोह में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। इसमें लोक परंपराएं, कथाएं, साहित्य, कला, संगीत, दर्शन और सामाजिक मूल्यों की लंबी परंपरा शामिल है।
नई पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी और मनोरंजन प्राप्त करता है। ऐसे में सांस्कृतिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों को भारतीय परंपराओं और समकालीन दर्शकों के बीच संवाद का माध्यम माना जा सकता है।
भारतीय सिनेमा में धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर फिल्म निर्माण की लंबी परंपरा रही है। अलग-अलग समय में रामायण, महाभारत, संतों, देवी-देवताओं और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों से जुड़े विषय फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों का हिस्सा रहे हैं।
‘हनुमान अंश’ को लेकर आयोजित समारोह में भी इसी व्यापक परंपरा के संदर्भ में आध्यात्मिक विषयों को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करने के प्रयासों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का केंद्र केवल सम्मान प्रदान करना नहीं रहा, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को रचनात्मक माध्यमों के जरिए प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए साहित्य, रंगमंच, सिनेमा और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन माध्यमों के जरिए पारंपरिक कथाओं और मूल्यों को आधुनिक दर्शकों के सामने नए तरीके से रखा जा सकता है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ की टीम के लिए गांधी स्मृति में मिला ‘साइटेशन ऑफ ऑनर’ विशेष अवसर रहा। निर्देशक, कलाकार और निर्माता समारोह में मौजूद रहे और सम्मान ग्रहण किया।
टीम से जुड़े लोगों के लिए यह सम्मान फिल्म की विषयवस्तु और उसके निर्माण से जुड़े प्रयासों की सार्वजनिक पहचान के तौर पर महत्वपूर्ण रहा। समारोह में मौजूद अतिथियों ने टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दीं।
समारोह में विजय गोयल और सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे की मौजूदगी रही। इसके अलावा औषिम खेरतपाल और साईं बाबा पीस अवॉर्ड्स की इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिस्ट संजना जॉन भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।
विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया। समारोह में सिनेमा, आध्यात्मिकता, संस्कृति और सामाजिक संदेशों के बीच संबंधों पर चर्चा हुई।
समारोह के दौरान यह विचार सामने आया कि भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहनी चाहिए। ऐसे प्रयासों के जरिए देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ की टीम के सम्मान के साथ आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और सिनेमा के बीच संवाद का एक अवसर बना। गांधी स्मृति में हुए समारोह में सम्मान, आध्यात्मिक विचार और सांस्कृतिक विरासत—तीनों पहलू प्रमुखता से सामने आए।


