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- 13h ago
नई दिल्ली। वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 में इस बार मुकाबला केवल धावकों की रफ्तार और स्टॉपवॉच के बीच नहीं होगा। राजधानी की सड़कों पर दौड़ते हजारों धावकों के सपनों को मंजिल तक पहुंचाने में 25 पेससेटर भी अहम भूमिका निभाएंगे। इन पेससेटरों की टीम में जहां वर्षों से इस प्रतिष्ठित रेस का हिस्सा बन रहे अनुभवी धावक हैं, वहीं कॉरपोरेट जगत के वरिष्ठ अधिकारी, सरकारी अफसर, उद्यमी और देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे रनर्स भी शामिल हैं।
इस टीम में सबसे खास नाम माउंट एवरेस्ट फतह कर चुकीं डॉ. चिन्मयी जे. त्रिशूलमूर्ति का है। बेंगलुरु की प्रैक्टिसिंग ऑप्थल्मोलॉजिस्ट और फैकल्टी सदस्य डॉ. चिन्मयी इस बार 10 हजार मीटर की दौड़ में पहली बार पेससेटर की भूमिका निभाएंगी। पर्वतारोहण में ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों का सामना कर चुकीं चिन्मयी अब दिल्ली की सड़कों पर दूसरे धावकों को उनकी निर्धारित रफ्तार बनाए रखने और लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेंगी।
लंबी दूरी की रेस में पेससेटर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पेससेटर वह अनुभवी धावक होता है जो पूरी रेस के दौरान एक पूर्व निर्धारित गति बनाए रखने की कोशिश करता है। उसके पीछे चलने वाले धावकों का समूह इसी स्थिर गति का सहारा लेकर अपने लक्ष्य समय के मुताबिक दौड़ता है।
ऐसे समूह को आम तौर पर ‘बस’ कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी धावक का लक्ष्य हाफ मैराथन को 2 घंटे 10 मिनट में पूरा करना है तो वह संबंधित लक्ष्य समय वाले पेससेटर की बस के साथ दौड़ सकता है। इससे उसे हर समय अपनी गति और लक्ष्य समय का अंदाजा मिलता रहता है।
इस बार वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में 17 हाफ मैराथन पेससेटर 1 घंटे 50 मिनट से लेकर 2 घंटे 40 मिनट तक के लक्ष्य समय वाली बसों का नेतृत्व करेंगे। वहीं 10 किलोमीटर की दौड़ में आठ महिला पेससेटर 55 से 88 मिनट के लक्ष्य समय वाली बसों को रफ्तार देंगी।
यानी अलग-अलग क्षमता और लक्ष्य वाले धावकों को अपनी निर्धारित गति के अनुरूप दौड़ने में इन पेससेटरों का अनुभव मार्गदर्शक बनेगा।
पेससेटरों की इस टीम की खासियत इसकी भौगोलिक विविधता भी है। कुल 25 पेससेटरों में 11 दिल्ली-एनसीआर से बाहर के हैं। बेंगलुरु, कोलकाता, मुंबई, दार्जिलिंग, जम्मू और झारखंड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से आए ये धावक राजधानी में आयोजित इस बड़ी रेस का हिस्सा बनेंगे।
इससे वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन केवल दिल्ली के धावकों तक सीमित आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि इसमें देश के विभिन्न हिस्सों की रनिंग कम्युनिटी की भागीदारी दिखाई देती है।
इन पेससेटरों में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। टीम में आयकर विभाग की संयुक्त आयुक्त, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव और रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (वित्त) रजत अग्रवाल जैसे अधिकारी भी शामिल हैं।
सरकारी जिम्मेदारियों के बीच दौड़ के लिए समय निकालने वाले ये अधिकारी इस बात का उदाहरण हैं कि रनिंग अब केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि फिटनेस और व्यक्तिगत अनुशासन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है।
पेससेटरों की टीम में अनुभव की कमी नहीं है। दीपक शर्मा इस बार 16वीं बार वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में हिस्सा लेंगे। इतने लंबे समय तक इस आयोजन से जुड़े रहना अपने आप में उनकी निरंतरता और दौड़ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वहीं गणेश अनंतनारायणन इस प्रतिष्ठित आयोजन के 13 संस्करणों का हिस्सा रह चुके हैं। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 1 घंटा 48 मिनट है। लंबे समय से रेस में हिस्सा लेने का अनुभव उन्हें उन धावकों के लिए खास तौर पर उपयोगी बनाता है जो अपने समय को लेकर गंभीर हैं और निर्धारित लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
संजय छाबड़ा भी लगातार 12वीं बार दिल्ली हाफ मैराथन में दौड़ेंगे। वर्षों से एक ही आयोजन का हिस्सा बनते रहने वाले इन धावकों के लिए यह रेस अब महज प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उनके रनिंग सफर का अहम हिस्सा बन चुकी है।
पेससेटर टीम में होसुर रनर्स क्लब के डिलीवरी हेड और संस्थापक थांडेसेवरन पेरियासामी की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक है।
सितंबर 2018 से वह लगातार 2,850 से अधिक दिनों तक दौड़ चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 22,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है। लगातार दौड़ने की उनकी उपलब्धि के लिए उनके नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में रिकॉर्ड दर्ज हैं।
2025 में भी उन्होंने वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में 2:30 घंटे वाली बस का नेतृत्व किया था। इस बार भी उनका अनुभव उन धावकों के लिए उपयोगी होगा जो ढाई घंटे के आसपास रेस पूरी करने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेंगे।
उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि दौड़ किसी एक दिन का खेल नहीं, बल्कि लंबे समय तक निभाया जाने वाला अनुशासन है।
पेससेटर टीम में कॉरपोरेट जगत का प्रतिनिधित्व भी दिखाई देगा। एसबीआई क्रेडिट कार्ड की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और अल्ट्रा-मैराथन धाविका रश्मि मोहंती इस बार पेससेटर की भूमिका निभाएंगी।
रश्मि ने नवंबर 2010 में वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के साथ अपने हाफ मैराथन सफर की शुरुआत की थी। 2025 में उन्हें आयोजन के 15 संस्करण पूरे करने के लिए सम्मानित किया गया था।
उनके लिए इस रेस से जुड़ाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि लगातार रेस में हिस्सा लेना दौड़ने की आदत और जुनून को बनाए रखने का एक तरीका है।
पेससेटर बनने को वह उस रनिंग कम्युनिटी के प्रति अपनी जिम्मेदारी के रूप में देखती हैं, जिसने उनके अपने रनिंग सफर में साथ दिया है। अब वह अपनी रफ्तार और अनुभव का इस्तेमाल दूसरे धावकों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाने में करेंगी।
इस साल पेससेटरों में सबसे अलग और आकर्षक प्रोफाइल डॉ. चिन्मयी जे. त्रिशूलमूर्ति की है। बेंगलुरु की रहने वाली चिन्मयी पेशे से प्रैक्टिसिंग ऑप्थल्मोलॉजिस्ट और फैकल्टी सदस्य हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ चिकित्सा पेशे तक सीमित नहीं है।
वह प्रशिक्षित सर्च, ट्रीट एंड रेस्क्यू माउंटेनियर भी हैं और 2026 में माउंट एवरेस्ट फतह कर चुकी हैं।
2017 से दौड़ रहीं डॉ. चिन्मयी ने 2019 में पर्वतारोहण की ओर कदम बढ़ाया। दिल्ली में यह उनकी पहली रेस होगी और 10 किलोमीटर की दौड़ में वह पहली बार पेससेटर की जिम्मेदारी संभालेंगी।
दिल्ली की सड़क पर उनकी भूमिका भले ही एवरेस्ट की ऊंचाई से बिल्कुल अलग हो, लेकिन दोनों में एक समानता है—लक्ष्य तक पहुंचने के लिए निरंतरता, धैर्य और अपनी गति पर नियंत्रण।
डॉ. चिन्मयी के लिए पर्वतारोहण का अनुभव रनिंग से अलग जरूर है, लेकिन उन्होंने एवरेस्ट अभियान के दौरान जो धैर्य और मानसिक मजबूती हासिल की, वह दौड़ में भी उनके लिए उपयोगी होगी।
उनके अनुसार एवरेस्ट अभियान करीब 50 से 55 दिनों तक चलता है और इतने लंबे सफर में शिखर तक पहुंचने का अवसर अंतिम सप्ताह में आता है।
इस तरह के अभियान में शुरुआती उत्साह से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है अपनी ऊर्जा को लंबे समय तक बचाकर रखना। यही सिद्धांत लंबी दूरी की दौड़ में भी महत्वपूर्ण है—शुरुआत में जरूरत से ज्यादा तेज दौड़ने के बजाय अपनी क्षमता के अनुरूप गति बनाए रखना।
अब यही अनुभव डॉ. चिन्मयी दिल्ली में उन धावकों के साथ साझा करेंगी, जो पहली बार या अपने निर्धारित समय को बेहतर करने के लक्ष्य के साथ रेस में उतरेंगे।
पहली बार रेस में उतरने वाले धावकों के लिए डॉ. चिन्मयी का संदेश भी बेहद सहज है। उनका कहना है कि धावकों को अपनी गति को लेकर अनावश्यक दबाव नहीं लेना चाहिए।
जिस गति पर शरीर सहज महसूस करे, उसी गति में दौड़ते हुए रेस का आनंद लेना अधिक महत्वपूर्ण है। खासतौर पर नए धावकों के लिए रेस को केवल समय के पैमाने पर देखना जरूरी नहीं है। पहली रेस में अनुभव हासिल करना, शरीर की क्षमता को समझना और फिनिश लाइन तक आत्मविश्वास के साथ पहुंचना भी बड़ी उपलब्धि है।
उनकी यह सलाह उन हजारों प्रतिभागियों के लिए उपयोगी हो सकती है जो पहली बार इतनी बड़ी रोड रेस में शामिल होंगे।
रश्मि मोहंती भी रेस के दिन शरीर को तरोताजा रखने पर जोर देती हैं। उनका संदेश है कि अंतिम समय में जरूरत से ज्यादा प्रशिक्षण करने के बजाय धावकों को स्टार्ट लाइन पर मजबूत, फिट और पूरी तरह तैयार होकर पहुंचना चाहिए।
रेस से ठीक पहले अत्यधिक मेहनत करने के बजाय शरीर को पर्याप्त आराम देना और पहले से की गई तैयारी पर भरोसा रखना जरूरी है।
अनुभवी धावकों की यह सलाह खास तौर पर उन प्रतिभागियों के लिए महत्वपूर्ण है जो रेस से पहले अंतिम दिनों में अपनी तैयारी अचानक बढ़ा देते हैं।
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन 2026 में पेससेटरों की भूमिका सिर्फ एक तय गति बनाए रखने तक सीमित नहीं होगी। उनके पीछे ऐसे हजारों धावक दौड़ेंगे, जिनके अपने-अपने लक्ष्य होंगे।
किसी का लक्ष्य पहली बार हाफ मैराथन पूरा करना होगा, कोई अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय हासिल करना चाहेगा, तो कोई निर्धारित समय के भीतर फिनिश लाइन पार करने की कोशिश करेगा।
ऐसे में पेससेटर धावकों के लिए चलते-फिरते गति संकेतक की तरह काम करेंगे। उनकी स्थिर रफ्तार प्रतिभागियों को यह समझने में मदद करेगी कि वे अपने लक्ष्य समय के हिसाब से सही गति पर दौड़ रहे हैं या नहीं।
इस बार पेससेटरों की टीम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों और अनुभवों के लोग एक साथ नजर आएंगे।
किसी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराया है, कोई वर्षों से मैराथन दौड़ रहा है, किसी ने हजारों किलोमीटर की लगातार रनिंग की है, तो कोई देश की प्रशासनिक और कॉरपोरेट व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहा है।
लेकिन रेस के दिन इन सभी की पहचान एक होगी—पेससेटर।
इनका काम अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि दर्ज करना नहीं, बल्कि दूसरे धावकों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करना होगा।
यही वजह है कि इस बार वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन में मुकाबला सिर्फ घड़ी के खिलाफ नहीं होगा। 25 पेससेटर अलग-अलग लक्ष्य समय वाली बसों को अपनी निर्धारित रफ्तार देंगे और हजारों धावकों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।
इनमें किसी के पास एवरेस्ट की ऊंचाई का अनुभव है, किसी के पास वर्षों की मैराथन तपस्या, किसी के पास हजारों किलोमीटर की लगातार दौड़ का रिकॉर्ड और किसी के पास प्रशासन तथा कॉरपोरेट जगत की जिम्मेदारियों के बीच फिटनेस को बनाए रखने का अनुभव। राजधानी की सड़क पर इन 25 पेससेटरों के कदमों की रफ्तार के पीछे हजारों धावकों के सपने दौड़ेंगे—और हर कदम उन्हें अपनी तय मंजिल के थोड़ा और करीब ले जाने की कोशिश करेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


