यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों के तेजी से विस्तार के बीच भारत के रोजगार बाजार में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे समय में आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति के साथ कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, श्रमिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और कार्यबल की भागीदारी को समान महत्व देना जरूरी है। यह बात सोमवार को आयोजित ईएफआई-सीआईआई राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में सामने आई।
एम्प्लॉयर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (EFI) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सहयोग से औद्योगिक संबंध एवं श्रम तथा पुरस्कार 2026 पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ उद्योग जगत, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, नियोक्ताओं और श्रमिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम “एआई युग में औद्योगिक संबंधों और कार्यबल की भागीदारी का पुनर्गठन” रही। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में बदलती तकनीक और रोजगार के स्वरूप, श्रम संहिताओं, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा, ईपीएफओ सुधार, कौशल विकास और वैश्विक स्तर पर बदलते कार्यक्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी बदलाव को केवल उत्पादकता और लागत के नजरिए से देखने के बजाय उसके मानवीय और सामाजिक प्रभावों को भी समझना होगा। एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कर्मचारियों को नए कौशल से लैस करना, उन्हें बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार करना और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाना भविष्य की कार्यनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
मुख्य संबोधन में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भविष्य के लिए तैयार श्रम व्यवस्था का आधार श्रम और उद्योग के बीच साझेदारी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य का श्रम पारिस्थितिकी तंत्र किसी एक पक्ष के समर्थन के बजाय साझेदारी की भावना पर आधारित होना चाहिए। उनके अनुसार, भारत की श्रम संहिताएं आधुनिक और विकासोन्मुखी ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने के साथ उद्योगों के लिए अनुपालन को आसान बनाना है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि एआई और नई प्रौद्योगिकियां काम की प्रकृति को तेजी से बदल रही हैं। इस बदलाव के बीच जिम्मेदार तकनीकी अपनाने, लगातार कौशल विकास और नियोक्ताओं तथा श्रमिकों के बीच सार्थक सामाजिक संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल उत्पादकता बढ़ाने का माध्यम बन सकता है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कार्यबल बदलाव की प्रक्रिया से पीछे न छूटे। कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करना इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
केंद्रीय मंत्री ने सामाजिक सुरक्षा को केवल नीतिगत आवश्यकता के रूप में देखने के बजाय इसे श्रमिकों की गरिमा और सामाजिक समावेशन से जोड़ने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों तक भी सामाजिक सुरक्षा की पहुंच बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब श्रमिक कल्याण और उद्योग का विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो इससे टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार होता है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक गतिविधियों के साथ रोजगार की गुणवत्ता और श्रमिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने औपचारिक और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए मजबूत रोजगार और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत के कार्यबल का बड़ा हिस्सा अभी भी अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है। इसलिए केवल रोजगार के अवसर पैदा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, करियर मार्गदर्शन, रोजगार से जुड़ाव और कौशल आधारित व्यवसायों के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराने की भी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में रोजगार का ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की जरूरत है, जो श्रमिकों को अधिक निश्चितता, गरिमा और आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करे।
डॉ. कुमार ने उद्योग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का अंतिम उद्देश्य वास्तविक और सार्थक रोजगार के अवसरों से जुड़ना होना चाहिए। केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के बजाय यह देखना भी जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार बाजार में किस प्रकार के अवसर मिल रहे हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव ने विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही कौशल और रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक करियर काउंसलिंग के साथ विद्यार्थियों को रोजगार बाजार में मौजूद विभिन्न क्षेत्रों और बदलती मांग के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए। इससे छात्र अपनी शिक्षा और कौशल को भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर सकेंगे।
उन्होंने स्कूल स्तर पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, स्कूलों में प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित और परिचित वातावरण में नई क्षमताएं विकसित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं से विशेष रूप से लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है, क्योंकि शुरुआती स्तर पर प्रशिक्षण और करियर संबंधी जानकारी मिलने से वे आगे के अवसरों के बारे में बेहतर जानकारी हासिल कर सकती हैं।
केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन रमेश कृष्णमूर्ति ने कर्मचारियों से ईपीएफओ को अपने कार्यजीवन की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा से जोड़कर देखने और नियमित योगदान करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को कार्यजीवन के शुरुआती दौर से ही भविष्य की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने नियोक्ताओं से भी अपने कर्मचारियों को ईपीएफओ और नियमित योगदान के महत्व के बारे में जानकारी देने की अपील की।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि कर्मचारियों को यह समझने की जरूरत है कि आज किया गया योगदान भविष्य में उनके लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार बन सकता है। उन्होंने कार्यजीवन के अगले 20 से 30 वर्षों को ध्यान में रखकर वित्तीय योजना बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्रीय भविष्य निधि संगठन की सेवाओं को लेकर उन्होंने बताया कि ईपीएफओ नियोक्ताओं के लिए लागत और मुकदमेबाजी कम करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
उन्होंने ईपीएफओ 3.0 के माध्यम से सेवाओं को अधिक सहज और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेवाओं को कोर बैंकिंग सेवाओं की तरह आसान और सुगम बनाने तथा उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार पर काम किया जा रहा है।
तकनीकी बदलावों के दौर में सामाजिक सुरक्षा सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक सरल और सुविधाजनक बनाना कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्षवर्धन चितले ने कहा कि एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकें कार्यस्थल की प्रकृति को तेजी से बदल रही हैं।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के माध्यम से कार्यबल की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है, जिसका उद्योग और भारतीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, तकनीकी बदलावों को अपनाते समय कार्यबल को परिवर्तन के केंद्र में रखना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण को भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार, नई तकनीकों से उत्पादकता बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कर्मचारी बदलती कार्यप्रणाली के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
इसका अर्थ प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और कार्यस्थल पर परिवर्तन के प्रति कर्मचारियों की भागीदारी को बढ़ावा देना हो सकता है। तकनीकी बदलाव जितना तेजी से होगा, उतनी ही तेजी से कर्मचारियों को नए कार्य कौशल से जोड़ने की आवश्यकता होगी।
सम्मेलन में औद्योगिक संबंधों को भी चर्चा का प्रमुख विषय बनाया गया। एआई और ऑटोमेशन के कारण कार्यस्थलों पर भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना के बीच नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि कार्यस्थल पर तकनीकी परिवर्तन लागू करते समय कर्मचारियों की चिंताओं और आवश्यकताओं को समझना जरूरी है। इसके लिए संस्थागत संवाद और सहयोग की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
औद्योगिक संबंधों में विश्वास, पारदर्शिता और संवाद को बढ़ावा देने से तकनीकी बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। साथ ही कर्मचारियों को नई भूमिकाओं के लिए तैयार करने और कौशल विकास की जरूरतों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बदलती तकनीक के कारण कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होगी, जो नए डिजिटल उपकरणों और कार्यप्रणालियों के साथ काम कर सकें।
ऐसे में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे वास्तविक उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ना आवश्यक है। प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने से पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण को रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में तकनीकी कौशल के साथ संचार, समस्या समाधान, रचनात्मक सोच और अनुकूलन क्षमता जैसे कौशल भी महत्वपूर्ण रहेंगे। इससे कर्मचारियों को बदलते कार्यस्थल में अपनी भूमिका के अनुरूप ढलने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन का समापन ईएफआई–सीआईआई राष्ट्रीय पुरस्कार: कर्मचारी संबंधों में उत्कृष्टता 2026 के साथ हुआ। इस अवसर पर ऐसे उद्यमों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने कर्मचारी-केंद्रित कार्यप्रणालियों, समावेशी कार्यस्थलों, मजबूत कर्मचारी संबंधों और औद्योगिक सौहार्द को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए।
पुरस्कारों के माध्यम से कार्यस्थल पर बेहतर कर्मचारी संबंधों, संवाद और समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सामने लाया गया। कार्यक्रम में यह संदेश भी उभरकर आया कि किसी संगठन की उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास में कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन में हुई चर्चाओं का व्यापक निष्कर्ष यह रहा कि एआई और ऑटोमेशन भारत की अर्थव्यवस्था तथा रोजगार बाजार को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बन रहे हैं। इन तकनीकों से उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ाने के अवसर मौजूद हैं, लेकिन इनके साथ कार्यबल की तैयारी भी जरूरी है।
भारत के लिए चुनौती केवल नई तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने की भी है जिसमें श्रमिक बदलते रोजगार बाजार के साथ आगे बढ़ सकें। इसके लिए सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, रोजगार के अवसर, कार्यस्थल पर संवाद और कर्मचारी कल्याण को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर सम्मेलन में जोर दिया गया।
विशेष रूप से भारत के बड़े युवा कार्यबल और अनौपचारिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को देखते हुए रोजगार की गुणवत्ता और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण विषय बने रह सकते हैं।
एआई के दौर में कार्य की प्रकृति बदल सकती है, नई भूमिकाएं सामने आ सकती हैं और कई मौजूदा कार्यप्रणालियों में बदलाव हो सकता है। ऐसे में तकनीक और मानव संसाधन के बीच संतुलन, निरंतर कौशल विकास तथा व्यापक सामाजिक सुरक्षा भारत के भविष्य के कार्यबल की तैयारी के महत्वपूर्ण आधार होंगे।
ईएफआई-सीआईआई राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 ने इसी व्यापक विमर्श को सामने रखा कि भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए केवल मशीनों और तकनीक पर नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा जो इस बदलती अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


