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- 13h ago
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल किया है। इस बदलाव में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक और मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। इसके अलावा ब्रज मोहन राम को ओडिशा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सिक्किम के मौजूदा राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु भेजा गया है। <Cite refs={["turn413665news12","turn413665news13","turn413665news14"]}/>
राष्ट्रपति के इन आदेशों से छह राज्यों के राजभवनों में बदलाव होगा। चार राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं, जबकि दो राज्यों में मौजूदा राज्यपालों को दूसरी जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों के लागू होने की तारीख संबंधित पदों का कार्यभार संभालने से जुड़ी होगी।
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह ओम प्रकाश माथुर का स्थान लेंगे, जिन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया है।
दुष्यंत गौतम भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में उनकी भूमिका रही है। अब राज्यपाल के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी सिक्किम में संवैधानिक पद का दायित्व संभालना होगा।
राज्यपाल राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के प्रमुख होते हैं। उन्हें संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार, विधानसभा और अन्य संवैधानिक संस्थाओं से संबंधित विभिन्न जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।
पूर्व भाजपा सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह थावरचंद गहलोत का स्थान लेंगी।
सुधा यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ क्षेत्र से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। उनका राजनीतिक अनुभव संसदीय कार्यों और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में सदस्य के रूप में भी वह जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।
कर्नाटक में राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होगी। राज्यपाल का पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके तहत विधानसभा से जुड़े कार्यों तथा अन्य निर्धारित दायित्वों का निर्वहन किया जाता है।
मध्य प्रदेश के बालाघाट से पूर्व लोकसभा सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का स्थान लेंगे।
ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और बालाघाट संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब उन्हें उत्तराखंड में संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उत्तराखंड में राज्यपाल की भूमिका राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण होती है। विधानसभा सत्र, विधेयकों से संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं और राज्य सरकार से जुड़े निर्धारित मामलों में राज्यपाल संविधान के अनुसार कार्य करते हैं।
झारखंड के पलामू से पूर्व लोकसभा सांसद ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे।
ब्रज मोहन राम का राजनीतिक अनुभव लोकसभा की राजनीति से जुड़ा रहा है। राज्यपाल के रूप में ओडिशा में उनकी नई जिम्मेदारी संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करना होगा।
हरि बाबू कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। राष्ट्रपति के नए आदेश के बाद राज्य में राज्यपाल का पदभार नए नियुक्त व्यक्ति को सौंपा जाएगा। <Cite refs={["turn413665news12","turn413665news15"]}/>
सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को अब केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राजस्थान से संबंध रखने वाले माथुर पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया था।
अब केरल में वह राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का स्थान लेंगे। इस बदलाव के साथ ओम प्रकाश माथुर को एक नए राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह मार्च 2026 से तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। उस समय तत्कालीन राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद आर्लेकर को तमिलनाडु की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी।
अब राष्ट्रपति के नए आदेश के बाद उन्हें तमिलनाडु का नियमित राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
आर्लेकर इससे पहले गोवा विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वह हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनका तमिलनाडु में नियमित राज्यपाल के रूप में नियुक्त होना पहले से संभाली जा रही अतिरिक्त जिम्मेदारी में बदलाव है।
| राज्य | नए राज्यपाल |
|---|---|
| सिक्किम | दुष्यंत गौतम |
| कर्नाटक | डॉ. सुधा यादव |
| उत्तराखंड | डॉ. ढाल सिंह बिसेन |
| ओडिशा | ब्रज मोहन राम |
| केरल | ओम प्रकाश माथुर |
| तमिलनाडु | राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर |
इन नियुक्तियों के साथ चार राज्यों को नए राज्यपाल मिलेंगे, जबकि केरल और तमिलनाडु के राज्यपालों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। <Cite refs={["turn413665news12","turn413665news13"]}/>
राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में संवैधानिक दायित्व निभाते हैं। उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राज्यपाल का कार्य संविधान के अनुरूप राज्य की शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करना है।
राज्यपाल विधानसभा से संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं, विधेयकों पर कार्रवाई और संविधान में निर्धारित अन्य मामलों में भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच संबंध भी संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार संचालित होते हैं।
छह राज्यों में किए गए इस फेरबदल के बाद अब सभी की नजरें नवनियुक्त राज्यपालों के कार्यभार संभालने पर रहेंगी। संबंधित राज्यों में नई नियुक्तियां आधिकारिक रूप से प्रभावी होने के बाद नए राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन शुरू करेंगे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


