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- 13h ago
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सीमा प्रबंधन और गश्त को लेकर जारी मुद्दों के बीच विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जब चीनी सेनाएं पहले से निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटती हैं, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर बिगड़ जाती है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दोनों देश सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों के माध्यम से बातचीत जारी रखे हुए हैं।
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर की टिप्पणियों के बाद सामने आई है। सीमा पर जारी गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एलएसी से जुड़े क्षेत्रों की समझ को और स्पष्ट करने के उपायों पर भी चर्चा हो रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है। उनके बयान से स्पष्ट है कि सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत और मौजूदा व्यवस्थाओं का इस्तेमाल जारी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत-चीन सीमा की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों पक्ष एलएसी पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने के लिए स्थापित राजनयिक तथा सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देश सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एलएसी से जुड़े क्षेत्रों की समझ को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास के लिए आवश्यक है।
जायसवाल ने यह भी संकेत दिया कि सीमा पर गश्त से जुड़े विशिष्ट सवालों के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जाना चाहिए। उन्होंने पहले दिए गए स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि जब चीनी सेनाएं निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटती हैं, तो भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर अस्त-व्यस्त हो जाती है।
इस बयान में भारत ने सीमा पर तनाव की परिस्थितियों को लेकर अपनी चिंता दोहराई है। साथ ही, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने की बात कहकर यह भी स्पष्ट किया है कि लंबित मुद्दों के समाधान के लिए राजनयिक और सैन्य माध्यमों को सक्रिय रखा गया है।
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा वह रेखा है, जो दोनों देशों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अलग करती है। दोनों देशों के बीच सीमा के कुछ हिस्सों को लेकर मतभेद रहे हैं। इसी कारण एलएसी पर गश्त, सैनिकों की तैनाती और सीमा प्रबंधन लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
सीमा पर गश्त का उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाए रखना और वास्तविक नियंत्रण रेखा के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना है। जब दोनों पक्षों की सीमा संबंधी धारणाएं अलग-अलग होती हैं, तो गश्त के दौरान आमना-सामना होने या तनाव पैदा होने की आशंका बढ़ सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में गश्त के निर्धारित तौर-तरीकों का पालन, सैन्य अधिकारियों के बीच संपर्क और विवादों के समाधान के लिए स्थापित व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। विदेश मंत्रालय के ताजा बयान में भी इन्हीं पहलुओं पर जोर दिया गया है।
मंत्रालय ने कहा है कि निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटने पर स्थिति बिगड़ सकती है। यह भारत की ओर से सीमा प्रबंधन को लेकर व्यक्त की गई चिंता है। सीमा पर किसी विशिष्ट घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित आधिकारिक बयानों और सैन्य स्तर पर उपलब्ध जानकारी को देखना आवश्यक है।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और चीन सीमा पर लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल विवादों का समाधान करना ही नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों को भी रोकना है, जिनसे तनाव बढ़ सकता है।
सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच किसी घटना को लेकर अलग-अलग आकलन होने की स्थिति में संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सैन्य अधिकारियों के बीच संपर्क और राजनयिक बातचीत के माध्यम से दोनों पक्ष घटनाओं को स्पष्ट करने, तनाव कम करने और आगे की कार्रवाई को लेकर संवाद कर सकते हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कई स्तरों पर होती रही है। इनमें राजनयिक संवाद और सैन्य अधिकारियों के बीच चर्चा की व्यवस्थाएं शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्ष इन माध्यमों का उपयोग जारी रखे हुए हैं।
हालांकि, बातचीत जारी रहने का अर्थ यह नहीं है कि सीमा से जुड़े सभी विवादों का समाधान हो गया है। मंत्रालय ने स्वयं एलएसी पर लंबित मुद्दों का उल्लेख किया है। इसलिए सीमा प्रबंधन और विवादों के समाधान को लेकर आगे की बातचीत महत्वपूर्ण बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एलएसी से जुड़े क्षेत्रों की समझ को और स्पष्ट करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा के कुछ हिस्सों को लेकर धारणाओं में अंतर रहने के कारण गश्त और सीमा प्रबंधन से संबंधित चुनौतियां सामने आती रही हैं। ऐसे में एलएसी की समझ को बेहतर बनाने के उपाय तनाव कम करने और सीमावर्ती गतिविधियों के प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं।
इस तरह की चर्चा का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए केवल सैन्य मौजूदगी पर्याप्त नहीं होती। संबंधित क्षेत्रों में गतिविधियों को लेकर स्पष्टता, संवाद और स्थापित प्रक्रियाओं का पालन भी आवश्यक है।
मंत्रालय ने इस मुद्दे को दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों से जोड़ते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है, इसलिए सीमा पर स्थिरता का प्रभाव अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संवाद पर भी पड़ सकता है।
भारत-चीन सीमा पर स्थिति को लेकर आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर की टिप्पणियों के बाद विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया सामने आई। आईटीबीपी भारत की प्रमुख सीमा सुरक्षा एजेंसियों में से एक है, जो भारत-चीन सीमा के बड़े हिस्से की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाती है।
सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की भूमिका निगरानी, सुरक्षा और निर्धारित जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में सीमा की स्थिति से जुड़े अधिकारियों के बयान सार्वजनिक चर्चा का विषय बनते हैं।
विदेश मंत्रालय ने सीमा से जुड़े विशिष्ट सवालों के लिए रक्षा मंत्रालय का रुख करने की बात कही और साथ ही भारत-चीन सीमा पर गश्त के मुद्दे को लेकर अपना पहले का रुख दोहराया। मंत्रालय ने कहा कि निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटने पर सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति प्रभावित होती है।
हालांकि, आईटीबीपी प्रमुख की टिप्पणियों और विदेश मंत्रालय के बयान के बीच संबंध को समझने के लिए दोनों बयानों का पूरा संदर्भ देखना जरूरी है। किसी विशिष्ट क्षेत्र में आमना-सामना या तनाव की स्थिति के संबंध में निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
भारत-चीन सीमा पर स्थिति को लेकर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बीच कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार से सवाल किए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आईटीबीपी प्रमुख के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब सीमा पर फेस-ऑफ यानी सैनिकों के आमने-सामने होने की स्थिति की बात सामने आ रही है, तो प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जयराम रमेश ने विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश में जारी फेस-ऑफ से जुड़ी टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए सीमा पर मौजूदा हालात को लेकर अधिक जानकारी देने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि चीन सीमा से संबंधित घटनाक्रमों पर सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
कांग्रेस लंबे समय से भारत-चीन सीमा पर सरकार की ओर से अधिक स्पष्ट जानकारी दिए जाने की मांग करती रही है। पार्टी के नेताओं ने कई मौकों पर सीमा की स्थिति, चीन की गतिविधियों और सरकार के आधिकारिक रुख को लेकर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में भी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, जयराम रमेश के बयान को कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। सीमा की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए संबंधित सरकारी बयानों और उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों को देखना आवश्यक है।
भारत और चीन एशिया के दो बड़े पड़ोसी देश हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, क्षेत्रीय स्थिरता और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संबंधों का व्यापक महत्व है। इसके बावजूद सीमा विवाद दोनों देशों के संबंधों में एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ने से सैन्य और राजनयिक स्तर पर अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके विपरीत, सीमा पर स्थिरता और संवाद से अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है।
विदेश मंत्रालय ने भी अपने बयान में इसी पहलू पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
भारत की ओर से यह रुख ऐसे समय में दोहराया गया है, जब सीमा प्रबंधन और गश्त से जुड़े सवाल राजनीतिक तथा रणनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। अब आगे की बातचीत में सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को किस तरह सुलझाया जाता है और गश्त से संबंधित समझ को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी नियमित मीडिया बातचीत के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और विदेशों में फंसे यात्रियों से जुड़े कुछ अन्य मुद्दों पर भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यमन के तट के पास हुई एक घटना में शामिल नाव पर सवार 14 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। इस घटनाक्रम में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण रही। ऐसे मामलों में विदेश मंत्रालय और संबंधित भारतीय मिशनों की भूमिका प्रभावित नागरिकों की स्थिति का पता लगाने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में अहम होती है।
विदेश मंत्रालय ने यूरोप में विरोध-प्रदर्शनों वाली जगहों से दूर रहने की भारतीय नागरिकों को सलाह देने की भी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, यूरोप में भारतीय मिशन वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों के संपर्क में हैं। इस सलाह का उद्देश्य विरोध-प्रदर्शनों के दौरान संभावित जोखिमों से भारतीय नागरिकों को दूर रखना है।
इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब में फंसे लगभग 3,000 उमराह यात्री लौट आए हैं। शेष यात्रियों को वापस लाने के प्रयास जारी हैं। यह घटनाक्रम विदेशों में मौजूद भारतीय नागरिकों और यात्रियों की सहायता से जुड़ा है।
इन मुद्दों पर विदेश मंत्रालय की जानकारी से स्पष्ट होता है कि उसकी नियमित मीडिया ब्रीफिंग में सीमा संबंधी कूटनीतिक घटनाक्रमों के साथ विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता से जुड़े विषय भी शामिल रहे।
भारत-चीन सीमा पर गश्त और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के बीच जारी संवाद के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटने पर सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति प्रभावित होती है। साथ ही, उसने यह भी कहा है कि दोनों पक्ष लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने के लिए राजनयिक तथा सैन्य माध्यमों से बातचीत कर रहे हैं।
कांग्रेस ने इस बीच सीमा पर स्थिति को लेकर सरकार से अधिक स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। ऐसे में आने वाले समय में सरकारी बयानों, सीमा प्रबंधन से जुड़ी बातचीत और विपक्ष की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।
निष्कर्षतः, विदेश मंत्रालय का ताजा बयान भारत की इस चिंता को सामने रखता है कि एलएसी पर निर्धारित गश्ती तौर-तरीकों से हटने पर तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। मंत्रालय ने बातचीत, बेहतर सीमा प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर जोर दिया है। वहीं, कांग्रेस ने सीमा की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


