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- 13h ago
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की 103 वर्ष पुरानी रामलीला परंपरा एक बार फिर भगवान श्रीराम की मर्यादा, आदर्शों और भारतीय संस्कृति का संदेश लेकर दर्शकों के बीच पहुंचने के लिए तैयार है। श्री धार्मिक लीला कमेटी (परेड ग्राउंड) की ओर से रविवार को माधवदास पार्क, लालकिला मैदान में विधि-विधान के साथ भूमि पूजन किया गया। भगवान श्रीराम के दरबार की पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच रामलीला के भव्य आयोजन की तैयारियों का औपचारिक श्रीगणेश हुआ।
भूमि पूजन समारोह के दौरान श्रद्धालुओं और अतिथियों ने भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का स्मरण करते हुए रामलीला के सफल, शांतिपूर्ण और निर्विघ्न आयोजन की कामना की। पूजा के दौरान पूरा वातावरण धार्मिक और भक्तिमय नजर आया। जय श्रीराम के उद्घोष के साथ समारोह में मौजूद लोगों ने आगामी रामलीला को लेकर उत्साह व्यक्त किया।
पुरानी लाजपत राय मार्केट के सामने होने वाली यह रामलीला दिल्ली की ऐतिहासिक रामलीला परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। 103 वर्षों से लगातार चली आ रही यह परंपरा समय के साथ मंचीय तकनीक, कलाकारों और प्रस्तुति के स्तर पर बदलती रही है, लेकिन रामकथा के मूल संदेश और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का उद्देश्य लगातार कायम है।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार रामलीला का उद्देश्य केवल धार्मिक कथा का मंचन करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से समाज में मर्यादा, सत्य, त्याग, कर्तव्य, संयम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव जैसे मूल्यों को मजबूत करना भी है।
कमेटी का कहना है कि दिल्ली में रामलीला की परंपरा ने कई पीढ़ियों को एक साथ जोड़ा है। बुजुर्गों ने जिस रामलीला को देखा, उसी परंपरा को अब नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक और नए मंचीय स्वरूप के साथ देख रही है। इस बदलाव के बावजूद रामकथा की मूल भावना को अक्षुण्ण रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस वर्ष रामलीला का एक प्रमुख आकर्षण अभिनेता बिंदु दारा सिंह का हनुमान की भूमिका निभाना होगा। धार्मिक और पौराणिक किरदारों के मंचन से जुड़े दर्शकों के बीच बिंदु दारा सिंह की भागीदारी को लेकर विशेष उत्सुकता देखने को मिल रही है।
आयोजकों के मुताबिक बिंदु दारा सिंह रामलीला में हनुमान के महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत करेंगे। हनुमान का चरित्र भगवान राम के प्रति भक्ति, समर्पण, सेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस भूमिका को लेकर दर्शकों में विशेष आकर्षण बना हुआ है।
भूमि पूजन समारोह में अभिनेता शहबाज खान और शिल्पा रायजादा भी मौजूद रहे। फिल्म और टेलीविजन से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी।
आयोजकों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना बड़ी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से रामलीला की प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की रुचि के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
कमेटी पदाधिकारियों के अनुसार मंचन में आधुनिक तकनीक, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रभाव और बेहतर मंच सज्जा का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन तकनीक का उपयोग रामकथा की मूल भावना को प्रभावित किए बिना किया जाएगा।
रामलीला में भगवान राम के वनवास, सीता हरण, हनुमान का लंका गमन, लंका दहन, राम-रावण युद्ध और विजयादशमी सहित रामायण के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए जाने की तैयारी है।
कमेटी के महासचिव धीरजधर गुप्ता और सचिव प्रदीप शरण ने कहा कि 103 वर्षों से चली आ रही रामलीला दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ मंचन की तकनीक बदल सकती है, कलाकार बदल सकते हैं और प्रस्तुति का स्वरूप आधुनिक हो सकता है, लेकिन भगवान श्रीराम के आदर्श और रामकथा का मूल संदेश हमेशा प्रासंगिक रहेगा।
उन्होंने कहा कि रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी निहित है। राम के जीवन से लोगों को मर्यादा और कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा मिलती है, जबकि रामायण के अन्य पात्र परिवार, समाज, मित्रता, त्याग और समर्पण के विभिन्न आदर्शों को सामने रखते हैं।
आयोजकों ने कहा कि रामकथा भारतीय समाज की जीवनशैली और संस्कारों से गहराई से जुड़ी हुई है। भगवान राम का चरित्र सत्य, मर्यादा और कर्तव्य के पालन का संदेश देता है। रामलीला के माध्यम से बच्चों और युवाओं को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ नैतिक मूल्यों और कर्तव्य के मार्ग पर चलना भी उतना ही जरूरी है।
माता सीता का चरित्र त्याग और धैर्य का संदेश देता है। लक्ष्मण के चरित्र में भाई के प्रति समर्पण दिखाई देता है, जबकि भरत का चरित्र त्याग और परिवार के प्रति निष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत करता है। वहीं हनुमान भक्ति, सेवा, साहस और समर्पण की मिसाल हैं।
भूमि पूजन समारोह में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मीरा कुमार, सांसद प्रवीण खंडेलवाल, सांसद बांसुरी स्वराज, सांसद योगेंद्र चंदोलिया, सांसद मनोज तिवारी, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद कमलजीत सहरावत, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल और वीरेंद्र सचदेवा, पूर्व पार्षद अशोक जैन सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शामिल रहे।
कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों ने रामलीला के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए आयोजकों को आगामी मंचन के लिए शुभकामनाएं दीं। भूमि पूजन के दौरान अतिथियों और आयोजकों ने रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने तथा इसे नई पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कमेटी के प्रवक्ता रवि जैन ने बताया कि 103 वर्षों से रामलीला मंचन की परंपरा निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक किसी धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन की परंपरा का लगातार जारी रहना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि कमेटी का प्रयास है कि इस ऐतिहासिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक उसी श्रद्धा के साथ पहुंचाया जाए। इसके लिए आधुनिक मंचीय प्रस्तुति और तकनीकी साधनों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि युवा दर्शक भी रामलीला से जुड़ें और रामकथा को केवल धार्मिक कथा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों के संदेश के रूप में समझें।
रामलीला आयोजकों का मानना है कि आज के दौर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को नई पीढ़ी की भाषा और रुचि के अनुरूप प्रस्तुत करना जरूरी है। इसी दिशा में मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, संवाद प्रस्तुति और अभिनय को अधिक प्रभावशाली बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
आयोजकों ने कहा कि रामलीला देखने आने वाले परिवारों में बच्चों और युवाओं की संख्या बढ़ाना भी कमेटी की प्राथमिकताओं में शामिल है। रामकथा के माध्यम से बच्चों को भारतीय इतिहास, संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
भूमि पूजन के साथ ही अब रामलीला के भव्य मंचन की तैयारियां तेज हो जाएंगी। मंच निर्माण, सजावट, प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था, कलाकारों की रिहर्सल, सुरक्षा व्यवस्था और दर्शकों की सुविधा से जुड़े कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार रामलीला स्थल पर आने वाले दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए प्रवेश और निकास व्यवस्था, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
श्री धार्मिक लीला कमेटी का कहना है कि रामलीला का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं है। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से समाज को यह संदेश देना भी है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना कठिन हो सकता है, लेकिन अंततः सदाचार और सत्य की विजय होती है।
रामलीला में रावण के चरित्र के माध्यम से अहंकार और अन्याय के परिणामों को दर्शाया जाता है, जबकि भगवान राम का चरित्र संयम, मर्यादा और कर्तव्य की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि रामलीला सदियों से भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा बनी हुई है।
राजधानी में रामलीला का इतिहास काफी पुराना है और अलग-अलग कमेटियां वर्षों से इस परंपरा को आगे बढ़ाती आ रही हैं। श्री धार्मिक लीला कमेटी की 103 वर्ष पुरानी परंपरा भी इसी सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण कड़ी है।
इस वर्ष फिल्म कलाकारों की भागीदारी और आधुनिक मंचीय प्रस्तुति के जरिए आयोजन को नया स्वरूप देने की तैयारी है। वहीं भूमि पूजन के साथ कमेटी ने यह स्पष्ट किया है कि आधुनिकता के साथ परंपरा और संस्कृति के मूल स्वरूप को भी बनाए रखा जाएगा।
भूमि पूजन समारोह के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों ने भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लिया तथा रामलीला के सफल आयोजन की कामना की। कार्यक्रम के दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
अब राजधानी के दर्शकों को उस समय का इंतजार है, जब लालकिला मैदान में एक बार फिर रामकथा के प्रसंग मंच पर जीवंत होंगे और हनुमान के रूप में बिंदु दारा सिंह सहित कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों के सामने होंगी। 103 वर्ष पुरानी यह रामलीला परंपरा एक बार फिर धर्म, संस्कृति, संस्कार और मनोरंजन का संगम लेकर दिल्लीवासियों के बीच पहुंचने की तैयारी में है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


