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- 13h ago
नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंद्र 2026’ के नौसैनिक हार्बर चरण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। इस चरण के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS सह्याद्रि और रूसी नौसेना के युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव की ऑपरेशनल टीमों ने योजना सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं ने आगामी समुद्री चरण के लिए विस्तृत कार्यक्रम और संचालन संबंधी रूपरेखा तैयार की।
भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस संबंध में जानकारी साझा की। नौसेना के अनुसार, योजना सम्मेलन में रूसी नौसेना के पैसिफिक फ्लीट के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य समुद्री चरण की गतिविधियों को व्यवस्थित करना, दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना था।
यह अभ्यास भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त संचालन प्रक्रियाओं, पेशेवर अनुभवों और परिचालन क्षमताओं को साझा करने का अवसर मिलता है।
‘इंद्र 2026’ के हार्बर चरण की शुरुआत योजना सम्मेलन के साथ हुई, जिसमें दोनों देशों के नौसैनिक प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। इस दौरान समुद्री चरण के लिए गतिविधियों का विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया। संयुक्त नौसैनिक अभ्यास में ऐसे योजना सम्मेलनों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इनके माध्यम से भाग लेने वाली सेनाएं अपनी भूमिकाओं, संचालन प्रक्रियाओं और समन्वय संबंधी जरूरतों को स्पष्ट करती हैं।
हार्बर चरण के दौरान जहाजों के चालक दल और ऑपरेशनल टीमें बंदरगाह पर रहते हुए विभिन्न पेशेवर गतिविधियों में भाग लेती हैं। इनमें परिचालन योजनाओं पर चर्चा, प्रक्रियाओं का समन्वय और समुद्र में होने वाले अभ्यास की तैयारियां शामिल हो सकती हैं।
समुद्री चरण में प्रवेश से पहले इस तरह की तैयारी दोनों नौसेनाओं के बीच संचार और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करती है। इससे संयुक्त गतिविधियों के दौरान विभिन्न परिस्थितियों में तालमेल स्थापित करने और परिचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता मजबूत होती है।
अभ्यास से जुड़ी गतिविधियों के तहत बंदरगाह पर मौजूद भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्रि पर एक प्रोटोकॉल बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूसी पैसिफिक फ्लीट की मिश्रित सेनाओं के प्रिमोरस्की फ्लोटिला के कमांडर वाइस एडमिरल ए.वाई. सिसुएव के साथ मुलाकात की।
बैठक का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और पेशेवर संबंधों को मजबूत करना था। सैन्य अभ्यास के दौरान इस तरह की मुलाकातें केवल औपचारिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने और भविष्य के सहयोग के अवसरों पर चर्चा करने का मंच भी प्रदान करती हैं।
भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों में नियमित सैन्य संपर्क, संयुक्त प्रशिक्षण और उच्चस्तरीय संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ‘इंद्र’ जैसे अभ्यास दोनों पक्षों को अपने-अपने परिचालन अनुभवों से सीखने और सहयोग के व्यावहारिक पहलुओं को आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने इससे पहले रूस के चेल्याबिंस्क क्षेत्र और रूसी सुदूर पूर्व में भारत-रूस संयुक्त क्रॉस-ब्रांच सैन्य अभ्यास ‘इंद्र 2026’ शुरू होने की घोषणा की थी। मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास में दोनों देशों की थल सेना इकाइयों के साथ भारतीय और रूसी नौसेनाओं के युद्धपोत तथा रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज के विमान भी शामिल हैं।
क्रॉस-ब्रांच अभ्यास का अर्थ है कि इसमें सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाएं अपनी संबंधित भूमिकाओं के साथ हिस्सा लेती हैं। ऐसे अभ्यासों का उद्देश्य विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना और संयुक्त परिस्थितियों में काम करने की क्षमता विकसित करना होता है।
थल सेना, नौसेना और वायु शक्ति से जुड़ी इकाइयों की भागीदारी अभ्यास के दायरे को व्यापक बनाती है। हालांकि, अलग-अलग चरणों में शामिल इकाइयों की भूमिकाएं और गतिविधियां अभ्यास की निर्धारित योजना के अनुसार तय होती हैं।
रूसी युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव और भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्रि के चालक दल 10 अक्टूबर को व्लादिवोस्तोक पहुंचे थे। दोनों जहाजों के प्रतिनिधियों ने इसके बाद पैसिफिक फ्लीट के मुख्य नौसैनिक अड्डे पर आयोजित उद्घाटन समारोह में भाग लिया।
व्लादिवोस्तोक रूस के सुदूर पूर्व में स्थित एक प्रमुख बंदरगाह शहर है और रूसी पैसिफिक फ्लीट की गतिविधियों के लिहाज से इसका सामरिक महत्व है। यहां दोनों देशों के युद्धपोतों की मौजूदगी और संयुक्त अभ्यास से जुड़ी गतिविधियां भारत-रूस नौसैनिक सहयोग को प्रदर्शित करती हैं।
बंदरगाह पर आगमन, उद्घाटन समारोह और योजना सम्मेलन जैसे शुरुआती कार्यक्रम संयुक्त अभ्यास के समुद्री चरण के लिए आधार तैयार करते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से दोनों पक्ष परिचालन तैयारियों की समीक्षा करते हैं और आगे की संयुक्त गतिविधियों के लिए जरूरी समन्वय स्थापित करते हैं।
भारतीय नौसेना का INS सह्याद्रि और रूसी नौसेना का अल्दार त्सिदेनझापोव इस नौसैनिक चरण के प्रमुख भागीदार हैं। दोनों युद्धपोतों के चालक दल की भागीदारी से भारतीय और रूसी नौसैनिक कर्मियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने और समुद्री संचालन से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलता है।
संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों में जहाजों के बीच संचार, निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार काम करना और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे प्रशिक्षण से भाग लेने वाले कर्मियों को व्यावहारिक अनुभव हासिल करने में मदद मिलती है।
हालांकि, ‘इंद्र 2026’ के समुद्री चरण में किन-किन विशिष्ट गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, इसका अंतिम विवरण आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार ही स्पष्ट होगा।
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सैन्य उपकरणों, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से अपने रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाते रहे हैं। ‘इंद्र’ इसी सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो दोनों देशों की सेनाओं को नियमित संपर्क और संयुक्त प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करता है।
आज के बदलते सुरक्षा वातावरण में सैन्य सहयोग का महत्व केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है। संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से सेनाएं एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं को समझती हैं, संवाद की व्यवस्था को मजबूत करती हैं और साझा प्रशिक्षण के जरिए अपनी क्षमताओं का विकास करती हैं।
नौसैनिक सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि समुद्री क्षेत्र में विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच प्रभावी संचार और समन्वय की जरूरत होती है। संयुक्त प्रशिक्षण से समुद्र में नियोजित गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने और पेशेवर स्तर पर आपसी समझ बढ़ाने में मदद मिलती है।
‘इंद्र 2026’ का हार्बर चरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना सम्मेलन और प्रोटोकॉल बैठक के बाद अब दोनों नौसेनाओं की नजर समुद्री चरण की निर्धारित गतिविधियों पर रहेगी।
हार्बर चरण का प्रमुख उद्देश्य आगामी समुद्री गतिविधियों की तैयारी करना और दोनों पक्षों के बीच परिचालन तालमेल सुनिश्चित करना है। योजना सम्मेलन में विस्तृत कार्यक्रम तैयार किए जाने के बाद अभ्यास के अगले चरण में निर्धारित गतिविधियों को अंजाम दिया जाएगा।
इस अभ्यास से भारतीय और रूसी नौसेनाओं के बीच पेशेवर संवाद को बढ़ावा मिलने, परिचालन अनुभव साझा करने और संयुक्त प्रशिक्षण की क्षमता को मजबूत करने की उम्मीद है। इसके साथ ही, व्यापक क्रॉस-ब्रांच अभ्यास दोनों देशों की थल सेना, नौसेना और संबंधित सैन्य इकाइयों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, ‘इंद्र 2026’ भारत और रूस के रक्षा संबंधों में संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य समन्वय के महत्व को रेखांकित करता है। हार्बर चरण की शुरुआत के साथ दोनों देशों ने समुद्री अभ्यास की तैयारियों को आगे बढ़ा दिया है। अब अभ्यास के आगामी कार्यक्रम और आधिकारिक रूप से घोषित गतिविधियां इसके परिचालन परिणामों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगी।


