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- 11h ago
नई दिल्ली। भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा, तकनीक, विनिर्माण और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की पहल हुई है। नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII), भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय, भारत में बेल्जियम दूतावास और बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री के संयुक्त सहयोग से भारत-बेल्जियम डिफेंस CEO राउंडटेबल और B2B मीटिंग्स का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के नेतृत्व में भारत आए उच्चस्तरीय बेल्जियन प्रतिनिधिमंडल की आधिकारिक यात्रा के दौरान आयोजित हुआ। प्रतिनिधिमंडल में बेल्जियम सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकन भी शामिल रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को एक साझा मंच पर लाना और रक्षा उत्पादन, तकनीकी सहयोग, निवेश, सह-विकास, सह-उत्पादन तथा वैश्विक सप्लाई चेन में साझेदारी के नए अवसर तलाशना था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में रक्षा सहयोग को लेकर लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर को भारत-बेल्जियम रक्षा संबंधों में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया।
यह पहल दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए दोनों पक्ष रक्षा उद्योगों के बीच संपर्क बढ़ाने, तकनीकी क्षमताओं को जोड़ने और भविष्य की संयुक्त परियोजनाओं के लिए संभावनाएं तलाशने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकन ने अपने संबोधन में बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण के बीच एकता और मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “एकजुट रहने पर हम टिके रहते हैं, बंटने पर हम गिर जाते हैं।”
उनका संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी और मजबूत रक्षा क्षमताएं पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं।
उन्होंने सशस्त्र बलों के पुनर्निर्माण और उन्हें मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भारत के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भारत की नई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति का उल्लेख करते हुए बेल्जियम की रक्षा कंपनियों को भारत में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
उन्होंने बेल्जियम की कंपनियों को भारत के दोनों डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम, सह-विकास और उत्पादन के अवसर तलाशने का आह्वान किया।
इससे बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और भारतीय विनिर्माण क्षमता को एक साथ लाने के रास्ते खुल सकते हैं।
कार्यक्रम में ‘मेक इन इंडिया’ को दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के लिए सहयोग का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बताया गया।
भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमताओं को और मजबूत कर सकता है।
बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारत में उत्पादन सुविधाएं स्थापित करना, भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त परियोजनाएं शुरू करना और वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन करना संभावित अवसरों में शामिल हो सकता है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण CEO राउंडटेबल रहा, जिसकी थीम थी—‘भारत-बेल्जियम रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना—सह-विकास, सह-उत्पादन और सप्लाई चेन की मजबूती को आगे बढ़ाना।’
सत्र का संचालन SIDM इंटरनेशनल एंड एक्सपोर्ट्स कमेटी के चेयरमैन नीलेश तुंगार और फ्रेडरिक गिव्रॉन ने किया।
इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने रक्षा निर्माण, निवेश, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सप्लाई चेन, इनोवेशन और संयुक्त रिसर्च एवं डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और बेल्जियम के रक्षा उद्योग एक-दूसरे की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर नई परियोजनाएं विकसित कर सकते हैं।
भारत के पास बड़े पैमाने पर विनिर्माण, इंजीनियरिंग प्रतिभा और बढ़ता घरेलू रक्षा बाजार है। दूसरी ओर बेल्जियम के पास उन्नत तकनीक, विशेष औद्योगिक क्षमता और यूरोपीय रक्षा उद्योग से जुड़ाव की महत्वपूर्ण क्षमता है।
इन दोनों ताकतों को मिलाकर ऐसे उत्पाद और समाधान विकसित किए जा सकते हैं जिनका इस्तेमाल भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी किया जा सके।
बैठक में तकनीकी सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों के उद्योगों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास तेजी से हो रहा है। ऐसे में सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस, समुद्री सुरक्षा और सूचना सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बदलते वैश्विक सुरक्षा और व्यापारिक माहौल में भरोसेमंद सप्लाई चेन का महत्व भी बढ़ गया है। कार्यक्रम में कच्चे माल, महत्वपूर्ण घटकों और जरूरी रक्षा उपकरणों की सप्लाई को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने पर चर्चा हुई।
भारत और बेल्जियम के उद्योग यदि एक-दूसरे की सप्लाई चेन से जुड़ते हैं, तो इससे दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को नए बाजार और नए साझेदार मिल सकते हैं।
कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों को बेल्जियम और वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने के अवसरों पर भी चर्चा हुई।
बेल्जियम यूरोप के महत्वपूर्ण औद्योगिक और लॉजिस्टिकल केंद्रों में से एक है। ऐसे में भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए बेल्जियम के माध्यम से यूरोपीय बाजार और वैश्विक सप्लाई नेटवर्क तक पहुंच बनाने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
रक्षा क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ MSME सेक्टर की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। CEO राउंडटेबल में संयुक्त MSME समाधानों के जरिए तकनीकी और औद्योगिक चुनौतियों का समाधान तलाशने की बात सामने आई।
भारतीय और बेल्जियम की छोटी एवं मध्यम कंपनियां विशेष तकनीकी घटकों, इंजीनियरिंग सेवाओं, उपकरणों और सप्लाई चेन के विभिन्न स्तरों पर सहयोग कर सकती हैं।
भविष्य की साझेदारी में केवल निवेश और उत्पादन ही नहीं, बल्कि स्किल डेवलपमेंट और नॉलेज एक्सचेंज को भी महत्वपूर्ण माना गया।
दोनों देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान और विशेषज्ञों की भागीदारी से नई पीढ़ी के रक्षा तकनीकी मानव संसाधन को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के साथ भारतीय कंपनियों को वैश्विक रक्षा बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं।
ऐसे में बेल्जियम की कंपनियों के साथ सहयोग भारतीय उद्योगों को अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता तक पहुंच दिला सकता है, जबकि बेल्जियम की कंपनियों को भारत के बड़े बाजार और उत्पादन क्षमता का लाभ मिल सकता है।
औपचारिक सत्र की शुरुआत SIDM के संस्थापक अध्यक्ष और CII में स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल अफेयर्स के चेयर बाबा कल्याणी के स्वागत भाषण से हुई।
उन्होंने भारत-बेल्जियम के मजबूत रणनीतिक संबंधों को ठोस औद्योगिक साझेदारियों और वास्तविक परिणामों में बदलने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की पूरक क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए सह-विकास, सह-उत्पादन और टेक्नोलॉजी सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ को बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारतीय उद्योग के साथ साझेदारी करने और दीर्घकालिक रक्षा सप्लाई चेन तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
राउंडटेबल के प्रमुख परिणाम SIDM के प्रेसिडेंट अरुण रामचंदानी और SIDM इंटरनेशनल एंड एक्सपोर्ट्स कमेटी के चेयरमैन नीलेश तुंगार ने प्रस्तुत किए।
इनमें कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल रहे—
भारत और बेल्जियम के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू करने का अनुरोध भी कार्यक्रम में सामने आया। कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीधी हवाई कनेक्टिविटी से दोनों देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों, निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लोगों की आवाजाही आसान हो सकती है।
कार्यक्रम में भारतीय और बेल्जियम की प्रमुख रक्षा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता, सरकारी प्रतिनिधि और संस्थागत हितधारक शामिल हुए। इससे यह संकेत मिला कि दोनों देशों के रक्षा उद्योगों में सहयोग को लेकर उद्योग स्तर पर रुचि बढ़ रही है।
B2B बैठकों में कंपनियों को संभावित साझेदारों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। इसमें निवेश, तकनीकी सहयोग, संयुक्त विनिर्माण और नए बाजारों तक पहुंच जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में भारतीय और बेल्जियम कंपनियों के बीच कई समझौता ज्ञापनों और सहयोग समझौतों का आदान-प्रदान भी शामिल रहा।
इनमें SIDM और Belgian Security and Defence Industry, Larsen & Toubro और Exxelia Robotics, Kalyani Strategic Systems और FN Herstal, Tembo Classic Engineering और Lacroix, India Optel और OIP, Krishna Industries और Pitagone, DGVK Enterprises और Sol1 BV तथा Kalyani Strategic Systems Limited और Thales Group के बीच साझेदारियां शामिल हैं।
इन समझौतों को दोनों देशों के उद्योगों के बीच बढ़ते भरोसे और व्यावहारिक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच समुद्री सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में संवाद के ढांचे विकसित हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी क्षमताओं और सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जा सकता है। वहीं सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार जैसी क्षमताओं को मजबूत करने के अवसर मौजूद हैं।
एयरोस्पेस सेक्टर में इंजीनियरिंग, अनुसंधान, घटक निर्माण और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं।
भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग को व्यापक भारत-यूरोप रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। यूरोप में बदलते सुरक्षा वातावरण के बीच भारत के साथ रक्षा और औद्योगिक साझेदारी का महत्व बढ़ रहा है।
वहीं भारत के लिए यूरोपीय देशों के साथ तकनीकी और औद्योगिक सहयोग अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर स्थान बनाने का माध्यम हो सकता है।
भारत में बेल्जियम के राजदूत डिडियर वेंडरहासेल्ट और बेल्जियम, लक्जमबर्ग तथा यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत प्रणय वर्मा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
दोनों ने भारत और बेल्जियम के बीच मजबूत संबंधों को और व्यापक बनाने तथा सरकारी और औद्योगिक स्तर पर सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस पहल की खासियत यह रही कि चर्चा केवल रक्षा उपकरणों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रही। इसके बजाय फोकस को-डेवलपमेंट, को-प्रोडक्शन, तकनीकी सहयोग, निवेश, अनुसंधान और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन पर रहा।
यह बदलाव भारत-बेल्जियम रक्षा संबंधों को अधिक दीर्घकालिक और औद्योगिक आधार प्रदान कर सकता है।
भारत के बढ़ते रक्षा बाजार और बेल्जियम की तकनीकी एवं औद्योगिक विशेषज्ञता के बीच सहयोग से दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं।
भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय तकनीक और बाजार तक पहुंच बढ़ सकती है, जबकि बेल्जियम की कंपनियां भारत की उत्पादन क्षमता, कुशल मानव संसाधन और घरेलू बाजार का लाभ उठा सकती हैं।
बैठक में सामने आए प्रस्तावों का वास्तविक महत्व इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। संयुक्त वर्किंग ग्रुप, प्राथमिकता वाली परियोजनाएं, नियमित प्रगति समीक्षा और उद्योगों के बीच लगातार संवाद इस सहयोग को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि प्रस्तावित रोडमैप पर प्रभावी ढंग से काम होता है, तो दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग केवल समझौतों तक सीमित न रहकर वास्तविक उत्पादन, तकनीक और निवेश परियोजनाओं में बदल सकता है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में आयोजित भारत-बेल्जियम डिफेंस CEO राउंडटेबल और B2B मीटिंग्स ने दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग की नई संभावनाओं को सामने रखा है।
लेटर ऑफ इंटेंट से लेकर कई औद्योगिक समझौतों तक, इस पहल ने रक्षा क्षेत्र में भारत और बेल्जियम के बीच बढ़ते भरोसे को एक ठोस औद्योगिक दिशा देने का प्रयास किया है।
आने वाले समय में संयुक्त रिसर्च, तकनीक, सह-विकास, सह-उत्पादन, MSME भागीदारी और वैश्विक सप्लाई चेन इंटीग्रेशन इस साझेदारी के प्रमुख आधार बन सकते हैं।
भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की प्राथमिकताओं तथा बेल्जियम की तकनीकी एवं औद्योगिक विशेषज्ञता का मेल दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि इन समझौतों और प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी आने वाले वर्षों में केवल द्विपक्षीय सहयोग का उदाहरण नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच आधुनिक, भरोसेमंद और तकनीक आधारित रक्षा औद्योगिक साझेदारी का महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


