यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 13h ago
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्षों के निरंतर नेतृत्व को रेखांकित करते हुए उनके प्रति बधाई प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी की गुजरात से शुरू हुई राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक के सफर को देश में विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका से जोड़ा गया है।
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी का 25 वर्षों का नेतृत्व केवल लंबे राजनीतिक कार्यकाल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र प्रथम और नागरिक प्रथम की भावना से प्रेरित निरंतर सार्वजनिक सेवा की यात्रा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और उसके बाद लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जनता के समर्थन को प्रस्ताव में उनके नेतृत्व पर जनता के विश्वास का प्रमाण बताया गया है।
प्रस्ताव में गुजरात से लेकर केंद्र सरकार तक उनके नेतृत्व की निरंतरता को रेखांकित करते हुए कहा गया कि गुजरात में लागू की गई कई योजनाओं और प्रशासनिक प्रयोगों को बाद में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला। इस क्रम में प्रशासनिक सुधार, गरीब कल्याण, बुनियादी ढांचे, डिजिटल तकनीक, महिला सशक्तिकरण, कृषि, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को प्रमुख क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की चर्चा करते हुए प्रस्ताव में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई पहलों का विशेष उल्लेख किया गया। स्वागत (SWAGAT) जैसी पहल के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों को सीधे सुनने और प्रशासनिक स्तर पर उनके समाधान की व्यवस्था को सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग बताया गया।
स्वागत पहल को वर्ष 2010 में संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा पुरस्कार भी मिला था। बाद में इसी तरह की प्रशासनिक सोच को राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति (PRAGATI) के रूप में आगे बढ़ाया गया। इसके माध्यम से केंद्र और राज्यों के अधिकारियों को एक मंच पर लाकर बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा, अड़चनों की पहचान और उनके समाधान पर जोर दिया गया।
इसी तरह गुजरात में कृषि क्षेत्र के लिए अलग बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को भी राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सोच से जोड़ा गया। प्रस्ताव में बताया गया कि गुजरात के अनुभवों से सीख लेते हुए विकास के मॉडल को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी की गरीबी और अभाव को लेकर संवेदनशीलता का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि बचपन के अनुभवों और आम लोगों के जीवन में मौजूद कठिनाइयों को करीब से देखने का प्रभाव उनकी नीतिगत सोच में दिखाई देता है।
गरीबों के लिए बैंक खाते, आवास, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं को इसी दृष्टिकोण से जोड़कर देखा गया है। प्रस्ताव के अनुसार, जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा कदम रहा।
गरीब परिवारों के लिए पक्के आवास, नल से जल और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को भी सरकार की कल्याणकारी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। प्रस्ताव में दावा किया गया कि इन योजनाओं ने बड़ी संख्या में परिवारों को सरकारी सेवाओं और औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा।
प्रस्ताव में महिला सशक्तिकरण को भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। लखपति दीदी अभियान के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की सोच ने सरकार की कई योजनाओं को प्रभावित किया है।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, स्वरोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में इसे विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप, कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों के विस्तार को भी प्रस्ताव में रेखांकित किया गया। भारत में स्टार्टअप संस्कृति के विस्तार और युवाओं को नए व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने को आर्थिक परिवर्तन का हिस्सा बताया गया।
सरकार की डिजिटल पहलों और नए उद्यमों के विस्तार ने युवाओं के लिए तकनीक आधारित कारोबार और रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि भारत की युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत में बदलना विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि क्षेत्र में पीएम-किसान सम्मान निधि का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि किसानों को सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था ने सरकारी सहायता के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाई।
प्रस्ताव के अनुसार, पीएम-किसान के माध्यम से अब तक चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को हस्तांतरित की जा चुकी है। इसके अलावा सिंचाई, कृषि बुनियादी ढांचे, फसल बीमा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं को भी सरकार की कृषि नीति का हिस्सा बताया गया।
पीएम-जनमन योजना का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि सरकार ने उन समुदायों तक विकास की सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया है जो लंबे समय तक मुख्यधारा की विकास प्रक्रिया से अपेक्षाकृत दूर रहे।
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को लक्षित करते हुए आवास, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसे 'सबका साथ, सबका विकास' की व्यापक सोच से जोड़ा गया।
प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की एक प्रमुख विशेषता के रूप में सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। इसमें कहा गया कि कई बड़े सुधारों के राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद सरकार ने उन्हें लागू करने का निर्णय लिया।
जीएसटी को देश में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एकीकृत करने वाला बड़ा कदम बताया गया। इसी तरह पुराने औपनिवेशिक कानूनों को बदलने और न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों को भी दीर्घकालिक सुधारों का हिस्सा बताया गया।
प्रस्ताव में स्वच्छता अभियान, डिजिटल भुगतान और स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने वाली पहल का भी उल्लेख किया गया। इन अभियानों में सरकार के साथ आम नागरिकों की भागीदारी को परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया।
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक निवेश के विस्तार को भी प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार, सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राजमार्गों के निर्माण और विस्तार, रेलवे के विद्युतीकरण, बंदरगाहों तथा हवाई अड्डों के विकास और लॉजिस्टिक्स से जुड़े बुनियादी ढांचे को भारत की आर्थिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में वृद्धि, रक्षा उत्पादन में विस्तार और देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की आधारभूत व्यवस्था तैयार करने को भी आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का भी प्रस्ताव में विशेष उल्लेख किया गया। जन धन, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति ने सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे नागरिकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक डिजिटल भुगतान के विस्तार ने भारत की भुगतान व्यवस्था को नया स्वरूप दिया।
प्रस्ताव में कहा गया कि तकनीक को केवल आधुनिक सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को आसान बनाने और शासन को अधिक पारदर्शी बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया।
विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में चंद्रयान-3 की सफलता को भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की उपलब्धियों से जोड़ा गया। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई।
इसके साथ ही निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देना भविष्य की तकनीकी क्षमता के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताए गए।
प्रस्ताव में कोविड-19 महामारी के कठिन दौर को भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की बड़ी परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया गया। महामारी के दौरान देश में वैक्सीन का विकास, बड़े पैमाने पर टीकाकरण और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया गया।
भारत में विकसित और निर्मित टीकों तथा दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक को देश की वैज्ञानिक और विनिर्माण क्षमता से जोड़ते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि संकट के समय देश ने आत्मनिर्भरता की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
प्रस्ताव में राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का महत्वपूर्ण पहलू बताया गया। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीतिक क्षमता और राष्ट्रीय संकल्प का प्रदर्शन किया।
इसके साथ ही अनुच्छेद 370 में बदलाव, वन रैंक वन पेंशन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का गठन जैसे निर्णयों को भी रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े कदमों के रूप में रेखांकित किया गया।
प्रस्ताव में देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में शांति प्रक्रिया और वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया। सरकार की नीति को विकास और सुरक्षा के संयुक्त दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा गया कि जिन क्षेत्रों में लंबे समय से हिंसा और अस्थिरता रही, वहां शांति, संपर्क और विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति को भी विशेष महत्व दिया गया। जी-20, ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका को बढ़ाने तथा विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से सामने रखने का उल्लेख किया गया।
जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल कराना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया।
भारत की ओर से विकासशील और ग्लोबल साउथ के देशों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की नीति को भी प्रस्ताव में रेखांकित किया गया।
कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री पहल के जरिए विभिन्न देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने को भारत की 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना से जोड़ा गया।
इस पहल ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि भारत अपनी वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमताओं का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग के लिए भी कर सकता है।
प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी को विभिन्न देशों द्वारा दिए गए सम्मान का भी उल्लेख किया गया। सरकार के अनुसार, कई देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च या प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है।
इसे भारत के साथ बढ़ते कूटनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की चर्चा में विकास के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को भी जोड़ा गया। योग, श्रीअन्न यानी मोटे अनाज, काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि भारत की आधुनिक विकास यात्रा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ रही है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा बताया गया।
प्रस्ताव का सबसे व्यापक संदेश 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ा है। इसमें आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण, आधुनिक तकनीक, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व को केवल अतीत की उपलब्धियों के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए निर्धारित लक्ष्यों की पृष्ठभूमि के रूप में प्रस्तुत किया। प्रस्ताव में कहा गया कि भारत को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार निरंतर प्रयास की आवश्यकता होगी।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई और बाद में वह देश के प्रधानमंत्री बने। गुजरात में लगभग 13 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उन्हें लगातार जनादेश मिला।
मंत्रिमंडल के प्रस्ताव में इस पूरी यात्रा को जनता के साथ उनके लंबे राजनीतिक जुड़ाव और शासन की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व को भारतीय राजनीति और शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें गुजरात के प्रशासनिक अनुभव से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़े नीतिगत फैसलों तक की यात्रा को एक निरंतर कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रस्ताव का केंद्रीय संदेश यही है कि प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक यात्रा में राष्ट्र प्रथम, नागरिक प्रथम, सुशासन, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत की अवधारणा को लगातार प्राथमिकता दी गई है। अब 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को इस लंबी यात्रा के अगले चरण के रूप में सामने रखा जा रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


