17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल | छाता चीनी मिल के पुनर्जीवन की राह खुली, ड्यूल-मोड एथेनॉल प्लांट को कैबिनेट की मंजूरी | अपराध समीक्षा गोष्ठी में लंबित मामलों पर सख्त निर्देश, एसएसपी ने समयबद्ध निस्तारण पर दिया जोर | राधाष्टमी से पहले बरसाना में सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण, अधिकारियों ने दिए आवश्यक निर्देश | जिला पंचायत अध्यक्ष ने यमुना में छोड़ीं 50 हजार मछली फिंगरलिंग्स | जिला पंचायत अध्यक्ष ने यमुना में छोड़ीं 50 हजार मछली फिंगरलिंग्स | ईपीएफओ की वेज सीलिंग बढ़ाकर ₹25,000: 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का लाभ | आठ दशकों से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में ऐतिहासिक कदम | यूपीआई पर नया MDR नियम: ₹2000 से ऊपर के भुगतान पर शुल्क, ग्राहक से सीधे नहीं वसूला जाएगा ₹5 | उपभोक्ता कानून के दायरे में ही रहेंगे डॉक्टर: सुप्रीम कोर्ट | किशाऊ परियोजना: छह राज्यों ने किए समझौते पर हस्ताक्षर, 232.6 मीटर ऊंचा बनेगा बांध | एनएचएआई ला रहा एआई वाली 1033 हेल्पलाइन | प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर दिल्ली में एक माह चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’ | दिल्ली में 10 हजार छात्रों के लिए बनेंगे हॉस्टल | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से अटकी परियोजनाओं का हो रहा समाधान: भजनलाल शर्मा | किशाऊ परियोजना के एमओयू पर हस्ताक्षर, पेयजल, सिंचाई और विकास के नए अवसर होंगे सृजित | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से अटकी परियोजनाओं का हो रहा समाधान: भजनलाल शर्मा | पीएम मोदी के जन्मदिन पर लव कुश रामलीला कमेटी दिव्यांगजनों को देगी कृत्रिम अंग | पीएम मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक: भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत से सीखें, साझा विकास पर जोर | ब्रिक्स 2026: साझा घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर | 60 साल बाद बड़े पर्दे पर गूंजेगी वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा | हिंदू समाज की एकजुटता और समरसता पर राष्ट्रीय हनुमान दल का मंथन | ब्रिक्स समिट 2026: मलयेशिया के पीएम से नाश्ते की टेबल पर मिले राहुल गांधी और प्रियंका | दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं: पीएम मोदी | सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा, अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश; श्रद्धालुओं की सुविधा और शांतिपूर्ण आयोजन पर जोर,बरसाना में DM-SSP की बैठक | राधाष्टमी पर बरसाना आने वाले श्रद्धालुओं के लिए परिवहन निगम की बड़ी तैयारी | जिला बदर की अवधि पूरी होने से पहले गांव लौटा शातिर अभियुक्त करनवीर गिरफ्तार | ब्रज दर्शन करने आए श्रद्धालुओं का टेंपो पलटा, 50 वर्षीय श्रद्धालु की मौत | ब्रिक्स के संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनी, भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत | ब्रिक्स सम्मेलन: सुरक्षा परिषद में सुधारों को अब टाला नहीं जा सकता: पीएम मोदी | छह साल बाद फिर शुरू होगी भारत-चीन के बीच सीधी उड़ान | राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए चार प्रचार वाहनों को हरी झंडी | दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को विश्व चैंपियनशिप ट्रायल में उतरने की नहीं दी इजाजत | बलदेव पुलिस ने अवैध तमंचा व कारतूस के साथ युवक को किया गिरफ्तार | प्रस्तावित सीड बिल पर शिवराज का किसानों से संवाद, नकली और घटिया बीजों पर सख्ती की तैयारी | ‘राहत’ से ‘रोकथाम’ की ओर बढ़ा भारत, अमित शाह बोले- ‘जीरो कैजुअल्टी’ के साथ आपदा रोधी गांव-शहर बनाना लक्ष्य | दिल्ली हाई कोर्ट को मिलेंगे 8 नए जज, CJI सूर्यकांत की अगुवाई में कॉलेजियम ने दी मंजूरी | केंद्र ने आंध्र प्रदेश को दी रेल इंफ्रा की बड़ी सौगात, रेनिगुंटा-अरक्कोणम पर बनेगी तीसरी-चौथी रेल लाइन | नौकरी से बेदखली पर लेबर कोर्ट के फैसले को चुनौती, दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला आयोग से मांगा जवाब | सत्य निकेतन हादसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर से किया इनकार, दिल्ली हाई कोर्ट ही जारी रखेगा सुनवाई | महाराष्ट्र अक्टूबर के आखिर तक लाएगा डेडिकेटेड केमिकल सेक्टर पॉलिसी | भारत में महिलाओं के नेतृत्व का मतलब महिलाओं के नेतृत्व वाला शासन भी है: बांसुरी स्वराज | एक मंच, 11 देश और 10 एजेंडे, ब्रिक्स समिट पर ट्रंप समेत पूरी दुनिया की नजर | ब्रिक्स बिजनेस फैसिलिटेशन मिशन फॉर एमएसएमई एंड ट्रेडर्स बने: प्रवीण खंडेलवाल | जिला स्तरीय सतर्कता समिति का पुनर्गठन, शत्रुघ्न द्विवेदी समेत कई अधिकारी शामिल | राधाष्टमी मेले से पहले प्रशासन ने कसी कमर, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के लिए तैयारियां तेज | राधाकुंड में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु का बैग चोरी, नकदी-मोबाइल और दस्तावेज हुए पार | जर्जर खंभे के टूटकर मकान पर गिरने के बाद भी नहीं जागा बिजली विभाग, 24 घंटे बाद तक नहीं बदले 5 पोल | ब्रिक्स सम्मेलन के बीच भारत आएंगे पुतिन, मोदी से होगी अहम मुलाकात; एसयू-57 से परमाणु ऊर्जा तक कई मुद्दों पर बनेगी रणनीति | ब्रिक्स सम्मेलन के बीच भारत आएंगे पुतिन, मोदी से होगी अहम मुलाकात; यूक्रेन युद्ध से लेकर एसयू-57 और परमाणु ऊर्जा तक कई मुद्दों पर नजर | प्रोटीन कोई ट्रेंड नहीं, स्वस्थ और प्रोडक्टिव आबादी की बुनियादी जरूरत: रंजीत सिंह | होरिबा इंडिया के इनोवेशन कनेक्ट में 15 उभरते टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स ने पेश किए भविष्य के समाधान | सत्य निकेतन PG हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, घायलों को 5 लाख रुपये मुआवजा; खतरनाक इमारतों पर भी होगी कार्रवाई | न्यायालय कर्मचारी संघ ने भरी हुंकार, उच्च न्यायालय और सरकार के समक्ष रखी जाएंगी 13 सूत्रीय मांगें | राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए जनपद न्यायाधीश ने चार प्रचार वाहनों को दिखाई हरी झंडी | धनबाद में भू-धंसान का कहर! देखते ही देखते 5-6 मकान जमींदोज, एक बच्चे की मौत, कई घायल | बिहार में बाढ़ का तांडव! 13 जिलों में 29 लाख प्रभावित, 22 हजार से ज्यादा रेस्क्यू; गंगा-कोसी के उफान से गांव-शहर बेहाल | पीएनजी चैंबर में धमाके के बाद लगी आग, कॉलोनी में मची अफरातफरी | व्यापारियों की शिकायत पर निगम की कार्रवाई, नाले के ऊपर बने अस्थायी कब्जे हटाए | लोकतांत्रिक युवा जनसंघ पार्टी ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, पीड़िता की सुरक्षा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग | यूजीसी कानून में बदलाव, अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता और किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग | महिला कंप्यूटर प्रशिक्षक ने प्रधानाध्यापक पर अभद्रता और गाली-गलौज का लगाया आरोप | धोखाधड़ी के मुकदमे में मांट पुलिस ने तीन वांछितों को दबोचा | तीन-चार दिन से पानी में डूबी कॉलोनी, घरों में घुसा नाले का पानी; लोगों ने नगर निगम पर लगाया अनदेखी का आरोप | भारत की मजबूत आर्थिक गति और उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास का संकेत: सीआईआई, बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स 66 अंक पर पहुंचा | संजीव सिंघल बने 109 वर्ष पुराने एस.डी. पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष, नई जिम्मेदारी के साथ शिक्षा और संस्कार को आगे बढ़ाने का संकल्प | 5 फरवरी 2027 को सिनेमाघरों में आएगी फिल्म ‘तेरा साईं’, शिर्डी में साईं बाबा के आशीर्वाद के साथ हुआ रिलीज डेट का ऐलान | दिल्ली की जहरीली हवा से फेफड़ों के बाद किडनी पर भी प्रदूषण की मार, रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला कनेक्शन | डॉ. दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के नए उपराज्यपाल, लखनऊ के मेयर से लेकर यूपी के डिप्टी सीएम और राज्यसभा तक का रहा लंबा राजनीतिक सफर | आठ हाई कोर्ट को मिले नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नियुक्तियां | यमुनापार दिगम्बर जैन समाज ने किया अपनी प्रतिभाओं का सम्मान, मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न देकर बढ़ाया हौसला | मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर सजेगा लवकुश रामलीला का भव्य मंच, चार मंजिला सेट पर दिखेगा रामायण का दिव्य संसार | वेतन को लेकर नगर निगम के कचरा वाहन चालकों की हड़ताल, सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के आसार | वेतन के लिए सड़कों पर उतरे नगर निगम के कर्मचारी, कचरा वाहन चालकों ने रोका काम | कोसीकलां में महिला जिम और ताइक्वांडो अकादमी का शुभारंभ, बेटियों ने दिखाए आत्मरक्षा के करतब | लाड़पुर में सड़क नहीं, गड्ढों का सफर; ग्रामीण बोले- कब मिलेगा बदहाल रास्ते से छुटकारा? | कोसीकलां में पुलिस का शिकंजा, तीन वांछित आरोपी तमंचे के साथ गिरफ्तार | 50 फीट ऊंचे चिकने लट्ठे पर पहलवानों ने दिखाया दम, विजय पताका तक पहुंचने में लगी 40 मिनट की मशक्कत | मंडी चौराहे के पास दो भाइयों को घेरकर हमला, एक की हालत गंभीर | सत्य निकेतन में बड़ा हादसा: इमारत ढहने से एक की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका; अमित शाह ने रद्द किया गोवा दौरा | विश्व ड्यूशेन मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी दिवस पर नई दिल्ली में निकलेगी जागरूकता रैली | सोशल मीडिया पर वायरल आपत्तिजनक वीडियो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग | सात वर्षों से लगातार निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर, अब तक दो हजार से अधिक लोगों के कराए ऑपरेशन: डॉ. योगेश जिंदल | ‘नशे को कहें ना और सपनों को कहें हां’, जयंत चौधरी की मुहिम को गांव-गांव पहुंचाएंगी पारुल चौधरी | रिजर्व पुलिस लाइन में पुलिस कर्मियों, अधिकारियों और परिवारों ने मिलकर मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव |

‘इनोप्रोम. इंडिया’ में दिखेगी रूस-भारत तकनीकी साझेदारी की शक्ति

  • 11 days ago

भारत और रूस के संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहा है। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ते हुए अब दोनों देश औद्योगिक तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, परिवहन, उन्नत विनिर्माण और नए ऊर्जा समाधानों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

‘इनोप्रोम. इंडिया’ इसी बदलते रिश्ते की तस्वीर प्रस्तुत करने वाला मंच बन सकता है। भारत जिस तेजी से विनिर्माण क्षेत्र को विस्तार देने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, उसमें रूस जैसी तकनीकी क्षमता रखने वाली अर्थव्यवस्था के साथ सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।

रूस के पास भारी उद्योग, मशीन निर्माण, ऊर्जा, परमाणु तकनीक, धातु एवं खनिज प्रसंस्करण, रेल तकनीक और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में दशकों का अनुभव है। दूसरी ओर भारत के पास विशाल उपभोक्ता बाजार, कुशल मानव संसाधन, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और उत्पादन क्षमता का विस्तार करने की महत्वाकांक्षा है। दोनों पक्षों की ये विशेषताएं एक-दूसरे की पूरक बन सकती हैं।

साझा उत्पादन की संभावनाएं होंगी महत्वपूर्ण

भविष्य के औद्योगिक संबंधों में केवल उत्पादों की खरीद-बिक्री पर्याप्त नहीं होगी। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब स्थानीय उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पर अधिक जोर दे रही हैं।

भारत और रूस के बीच भी यही मॉडल आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि रूसी तकनीक और भारतीय विनिर्माण क्षमता का संयोजन बढ़ता है, तो दोनों देशों में संयुक्त उत्पादन इकाइयों की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

ऐसी परियोजनाएं भारत के लिए स्थानीय रोजगार और तकनीकी कौशल विकसित करने का माध्यम बन सकती हैं, जबकि रूसी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार के साथ-साथ अन्य उभरते बाजारों तक पहुंच का अवसर पैदा कर सकती हैं।

यही कारण है कि ‘इनोप्रोम. इंडिया’ में होने वाली कारोबारी बैठकों और बी2बी संवाद को केवल तत्काल निवेश के नजरिये से नहीं, बल्कि दीर्घकालीन औद्योगिक सहयोग की दृष्टि से भी देखा जाएगा।

रेल परिवहन में नए सहयोग का रास्ता

भारत दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क वाले देशों में शामिल है और देश में रेलवे के आधुनिकीकरण का काम लगातार आगे बढ़ रहा है। तेज गति वाली रेल प्रणालियां, आधुनिक कोच, यातायात प्रबंधन, सिग्नलिंग और डिजिटल रेलवे जैसी तकनीकें आने वाले वर्षों में भारत की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।

रूस के पास रेल निर्माण और भारी परिवहन प्रणालियों में व्यापक तकनीकी अनुभव है। ऐसे में रूस और भारत के बीच रेल क्षेत्र में सहयोग केवल तकनीक के आदान-प्रदान तक सीमित न रहकर संयुक्त विकास और उत्पादन तक पहुंच सकता है।

‘इनोप्रोम. इंडिया’ में प्रदर्शित हाई-स्पीड ट्रेन मॉडल इसी व्यापक संभावना की ओर संकेत करता है। यदि दोनों देशों के उद्योग इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाते हैं तो भारत के विशाल रेल बाजार में नई तकनीकों के विकास और स्थानीय निर्माण के अवसर पैदा हो सकते हैं।

विमानन क्षेत्र में सहयोग की नई उड़ान

क्षेत्रीय विमानन भारत के लिए तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। छोटे शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ने, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास और घरेलू विमानन क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक विमानों तथा विश्वसनीय इंजन तकनीक की आवश्यकता है।

रूस के एमसी-21, एसजे-100 और आईएल-114-300 जैसे विमान मॉडलों तथा पीडी-8 इंजन की मौजूदगी इस क्षेत्र में संभावित तकनीकी सहयोग को रेखांकित करती है।

भारत के लिए विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल विमान तैयार करना नहीं है। इसमें इंजन, एवियोनिक्स, कंपोनेंट, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल, प्रशिक्षण और सप्लाई चेन का विकास भी शामिल है।

यदि दोनों देशों के उद्योग इन क्षेत्रों में दीर्घकालीन साझेदारी विकसित करते हैं, तो यह भारत के क्षेत्रीय विमानन बाजार को नई दिशा दे सकती है।

परमाणु ऊर्जा—दीर्घकालीन रणनीतिक क्षेत्र

ऊर्जा सुरक्षा भारत की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण आधार है। बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ देश को बड़ी मात्रा में स्थिर, विश्वसनीय और कम-कार्बन ऊर्जा की आवश्यकता होगी। ऐसे में परमाणु ऊर्जा का महत्व आने वाले समय में और बढ़ सकता है।

रूस और भारत के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग पहले से ही एक महत्वपूर्ण आयाम रखता है। ‘इनोप्रोम. इंडिया’ में वीवीईआर-1200 आधारित परमाणु विद्युत संयंत्र का मॉडल इस सहयोग की तकनीकी गहराई को प्रदर्शित करेगा।

परमाणु क्षेत्र में सहयोग का महत्व केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें इंजीनियरिंग, उपकरण निर्माण, सुरक्षा प्रणालियां, तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान और स्थानीय आपूर्ति शृंखला जैसे अनेक क्षेत्र शामिल हैं।

भारत में स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।

महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ता जोर

आधुनिक उद्योग की प्रतिस्पर्धा तेजी से महत्वपूर्ण खनिजों और कच्चे माल की उपलब्धता से जुड़ती जा रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, ऊर्जा भंडारण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए अनेक विशेष खनिज आवश्यक हैं।

इसीलिए ‘इनोप्रोम. इंडिया’ के कार्यक्रम में महत्वपूर्ण खनिज और कच्चे माल पर चर्चा विशेष महत्व रखती है।

भारत और रूस यदि खनिज संसाधनों, प्रसंस्करण तकनीक और आपूर्ति शृंखला के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हैं, तो इससे दोनों देशों की औद्योगिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है।

भविष्य में खनिजों की उपलब्धता के साथ-साथ उनके प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा। यही वह क्षेत्र है जहां तकनीकी सहयोग औद्योगिक साझेदारी को नई गहराई दे सकता है।

स्मार्ट सिटी और डिजिटल ट्विन की नई दुनिया

भविष्य के शहर केवल सड़कों, इमारतों और परिवहन व्यवस्था से नहीं बनेंगे। वे सेंसर, डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रणालियों से संचालित होंगे।

मॉस्को के डिजिटल ट्विन जैसे मॉडल यह दिखाते हैं कि किसी बड़े शहर की गतिविधियों का डिजिटल रूप से अनुकरण करके परिवहन, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और शहरी सेवाओं को अधिक कुशल बनाया जा सकता है।

भारत में भी स्मार्ट सिटी, शहरी गतिशीलता और डिजिटल गवर्नेंस का विस्तार हो रहा है। इसलिए डिजिटल ट्विन और एआई आधारित शहरी प्रबंधन जैसी तकनीकों में सहयोग दोनों देशों के शहरों के लिए उपयोगी हो सकता है।

एआई के दौर में ऊर्जा दक्षता की चुनौती

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के साथ डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की ऊर्जा मांग भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन रही है। ऐसे में केवल तेज कंप्यूटिंग ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि कम ऊर्जा में अधिक गणना करने वाली तकनीकों की आवश्यकता होगी।

प्रदर्शनी में एआई डेटा प्रोसेसिंग की ऊर्जा खपत कम करने से जुड़े ऑप्टिकल कंप्यूटिंग समाधान का प्रदर्शन इसी चुनौती को सामने लाता है।

यदि ऐसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर विकसित किया जाता है, तो भविष्य के डेटा सेंटर, एआई मॉडल और डिजिटल सेवाओं के लिए ऊर्जा दक्षता में सुधार संभव हो सकता है।

यह क्षेत्र भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश में डिजिटल सेवाओं और एआई का विस्तार तेजी से हो रहा है।

औद्योगिक रोबोट और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग

उद्योग 4.0 के दौर में फैक्ट्रियां तेजी से स्वचालित हो रही हैं। रोबोटिक्स, सेंसर, डिजिटल नियंत्रण, मशीन विजन और डेटा एनालिटिक्स आधुनिक विनिर्माण के महत्वपूर्ण उपकरण बन चुके हैं।

‘इनोप्रोम. इंडिया’ में औद्योगिक रोबोट और ऑटोमेटेड स्टोरेज सिस्टम जैसे समाधान इसी परिवर्तन को प्रदर्शित करेंगे।

भारत के लिए स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और उत्पादकता में सुधार का अवसर भी है।

रूस के औद्योगिक स्वचालन संबंधी अनुभव और भारत की विशाल विनिर्माण क्षमता का मेल नए औद्योगिक मॉडल विकसित कर सकता है।

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग से बदल सकता है उत्पादन

3डी प्रिंटिंग और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग अब केवल प्रयोगशाला तकनीक नहीं रह गई है। विमानन, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण, रक्षा और भारी इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जटिल डिजाइन को अपेक्षाकृत कम सामग्री और कम चरणों में तैयार किया जा सकता है। इससे प्रोटोटाइप तैयार करने और विशेष औद्योगिक पुर्जों के उत्पादन में समय कम किया जा सकता है।

भारत और रूस इस क्षेत्र में अनुसंधान, सामग्री विज्ञान और औद्योगिक उत्पादन के स्तर पर सहयोग कर सकते हैं।

मॉस्को से दिल्ली तक डिजिटल साझेदारी

रूस की डिजिटल तकनीक और भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया क्षेत्र बन सकती है।

भारत ने डिजिटल भुगतान, डिजिटल पहचान, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और बड़े पैमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय क्षमता विकसित की है। दूसरी ओर रूस ने साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर, शहरी डिजिटल प्रबंधन और औद्योगिक डिजिटल प्रणालियों में अपनी क्षमताएं विकसित की हैं।

यदि दोनों पक्ष इन अनुभवों का आदान-प्रदान करते हैं तो डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग के नए मॉडल सामने आ सकते हैं।

एमएसएमई के लिए खुलेंगे नए अवसर

भारत-रूस औद्योगिक सहयोग का प्रभाव केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छोटे और मध्यम उद्योग इस साझेदारी के महत्वपूर्ण लाभार्थी बन सकते हैं।

बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं के लिए हजारों प्रकार के कंपोनेंट, मशीन पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, पैकेजिंग सामग्री और सेवाओं की आवश्यकता होती है। यदि इनकी आपूर्ति स्थानीय कंपनियों से होती है तो एमएसएमई क्षेत्र को नए बाजार मिल सकते हैं।

संयुक्त परियोजनाओं के विस्तार के साथ भारतीय छोटे उद्योग रूसी कंपनियों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला का हिस्सा भी बन सकते हैं।

युवाओं के लिए कौशल और रोजगार की संभावना

औद्योगिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण परिणाम कौशल विकास भी हो सकता है। आधुनिक मशीनरी, रोबोटिक्स, एआई, विमानन, रेल तकनीक और ऊर्जा प्रणालियों के लिए प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।

भारत के युवा कार्यबल को यदि इन क्षेत्रों में आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है तो औद्योगिक निवेश का लाभ रोजगार के रूप में भी दिखाई दे सकता है।

दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान परियोजनाएं और औद्योगिक इंटर्नशिप विकसित की जा सकती हैं।

निवेश के लिए बड़ा मंच

‘इनोप्रोम. इंडिया’ निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। औद्योगिक निवेश अब केवल पूंजी लगाने का विषय नहीं है। निवेशक तकनीक, बाजार, मानव संसाधन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और नियामकीय वातावरण को भी ध्यान में रखते हैं।

भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल घरेलू बाजार रूसी कंपनियों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत कर सकता है। वहीं रूस की तकनीकी और औद्योगिक विशेषज्ञता भारतीय कंपनियों के लिए नए सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं के रास्ते खोल सकती है।

आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत बनाने की चुनौती

हाल के वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने आपूर्ति शृंखला की कमजोरियों को करीब से देखा है। किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता उद्योगों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

इसी संदर्भ में भारत और रूस के बीच विश्वसनीय औद्योगिक आपूर्ति शृंखला विकसित करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

ऊर्जा, खनिज, मशीनरी, औद्योगिक उपकरण, परिवहन और तकनीकी उत्पादों में दीर्घकालीन आपूर्ति व्यवस्था दोनों देशों के उद्योगों को अधिक स्थिरता दे सकती है।

व्यापारिक संबंधों में वैल्यू एडिशन पर जोर

भविष्य में भारत-रूस व्यापार का अगला चरण केवल व्यापार की मात्रा बढ़ाने का नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन बढ़ाने का हो सकता है।

कच्चे माल के व्यापार से आगे बढ़कर तैयार उत्पाद, मशीनरी, तकनीकी समाधान, संयुक्त ब्रांड और उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पाद विकसित करना दोनों देशों के लिए अधिक लाभकारी हो सकता है।

यही कारण है कि ‘इनोप्रोम. इंडिया’ में प्रदर्शित तकनीकें संभावित संयुक्त उत्पादन और सह-विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।

भारत के लिए रणनीतिक अवसर

भारत जिस समय अपनी विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उस समय रूस के साथ औद्योगिक सहयोग कई रणनीतिक अवसर प्रदान कर सकता है।

भारी इंजीनियरिंग से लेकर विमानन, परमाणु ऊर्जा से लेकर रेल, महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर एआई और रोबोटिक्स तक ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहां दोनों देशों की विशेषज्ञताएं एक-दूसरे को मजबूत कर सकती हैं।

भारत के लिए इसका अर्थ होगा—तकनीक तक पहुंच, स्थानीय उत्पादन, कौशल विकास और नए बाजारों का विस्तार।

रूस के लिए भारत का महत्व

रूस के लिए भी भारत केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि दीर्घकालीन औद्योगिक साझेदार के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत का विशाल बाजार, तेजी से बढ़ता बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षमता रूसी कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकती है।

भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी के माध्यम से रूसी तकनीक को नए बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

ब्रिक्स से पहले बढ़ता औद्योगिक महत्व

‘इनोप्रोम. इंडिया’ का आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ब्रिक्स जैसे मंचों पर आर्थिक सहयोग, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, तकनीकी साझेदारी, आपूर्ति शृंखला और निवेश जैसे मुद्दे तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं।

ऐसे माहौल में भारत में आयोजित रूस-केंद्रित औद्योगिक आयोजन का महत्व केवल दो देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रहता। यह व्यापक उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को भी सामने ला सकता है।

नई दिल्ली में बनेगा कारोबारी नेटवर्क

तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन उद्योगपतियों, सरकारी प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों को एक ही मंच पर लाएगा।

किसी भी औद्योगिक मेले की सफलता केवल प्रदर्शित उत्पादों से नहीं मापी जाती। वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि कितने नए संपर्क बनते हैं, कितने समझौते आगे बढ़ते हैं और कितनी परियोजनाएं जमीन पर उतरती हैं।

इस दृष्टि से ‘इनोप्रोम. इंडिया’ एक बड़े बिजनेस नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म की भूमिका निभा सकता है।

भविष्य की साझेदारी का रोडमैप

आने वाले वर्षों में भारत-रूस औद्योगिक संबंधों के लिए कुछ क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं—संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण, स्टार्टअप सहयोग, कौशल विकास, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, डिजिटल तकनीक और उन्नत इंजीनियरिंग।

यदि इन क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग मजबूत होता है तो दोनों देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी अधिक व्यापक और टिकाऊ बन सकती है।

सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, संभावनाओं का प्रदर्शन

‘इनोप्रोम. इंडिया’ में खड़े विमान मॉडल, ट्रेन मॉडल, परमाणु संयंत्र का मॉडल, औद्योगिक रोबोट या डिजिटल ट्विन को केवल प्रदर्शनी की वस्तु के रूप में देखना इस आयोजन के व्यापक महत्व को सीमित कर देगा।

इनमें से प्रत्येक तकनीक के पीछे एक पूरा औद्योगिक इकोसिस्टम मौजूद है—अनुसंधान, इंजीनियरिंग, उत्पादन, सप्लाई चेन, कौशल, निवेश और बाजार।

इसलिए यह मेला यह दिखाने का अवसर भी होगा कि भविष्य का उद्योग किस दिशा में जा रहा है और भारत तथा रूस उसमें किस तरह मिलकर भूमिका निभा सकते हैं।

निष्कर्ष : नई औद्योगिक साझेदारी की नींव

भारत और रूस के संबंधों ने कई दशकों में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक सहयोग की एक मजबूत नींव मौजूद रही है। अब इस संबंध को नई पीढ़ी की तकनीक और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप विस्तार देने की आवश्यकता है।

‘इनोप्रोम. इंडिया’ इसी परिवर्तन का प्रतीक बन सकता है।

यह आयोजन एक तरफ रूस की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक विशेषज्ञता को भारतीय उद्योग जगत के सामने प्रस्तुत करेगा, तो दूसरी ओर भारत की विनिर्माण क्षमता, बाजार और नवाचार की संभावनाओं को रूसी कंपनियों के लिए सामने रखेगा।

परमाणु ऊर्जा से लेकर विमानन तक, रेलवे से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों तक, रोबोटिक्स से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक और पारंपरिक भारी उद्योग से लेकर डिजिटल ट्विन और ऑप्टिकल कंप्यूटिंग तक—साझेदारी का दायरा तेजी से व्यापक हो रहा है।

आने वाले वर्षों में इस सहयोग की असली परीक्षा इस बात से होगी कि प्रदर्शनी में दिखाई गई तकनीकें कितनी संयुक्त परियोजनाओं में बदलती हैं, कितने निवेश समझौतों में बदलते हैं और कितने भारतीय एवं रूसी उद्योग वास्तव में एक-दूसरे की आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा बनते हैं।

यही ‘इनोप्रोम. इंडिया’ की सबसे बड़ी संभावित उपलब्धि होगी।

नई दिल्ली में होने वाला यह आयोजन इसलिए केवल तीन दिनों का औद्योगिक मेला नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच भविष्य के आर्थिक संबंधों की संभावित रूपरेखा प्रस्तुत करने वाला मंच है। यदि तकनीक, पूंजी, बाजार, कौशल और औद्योगिक अनुभव का सही संयोजन बनता है, तो यह साझेदारी दोनों देशों के लिए नई विकास संभावनाएं पैदा कर सकती है।

भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ और रूस की तकनीकी क्षमता का मेल आने वाले समय में ऐसे औद्योगिक मॉडल को जन्म दे सकता है जिसमें दोनों देश केवल एक-दूसरे के बाजार न रहें, बल्कि मिलकर उत्पाद विकसित करें, तकनीक तैयार करें, उत्पादन करें और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाएं।

इसी अर्थ में ‘इनोप्रोम. इंडिया’ को भारत-रूस संबंधों के अगले औद्योगिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है—एक ऐसा अध्याय जिसमें सहयोग का केंद्र केवल व्यापार नहीं, बल्कि तकनीक, नवाचार, संयुक्त उत्पादन, निवेश, कौशल और आत्मनिर्भरता होगा।

विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।




उत्तर प्रदेश न्यूज़

Link copied successfully!