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सेव दी एलीफैंट डे: जाने अनैतिक पर्यटन में इस्तमाल होते हाथियों पर हो रहे शोषण के बारे में!

राजस्थान। इस हाथी बचाओ दिवस पर, वाइल्डलाइफ एसओएस भारत में हाथियों के सामने आने वाले खतरों को उजागर करता है, और उनके पर्यावास के नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष जैसी गंभीर संरक्षण चुनौतियों के साथ-साथ शोषणकारी पर्यटन की ओर ध्यान आकर्षित करता है। 16 अप्रैल को विश्व भर में हाथी बचाओ दिवस मनाया जाता है, जो हाथी संरक्षण की तत्काल आवश्यकता की याद दिलाता है, जिसमें आवास की हानि, मानव-हाथी संघर्ष और एशियाई हाथियों के निरंतर शोषण, विशेष रूप से पर्यटन उद्योग के भीतर, को संबोधित करना शामिल है। वैश्विक स्तर पर, हाथी बचाओ दिवस हाथियों की आबादी की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के महत्व पर बल देता है। भारत में, जहाँ एशियाई हाथियों का पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व है, वहां नैतिक और टिकाऊ संरक्षण पद्धतियों की आवश्यकता को और भी अधिक महत्वपूर्ण बनाना आवयश्यक है।

राजस्थान जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में, हाथियों का उपयोग अक्सर पर्यटकों को सैर कराने के लिए किया जाता है, जिससे उनके स्वास्थ को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। इनको अक्सर लंबे समय तक काम करना पड़ता है, पर्याप्त आराम नहीं मिलता और कठोर प्रशिक्षण विधियों का सामना करना पड़ता है जिनमें भय और दंड के माध्यम से नकारात्मक सुदृढ़ीकरण का प्रयोग किया जाता है। कठोर सतहों पर लंबे समय तक खड़े रहना, अत्यधिक भार उठाना और गर्म मौसम में रहना, पैरों की बीमारियों, जोड़ों के दर्द और तनाव भरा व्यवहार संबंधी समस्याओं सहित दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।

चंचल नाम की हथनी की हाल ही में हुई मौत ने एक बार फिर ऐसी प्रथाओं के पीछे की कठोर वास्तविकताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। एक फोटोशूट में, जहां उसे पूरी तरह से गुलाबी रंग से रंगा गया था और उसकी पीठ पर एक मॉडल बैठी थी, चंचल की हालत और उसके बाद हुई उसकी मौत ने जानवरों के कल्याण के लिए बने कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर आक्रोश पैदा कर दिया है। जयपुर जैसे शहरों में हाथी की सवारी को अक्सर सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन चंचल जैसी हथनी आज भी पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं, जो चिलचिलाती धूप में घंटों पैदल चलते हैं और भारी काठी पर लोगों को ढोते हैं।

इस तरह के दुर्व्यवहार से निपटने के लिए, वाइल्डलाइफ एसओएस अपने ‘रिफ्यूज़ टू राइड’ अभियान के माध्यम से अनैतिक पर्यटन में हाथियों के उपयोग के खिलाफ आवाज उठाता आ रहा है और नैतिक संरक्षण का समर्थन करने वाली तथा हाथियों की रक्षा करने वाली कानूनों को प्रोत्साहित करता है। जिम्मेदार पर्यटक जो वास्तव में इन शानदार जीवों के भविष्य की परवाह करते हैं, उन्हें सच्चाई जानने के लिए http://refusetoride.org पर जाना चाहिए। इस याचिका पर हस्ताक्षर कर 53,848 लोग पहले ही इस आंदोलन में शामिल हो चुके हैं।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “हाथियों का शोषण उनकी ऐसी अनेतिक पर्यटन में मांग की वजह से पनपता है। हाथी की सवारी और इसी तरह के आकर्षणों में भाग न लेकर, लोग मांग को कम कर सकते हैं। हाथी बचाओ दिवस केवल इन शानदार जानवरों के बारे में जानने के लिए नहीं है, बल्कि उन्हें और अधिक नुकसान से बचाने के बारे में भी है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, “हाथी कोई खिलौना नहीं हैं, न ही वे इस तरह की गतिविधियों में निष्क्रिय भागीदार हैं। वे जटिल शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों वाले प्राणी हैं, जो भीख मांगने, सवारी करने या प्रदर्शन करने के लिए नहीं बने हैं। अगर चंचल की कहानी ने आपको झकझोर दिया है, तो उस बेचैनी को कार्रवाई में बदलना होगा। इससे लोगों को हाथी की सवारी बंद करने, इस तमाशे से दूर रहने और इन अनुभवों के पीछे छिपी कीमत को समझने के लिए प्रेरित होना चाहिए।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने आगे कहा, “आज भारत भर में लगभग 300 से अधिक हाथी कष्ट झेल रहे हैं। हमारे ‘बेगिंग एलीफैंट अभियान’ के माध्यम से, हमारा लक्ष्य 2030 तक भारत में हाथियों से भीख मांगने की इस क्रूर प्रथा को समाप्त करना है। इसके तहत हम शहरी सड़कों, विवाह जुलूसों और मंदिरों में भीख मांगने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दुर्व्यवहारित हाथियों को बचाकर उन्हें दीर्घकालिक चिकित्सा देखभाल और आश्रय प्रदान करते हैं। हमारी पहल, जैसे ‘हाथी सेवा’, जो भारत का पहला एलीफैंट मोबाइल क्लिनिक है, ने 2025 में शुरू होने के बाद से भारत के विभिन्न राज्यों में करीब 200 जरूरतमंद बंदी हाथियों को जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण पशु चिकित्सा देखभाल प्रदान करने में मदद की है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस शोषणकारी परिस्थितियों से हाथियों को बचाने और उनका पुनर्वास करने में आगे रहा है, और अपने हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्रों में उन्हें आजीवन देखभाल प्रदान करता है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञता, बेहतर वातावरण और प्राकृतिक माहौल के माध्यम से, संस्था का लक्ष्य दुर्व्यवहार से बचाए गए हाथियों को सम्मान और कल्याण प्रदान करना है।

श्रेष्ठा पचौरी
वरिष्ठ प्रेस अधिकारी
वाइल्डलाइफ़ SOS.

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