HomeBusinessबजट 2026: बीजेपी ने पांच चुनावी राज्यों के लिए कोई बड़ा राजनीतिक...

बजट 2026: बीजेपी ने पांच चुनावी राज्यों के लिए कोई बड़ा राजनीतिक संदेश नहीं दिया?

नई दिल्ली। ऐसे वक्त में जब भाजपा पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। साथ ही यूजीसी के समता विनियम 2026 को लेकर स्पष्ट रूप से उभर रहे “उच्च जाति” आक्रोश से जूझ रही है। लेकिन उसके बावजूद केंद्रीय बजट में कोई स्पष्ट राजनीतिक संदेश नहीं दिखाई दिया है। बजट में न तो चुनाव वाले राज्यों पर खास ध्यान दिखा, न ही सहयोगी दलों या मध्यम वर्ग के लिए कोई बड़ा और स्पष्ट संदेश है। मध्यम वर्ग को आम तौर पर उच्च जातियों के बीच राय बनाने वाला वर्ग माना जाता है, लेकिन उसके लिए भी बजट में कुछ खास नजर नहीं आया। हालांकि कुछ घोषणाएँ की गईं, लेकिन वे ज्यादा तर राजनीतिक दिखावे जैसी लगीं। ये घोषणाएं न तो लोगों को जोड़ने में सफल रहीं और न ही कोई मजबूत या निर्णायक संदेश दे पाईं। कुछ छोटी घोषणाएं ऐसी थीं जो राजनीतिक दिखावे के लिए की गई प्रतीत होती थीं, लेकिन ये घोषणाएं निर्णायक संदेश देने में पूरी तरह विफल रहीं।
भाजपा के सबसे पुराने और पारंपरिक मतदाता माने जाने वाले “उच्च जाति” वर्ग में जब असंतोष के संकेत दिख रहे हैं, तब बजट में आयकर को लेकर कोई राहत नहीं दी गई। यह पिछले साल के बजट से बिल्कुल विपरीत है, जब आयकर में राहत की घोषणा की गई थी। पिछले बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने “मध्यम वर्ग” शब्द का सात बार उल्लेख किया था, लेकिन इस बार के बजट भाषण में मध्यम वर्ग का नाम तक नहीं लिया गया। वेतनभोगी लोगों के लिए इस बजट में सिर्फ इतना कहा गया कि आयकर के फॉर्म और नियमों को जल्द सरल बनाया जाएगा। उनका कहना था कि नए फॉर्म इस तरह तैयार किए गए हैं कि आम लोग उन्हें आसानी से भर सकें। इसके अलावा वेतनभोगी वर्ग के लिए कोई ठोस राहत नहीं दी गई। वर्ष 2026 में असम में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां पिछले दस साल से भाजपा की स्थिति मजबूत रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अपनी ताकत जरूर बढ़ाई है, लेकिन वह अब तक न तो विधानसभा चुनाव में और न ही लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हरा पाई है।
तमिलनाडु और केरल में भाजपा की स्थिति कमजोर रही है, हालांकि केरल में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनावों में पार्टी को कुछ सकारात्मक संकेत मिले थे। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी चुनाव होने हैं। इसके बावजूद बजट भाषण में पश्चिम बंगाल का नाम एक बार भी नहीं लिया गया। हां, बंगाल के सिलीगुड़ी और दुर्गापुर का जरूर उल्लेख किया गया। असम का जिक्र सिर्फ एक बार हुआ और वह भी प्रस्तावित बौद्ध सर्किट के संदर्भ में। तमिलनाडु का दो बार उल्लेख हुआ, जबकि केरल और पुडुचेरी का बजट भाषण में एक बार भी नाम नहीं लिया गया। पिछले साल बजट भाषण में चुनाव वाले बिहार का छह बार जिक्र किया गया था। इसके अलावा मिथिलांचल (उत्तरी बिहार) और बुद्ध से जुड़े स्थलों का भी अलग से उल्लेख किया गया था। बजट 2026-27 में बिहार का कहीं भी ज़िक्र नहीं किया गया, जबकि कुछ ही महीने पहले वहां एनडीए को साफ बहुमत मिला था। आंध्र प्रदेश का भी बजट में बहुत कम उल्लेख हुआ। यह राज्य एनडीए के लिए अहम है, क्योंकि यहां सहयोगी दल टीडीपी की मजबूत मौजूदगी है।
आंध्र प्रदेश का नाम बजट भाषण में सिर्फ दो बार लिया गया। पिछले साल के बजट में आंध्र प्रदेश का एक बार भी ज़िक्र नहीं था, जिस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाए थे। उन्होंने इसकी तुलना बिहार को मिले ज्यादा ध्यान से की थी। कुल मिलाकर, 2026-27 के बजट भाषण में चुनाव वाले इन राज्यों का केवल नाम भर लिया गया है। उनके लिए किसी खास लाभ या बड़ी घोषणा का कोई साफ वादा बजट में नजर नहीं आता। बजट में एक घोषणा नारियल और काजू के उत्पादन को लेकर की गई, जिससे केरल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों को संदेश देने की कोशिश दिखती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि करीब 3 करोड़ लोग, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं, अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं। नारियल उत्पादन को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने एक नारियल प्रोत्साहन योजना का प्रस्ताव रखा। इसके तहत पुराने और कम उपज देने वाले पेड़ों को नए पौधों से बदला जाएगा और दूसरे उपायों से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय काजू और कोको के लिए एक अलग कार्यक्रम लाया जाएगा। इसका मकसद काजू और कोको के उत्पादन और प्रोसेसिंग में भारत को आत्मनिर्भर बनाना, निर्यात बढ़ाना और 2030 तक भारतीय काजू और कोको को एक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड बनाना है। इसके अलावा चंदन को लेकर भी एक घोषणा की गई। तमिलनाडु और केरल चंदन के बड़े उत्पादक हैं। हालांकि राज्यों का नाम लिए बिना सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर चंदन की खेती और कटाई के बाद की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देगी, ताकि भारतीय चंदन की पुरानी प्रतिष्ठा को फिर से मजबूत किया जा सके। एक और वादा तमिलनाडु और केरल में पाए जाने वाले दुर्लभ खनिजों से जुड़ा हुआ था, जिससे इन राज्यों के लिए अप्रत्यक्ष संदेश देने की कोशिश नजर आती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक योजना नवंबर 2025 में शुरू की गई थी।
अब सरकार खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में खनन, प्रसंस्करण, शोध और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए दुर्लभ पृथ्वी गलियारे बनाने में मदद करेगी। इसके अलावा, वादा किए गए तीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों में से एक केरल में खोला जा सकता है। बजट में चुनाव वाले राज्यों को ध्यान में रखते हुए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का भी जिक्र किया गया। सीतारमण ने बताया कि शहरों को जोड़ने के लिए सात हाई-स्पीड रेल मार्ग विकसित किए जाएंगे। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं। इनमें से दो कॉरिडोर चेन्नई से और एक पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से होकर गुजरेगा।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए बजट में दुर्गापुर में एक विकसित केंद्र के साथ पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे, पांच ‘पूर्वोदय’ राज्यों में पांच पर्यटन स्थलों के विकास और 4,000 ई-बसों की व्यवस्था का भी वादा किया गया है। पूर्वोत्तर भारत के विकास को लेकर असम को कुछ महत्व दिया गया है, लेकिन उस पर खास फोकस नहीं दिखता। वित्त मंत्री ने पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बौद्ध परिपथ विकसित करने की योजना में असम को भी शामिल किया है।
इस योजना का मकसद ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करना, वहां तक पहुंच आसान बनाना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार करना है। यह योजना पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए मौके पैदा करने और पहाड़ी व सीमावर्ती इलाकों में अगर की खेती जैसी ज्यादा लाभ देने वाली फसलों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके अलावा, असम के तेजपुर में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े बड़े संस्थान एनआईएमएनएचएस की एक शाखा खोलने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इससे राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होंगी। पिछले साल चुनाव वाले बिहार राज्य के लिए इससे कहीं ज्यादा घोषणाएं की गई थीं। इन घोषणाओं में “पूर्वोदय”, यानी पूर्वी भारत के विकास की योजना के तहत कई बड़े वादे शामिल थे। इनमें राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान खोलने, मखाना बोर्ड बनाने, नए हवाई अड्डे बनाने और पटना हवाई अड्डे के विस्तार की बात कही गई थी। इसके अलावा, मिथिलांचल (उत्तरी बिहार) में पश्चिमी कोशी नहर परियोजना के लिए मदद देने और पटना आईआईटी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का भी वादा किया गया था।
2026-2027 के बजट में केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल या असम के लिए कोई प्रत्यक्ष, राज्य-विशिष्ट वित्तीय आवंटन शामिल नहीं किया गया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट में की गई किसी भी घोषणा में विशिष्ट राज्यों के लिए अलग से बजट मदें नहीं हैं। इसके बजाय,ये राज्य बहु-राज्यीय योजनाओं, क्षेत्रीय गलियारों और विषयगत कार्यक्रमों के अंतर्गत आते हैं, जो स्थानीय प्राथमिकताओं को औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, सतत पर्यटन और विरासत परिपथ विकास जैसे व्यापक रणनीतिक ढांचों से जोड़ने वाले दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। जब सरकार ने एमजीएनआरईजीए के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाकर वीबी जी राम स्वराज अधिनियम लागू करने की बात की तो विपक्ष ने कड़ी आलोचना की।
इसके बाद बजट में गांधी जी का नाम फिर से वापस लाया गया। सीतारमण ने कहा कि वह खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू करना चाहती हैं। इससे इन उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान और ब्रांडिंग में मदद मिलेगी। हालांकि इस बजट भाषण में नीति और आर्थिक मुद्दों पर ज्यादा ध्यान था और सांस्कृतिक संदर्भ कम थे। फिर भी सीतारमण ने कांजीवरम साड़ी पहनकर दक्षिणी राज्यों के प्रतीक का संदेश दिया, जबकि भाषण मुख्य रूप से आर्थिक प्राथमिकताओं पर केंद्रित था।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन)।
RELATED ARTICLES

Video Ads

- Advertisment -spot_img

Video Ads

- Advertisment -spot_img

Most Popular