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मन की बात:मतदाता बनना जीवन का अहम पड़ाव, इसका जश्न मनाएं: पीएम मोदी

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में पानी की कमी दूर करने के लिए स्थानीय लोगों ने जलाश्यों को साफ करने का लक्ष्य रखा और फिर प्रशासन के सहयोग से अनंत नीरूं संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई।

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ मन की बात ‘ कार्यक्रम के 130 वें एपिसोड को संबोधित किया। प्रधानमन्त्री ने साल 2026 के पहले मन की बात कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने गणतंत्र दिवस, मतदाता दिवस, स्टार्टअप इंडिया, पर्यावरण और श्रीअन्न समेत विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।
मतदाता बनना उत्सव मनाने का एक गौरवशाली अवसर
प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि मतदाता बनना उत्सव मनाने का एक गौरवशाली अवसर है। आज मतदाता दिवस है और मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे सेलिब्रेट करते हैं, ठीक वैसे ही जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गांव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयां बांटी जाएं, इससे लोगों में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। आज नेशनल वोटर्स डे पर मैंने माय-भारत के वॉलंटियर्स को एक पत्र लिखा है। इसमें मैंने उनसे आग्रह किया है कि जब हमारे आसपास का कोई युवा साथी पहली बार मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड हो तो हमें उस खुशी के मौके को मिलकर सेलिब्रेट करना चाहिए। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है। जब कोई 18 साल का हो जाता है तो मतदाता बन जाता है। यह अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बड़ा माइलस्टोन होता है। इसलिए जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का उत्सव मनाएं।
*स्टार्ट अप इंडिया की यात्रा को किया याद*
इन दिनों मैं सोशल मीडिया पर एक मजेदार ट्रेंड देख रहा हूं। लोग 2016 की अपनी यादों को ताजा कर रहे हैं। मैं भी आज आपसे अपनी एक याद को साझा करना चाहता हूं। आज से 10 साल पहले हमने एक शुरुआत की। मैं जिस जर्नी की बात कर रहा हूं, वह स्टार्ट अप इंडिया की जर्नी है। इसके हीरो हमारे युवा साथी हैं, जिन्होंने अपने कंफर्ट जोन से निकलकर जो इनोवेशन किए, वे इतिहास में दर्ज हो रहे हैं। आज भारत में दुनिया की तीसरा बड़ा स्टार्टअप इको सिस्टम बन रहा है। एआई, स्पेस, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाईड्रोजन जो भी नाम लें, उन सभी अहम  सेक्टर्स में भारतीय स्टार्टअप काम कर रहे हैं। मैं उन युवा साथियों को सैल्यूट करता हूं, जो स्टार्टअप से जुड़े हैं या शुरू करना चाहते हैं। 
*’उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर करने का लें संकल्प‘*
मैं युवाओं से एक आग्रह करना चाहता हूं कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में हम सभी पर एक बड़ी जिम्मेदारी है, वह है गुणवत्ता पर जोर देने की। चलता है वाला युग चला गया। इस वर्ष हम पूरी ताकत से गुणवत्ता को अहमियत दें और हम सिर्फ गुणवत्ता पर ध्यान दें। हम जो भी बना रहे हैं, उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का संकल्प लें । भारतीय उत्पादों की पहचान ही गुणवत्ता होनी चाहिए।
*जन-भागीदारी और सामहिकता ही देश की ताकत*
हमारे देश के लोग बहुत इनोवेटिव हैं। समस्याओं का समाधान ढूंढना देशवासियों के खून में है। कुछ लोग स्टार्टअप के जरिए करते हैं तो कुछ समाज की सामूहिक भागीदारी से। ऐसा ही एक प्रयास यूपी के आजमगढ़ में दिखाई दिया, जहां स्थानीय लोगों ने तमसा नदी को नया जीवन दिया है। अयोध्या से निकल गंगा में समाहित होने वाली ये नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जीवन की धुरी होती थी, लेकिन प्रदूषण से इन नदी के प्रवाह को रोक दिया। इसके बाद लोगों ने नदी की सफाई की, किनारों पर छायादार पेड़ लगाए और सभी के प्रयास से नदी का पुनर्उद्धार हो गया।
ऐसा ही आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में पानी की कमी दूर करने के लिए स्थानीय लोगों ने जलाश्यों को साफ करने का लक्ष्य रखा और फिर प्रशासन के सहयोग से अनंत नीरूं संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाश्यों को जीवनदान मिला है। साथ ही 7000 से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ ही ग्रीन कवर भी बढ़ा है। जन-भागीदारी और सामूहिकता ही देश की ताकत हैं।
*भजन क्लबिंग जेन जी के बीच हो रहा लोकप्रिय*
हमने मंदिरों में भजन सुने हैं और हर दौर में भक्ति को अपने समय के हिसाब से जिया है। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और जीवनशैली में ढाल लिया है। जिससे नया सांस्कृतिक चलन सामने आया है, जिसमें युवा इकट्ठा हो रहे हैं, वहां संगीत होता है, रोशनी होती है और ऐसा कंसर्ट में भक्तिभाव से भजन गाए जाते हैं। इसे भजन क्लबिंग कहा जा रहा है, जो जेन जी के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अच्छी बात ये है कि इन भजन क्लबिंग में भक्ति भाव को हल्केपन में नहीं लिया जाता और न ही शब्दों की मर्यादा टूटती है। 
*हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं*
आज हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं | दुनिया के हर कोने में भारत के त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं | हर तरह की सांस्कृतिक तरंगता को बनाए रखने में हमारे भारतवंशी भाई-बहनों का अहम योगदान है | वो जहां भी है वहाँ अपनी संस्कृति की मूल भावना को संरक्षित कर और उसे आगे बढ़ा रहे हैं। आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि मलयेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं | इनमें तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है | इसके अलावा यहां तेलुगु और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं पर भी बहुत फोकस रहता है। भारत और मलयेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में एक सोसाइटी की बड़ी भूमिका है।
इसका नाम है ‘मलयेशिया इंडिया हेरिटेज सोसाइटी’ | अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ ही, यह संस्था एक हेरिटेज वॉक का भी आयोजन करती है | इसमें दोनों देशों को आपस में जोड़ने वाले सांस्कृतिक स्थलों को कवर किया जाता है। पिछले महीने मलेशिया में ‘लाल पाड़ साड़ी’ आइकॉनिक वॉक का आयोजन किया गया | इस साड़ी का बंगाल की हमारी संस्कृति से विशेष नाता रहा है | इस कार्यक्रम में सबसे अधिक संख्या में इस साड़ी को पहनने का रिकॉर्ड बना, जिसे मलयेशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया | इस मौके पर ओडिसी नृत्य और बाउल संगीत ने तो लोगों का दिल जीत लिया।
*गांव के सामुदायिक किचन की चर्चा की*
गुजरात में बेचराजी के चंदनकी गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है | अगर मैं आपसे कहूं कि यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते तो आपको हैरत होगी | इसकी वजह गांव का शानदार सामुदायिक किचन है| इस सामुदायिक किचन में एक साथ पूरे गांव का सबका खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 वर्षों से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसके लिए टिफिन सेवा भी उपलब्ध है, यानि होम डिलीवरी का भी पूरा इंतजाम है | गांव का यह सामूहिक भोजन लोगों को आनंद से भर देता है। ये पहल न केवल लोगों को आपस में जोड़ती है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को भी बढ़ावा मिलता है। 
*परिवार से मिलती है चुनौतियों से निपटने की ताकत*
परिवार व्यवस्था हमारी परंपरा का अभिन्न अंग और कई देशों में भी इसे कौतूहल के साथ देखा जाता है। कई देशों में इसके प्रति बेहद सम्मान का भाव है। कुछ दिन पहले संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद भारत आए थे, तब उन्होंने बताया कि यूएई में 2026 को ईयर ऑफ फैमिली के तौर पर मनाया जा रहा है। परिवार से मिली ताकत से हम बड़ी से बड़ी चुनौतियों को भी परास्त कर सकते हैं। अनंतनाग के शेखगुंड गांव में रहने वाले मीर जाफर ने गांव के युवाओं और बुजुर्गों को एकजुट किया और गांव से ड्रग्स, तंबाकू की समस्या को खत्म कर दिया और लोगों को इनके खतरों के प्रति जागरूक किया। 
*स्वच्छता के लिए व्यक्तिगत प्रयास जरूरी*
बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर के फरीदपुर में एक संस्था है विवेकानंद लोक शिक्षा निकेतन। ये संस्था बीते चार दश्कों से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में जुटी है। ये संस्था गुरुकुल शिक्षा पद्धति, अध्यापकों की ट्रेनिंग और नागरिकों की सेवा के विभिन्न कामों से जुड़ी है। अरुणाचल प्रदेश में लोग जय हिंद कहकर एक दूसरे का अभिवादन करते हैं। यहां ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई में एकजुट है, जहां ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इन्होंने सफाई को ही अपना मिशन बना लिया है। ये युवा करीब 11 लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई कर चुके हैं। असम के नागांव में भी लोगों ने मिलकर गलियों की सफाई की। ऐसे ही बंगलूरू में भी सोफा वेस्ट को दूर करने के लिए लोग अपने तरीके से इसका समाधान कर रहे हैं। चेन्नई में एक टीम लैंडफिल वेस्ट को रिसाइकिल करने में जुटी है। हमें स्वच्छता के लिए व्यक्तिगत तौर पर या फिर टीम के तौर पर प्रयास करने होंगे, तभी हमारे शहर और बेहतर बनेंगे।
एक व्यक्ति, एक इलाके और एक कदम और लगातार छोटी-छोटी कोशिशों से बदलाव आते हैं। पश्चिम बंगाल के कूच बिहार के रहने वाले बेनॉय दास हजारों पेड़ लगा चुके हैं। उनके प्रयासों से सड़क किनारे हरियाली बढ़ी। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के जगदीश प्रसाद अहिरवार जंगल में बीट गार्ड के रूप में सेवाएं देते हैं। उन्होंने जंगल में मौजूद पौधों के औषधीय पौधों की पहचान करना और उन्हें रिकॉर्ड करना शुरू किया है। अब तक वे सवा-सौ से ज्यादा औषधीय पौधों की पहचान कर चुके हैं। उनके द्वारा जुटाई जानकारी को वन विभाग ने किताब के रूप में प्रकाशित किया है। यह किताब रिसर्चर और वन अधिकारियों के काम आ रही है। एक पेड़ मां के नाम अभियान के जरिए देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। 
*मिलेट्स को लेकर दुनिया में बढ़ा जुनून*
मैं आप सभी की एक और बात के लिए बहुत सराहना करना चाहता हूँ -वजह है मिलेट्स यानि श्रीअन्न । मुझे ये देखकर खुशी है कि श्रीअन्न के प्रति देश के लोगों का लगाव निरंतर बढ़ रहा है। वैसे तो हमने 2023 को मिलेट ईयर घोषित किया था। लेकिन आज तीन साल बाद भी इसको लेकर देश और दुनिया में जो जुनून और समर्पण है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है। साथियो, तमिलनाडु के कल्ल-कुरिची जिले में महिला किसानों का एक समूह प्रेरणा स्त्रोत बन गया है। यहां के ‘पेरीयपालायम श्रीअन्न’ से लगभग 800 महिला किसान जुड़ी हैं। इन महिलाओं ने मिलेट्स प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की। अब वो मिलेट्स से बने उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुंचा रही है। राजस्थान के रामसर में भी किसान श्रीअन्न को लेकर ऐसा इनोवेशन कर रहे हैं। यहां के रामसर जैविक किसान उत्पादन कंपनी से 900 से ज्यादा किसान जुड़े हैं। ये किसान बाजरे की खेती करते हैं और यहां बाजरे को प्रोसेस कर बाजरे के लड्डू बनाए जाते हैं। इसकी बाजार में बड़ी मांग है। मुझे ये जानकर  बहुत खुशी हुई कि कई मंदिरों के प्रसाद में श्रीअन्न का इस्तेमाल होता है। 
श्रीअन्न से किसानों की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। मिलेट्स पोषण से भरपूर हैं और सर्दियों के मौसम में इन्हें खाना और भी अच्छा होता है। अगले महीने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट होने जा रही है। इस समिट में दुनियाभर से, विशेषकर तकनीक के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भारत आएंगे। यह सम्मेलन एआई की दुनिया में भारत की प्रगति और उपलब्धियों को भी सामने लाएगा । मैं इसमें शामिल होने वाले हर किसी का हृदय से अभिनंदन करता हूं।
*लोग साल 2016 की अपनी यादें ताजा कर रहे हैं*
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा, ‘आजकल मैं सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प ट्रेंड देख रहा हूं। लोग साल 2016 की अपनी यादें ताजा कर रहे हैं। इसी भावना के साथ, आज मैं भी अपनी एक याद आपके साथ शेयर करना चाहता हूं।’ दस साल पहले, जनवरी 2016 में हमने एक महत्वाकांक्षी यात्रा शुरू की थी। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो लेकिन ये युवा-पीढ़ी के लिए, देश के भविष्य के लिए काफी अहम है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन गया है। ये स्टार्ट-अप लीक से हटकर हैं। वे ऐसे सेक्टर्स में काम कर रहे हैं जिनके बारे में 10 साल पहले सोचना भी मुश्किल था।’
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।
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