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जिस राज में प्रजा दुखी हो, वह राजा नरक का अधिकारी : कैलाशानंद

मथुरा। प्रभु राम के वनवास से अयोध्या की प्रजा व ऋषि-मुनि सभी व्यथित थे, किंतु विधि के विधान को कोई नहीं टाल सकता। आचार्य ने कहा कि राम नाम से ही काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसे विकार दूर होते हैं। प्रेम के आंसू शीतल और विरह के आंसू गर्म होते हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग में नाम स्मरण एवं अन्नदान ही प्रमुख साधन हैं तथा राम कथा शंकाओं का समाधान करने वाली है। कथा में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, पदम सिंह, विधायक पूरन प्रकाश, डीएम सीपी सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार, मुकेश खंडेलवाल, जितेंद्र प्रताप सिंह, आनंद दुबे, शैलेश अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, पंकज, अशोक अग्रवाल, अनिल कौशिक, जिला जज आगरा अनिल कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

संचालन पवन दत्त मिश्र व प्रमोद पांडे ने किया। फरह के गो ग्राम परखम में श्रीराम कथा में महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. कैलाशानंद गिरि ने राम वनवास प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जिस राजा के राज में प्रजा दुखी रहती है, वह नरक का अधिकारी होता है। इस दौरान पदम सिंह ने रामचरित मानस पाठ, पर्यावरण व संवर्धन पर बल दिया। कथा से पूर्व आचार्य ने 35 लाख राम नाम पूजन भी किया।  महेश गोयल, यशपाल चौधरी, डॉ. रामप्रताप सिंह, पीएल शर्मा, सुनील शर्मा आदि ने व्यासपीठ पूजन किया।

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