नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत दुनिया के हरित बदलाव की कुंजी है, और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा, “अगर दुनिया को हरित बनना है, तो वह तब तक हरित नहीं हो सकती जब तक भारत हरित न हो जाए। इसी आत्मविश्वास और दृढ़ विश्वास के साथ, हम एक साथ मिलकर वास्तविक प्रभाव पैदा कर सकते हैं और एक टिकाऊ भविष्य को आकार दे सकते हैं। फिक्की के ‘सस्टेनेबल बिज़नेस फ्यूचर्स समिट 2026’ के 10वें संस्करण के समापन सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, तो उसे वैश्विक रणनीतियों, वैश्विक प्राथमिकताओं और मानकों का पालन करना होगा।
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया की पूरी आर्थिक संरचना में जल्द ही एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जो पारंपरिक गतिविधियों से हटकर पुनर्जनन, पुनर्चक्रण और आनुवंशिक प्रक्रियाओं की ओर बढ़ेगा। हमें न केवल इस आर्थिक विकास को बनाए रखना है और लगातार आगे बढ़ना है, बल्कि वैश्विक मानदंडों का पालन सुनिश्चित भी करना है। प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र, दोनों को ‘ऊर्जा प्रणाली नवाचार’ पर काम करना होगा, जिसका मुख्य केंद्र अगली पीढ़ी के ऊर्जा भंडारण के साथ-साथ ग्रिड प्रबंधन होगा। दूसरा, जलवायु मॉडलिंग और जोखिम विश्लेषण पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरा क्षेत्र, जिस पर ध्यान देना होगा, वह है उन्नत सामग्री और निर्माण प्रौद्योगिकी, साथ ही डिजिटल बुनियादी ढांचा मंच। डॉ. सिंह ने कहा, “सभी हितधारकों को ऐसे तरीके खोजने होंगे जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि हरित बुनियादी ढांचे का बदलाव सुचारू, निर्बाध और इष्टतम हो। हम अलग-थलग रहकर काम नहीं कर सकते। मंत्री ने बताया कि घरेलू स्तर पर, भारत की बुनियादी ढांचा रणनीति सभी क्षेत्रों में जलवायु संबंधी विचारों को एकीकृत करती है।
इनमें नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, हरित हाइड्रोजन का विकास, परिवहन का विद्युतीकरण, स्मार्ट शहरी नियोजन और टिकाऊ जल प्रबंधन शामिल हैं। भारत में यूनिडो के उप-क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक और प्रतिनिधि क्रिस्टियानो मास्सिमो पासिनी ने कहा, “औद्योगिक बदलाव अकेले नहीं होता; यह एक इकोसिस्टम के भीतर होता है। इन इकोसिस्टम की गुणवत्ता—जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, संस्थान और वे आपसी जुड़ाव शामिल हैं जो कंपनियों को एक-दूसरे के साथ सहयोग करने और ज़्यादा टिकाऊ तरीके से काम करने में मदद करते हैं—लंबे समय तक बनी रहने वाली प्रतिस्पर्धात्मकता का एक मुख्य निर्धारक है। इस कार्यक्रम के दौरान फिक्की की महानिदेशक सुश्री ज्योति विज भी मौजूद थीं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







