HomeStateअंबेडकरनगर में जगह-जगह ‘कुकुरमुत्तों’ की तरह उभरते अस्पताल—स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

अंबेडकरनगर में जगह-जगह ‘कुकुरमुत्तों’ की तरह उभरते अस्पताल—स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

*👉🏿अंबेडकर नगर जनपद में हाल के वर्षों में जिस तेज़ी से निजी अस्पतालों, नर्सिंग होमों और क्लीनिकों का विस्तार हुआ है, उसने आम जनता के बीच गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालात यह हैं कि लगभग हर मुख्य बाज़ार, चौराहे, कस्बे और यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी अस्पताल और क्लीनिक कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं। देखने में यह स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार जैसा लगता है, लेकिन जब इन संस्थानों की वास्तविक स्थिति पर नज़र डालते हैं, तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं—क्या ये अस्पताल वास्तव में स्वास्थ्य सेवा देने के लिए बने हैं या फिर यह सिर्फ़ मुनाफ़ाखोरी का तेजी से फैलता हुआ व्यवसाय बन चुका है?*

*सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई जगह संचालित होने वाले अस्पतालों में योग्य डॉक्टरों की कमी है। कई क्लीनिक बिना रजिस्ट्रेशन, बिना मानक सुविधाओं और बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के भी रोगियों का इलाज कर रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें आती रही हैं कि कई संस्थान सामान्य जांच को भी भारी-भरकम बिल बनाकर वसूलते हैं। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं जहां मानवीय संवेदना से भरी होनी चाहिए थीं, वहीं अब यह क्षेत्र आर्थिक शोषण का साधन बनता दिखाई दे रहा है।*

*अस्पतालों के इस अनियंत्रित विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है—सुरक्षा और मानक व्यवस्था का अभाव। कई नर्सिंग होम न तो अग्निशमन प्रणाली रखते हैं, न ही आपातकालीन व्यवस्थाओं से लैस होते हैं। प्रसूति सेवाओं से लेकर गंभीर मरीजों के इलाज तक, कई जगह आवश्यक मशीनों की कमी देखने को मिलती है, जिससे अक्सर मरीजों को दूसरे जनपदों तक रेफर किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सुविधा देने की क्षमता नहीं है, तो अस्पताल खोलने की अनुमति कैसे मिल जाती है?*

*इस बढ़ते हुए कारोबारी ढांचे का एक और दुष्परिणाम यह है कि मरीज सही जगह इलाज कराने के लिए भी असमंजस में रहते हैं। हर चौक-चौराहे पर खुलते अस्पतालों के बीच लोग यह समझ ही नहीं पाते कि कौन-सा संस्थान सक्षम है और कौन सिर्फ नाममात्र का अस्पताल। स्वास्थ्य जैसी गंभीर जिम्मेदारी वाला क्षेत्र यदि बिना किसी मज़बूत निगरानी के चलेगा, तो परिणाम जनहित में नहीं हो सकते।*

*स्थिति को सुधारने के लिए ज़रूरी है कि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित निरीक्षण एजेंसियां जागरूक हों और नियमित रूप से अस्पतालों का सघन निरीक्षण करें। जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करते, उन्हें या तो मानक पूरा करने के लिए बाध्य किया जाए या फिर उनके संचालन पर रोक लगे। इसके साथ ही जनता को भी जागरूक होने की आवश्यकता है कि इलाज के लिए पात्र और लाइसेंसी अस्पतालों का चयन करें।*

*अंबेडकर नगर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होना अच्छी बात है, लेकिन यदि यह विस्तार गुणवत्ता और मानक व्यवस्था के बिना होगा, तो समाज को लाभ नहीं, बल्कि नुकसान ही मिलेगा। स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा का सबसे बड़ा स्तंभ है—इसे उसी संवेदना और जवाबदेही के साथ चलाया जाना अनिवार्य है।*

RELATED ARTICLES

Video Ads

- Advertisment -spot_img

Video Ads

- Advertisment -spot_img

Most Popular