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स्ट्रोक के मैनेजमेंट को मज़बूत करने के लिए तालमेल, प्रतिबद्धता और सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत: जे.पी. नड्डा

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि स्ट्रोक एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी चेतावनी के व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों को प्रभावित करता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “स्ट्रोक का समय पर पता चलना, तुरंत रेफरल और अच्छी क्वालिटी का इलाज मिलने से जान बच सकती है और ज़िंदगी भर की विकलांगता से बचा जा सकता है।”फिक्की के ‘नेशनल स्ट्रोक समिट 2026’ के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार एक सुलभ, किफायती, टेक्नोलॉजी-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन जैसी महत्वपूर्ण पहलें पूरे देश में डिजिटल हस्तक्षेपों और क्रिटिकल केयर क्षमताओं के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा वितरण को मज़बूत कर रही हैं। नड्डा ने आगे कहा कि इस यात्रा में टेक्नोलॉजी, डिजिटल स्वास्थ्य और डेटा प्लेटफॉर्म की बड़ी भूमिका है, लेकिन इसके लिए तालमेल, प्रतिबद्धता और सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “मैं सभी हितधारकों से आग्रह करता हूँ कि वे राज्य स्तर पर स्ट्रोक के मैनेजमेंट को मज़बूत करने, प्रशिक्षण और विशेषज्ञ क्षमताओं का विस्तार करने, तथा तेज़ और बेहतर देखभाल के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाने हेतु मिलकर काम करें।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री तथा आयुष (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और मज़बूत करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज़ों को समय पर इलाज मिले। स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को 112 एम्बुलेंस नंबर को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनाने, तथा ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट उपलब्ध कराने में सहायता दी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि इस दिशा में ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ की अहम भूमिका होगी। स्पोक मॉडल के तहत, क्षेत्रीय केंद्र मरीज़ों की पहचान करने के साथ-साथ उन्हें प्राथमिक उपचार देने में भी मदद कर सकते हैं; वहीं हब के तहत, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मरीज़ों को गंभीर देखभाल (क्रिटिकल केयर) मुहैया करा सकते हैं। इस मॉडल की असली ताकत सभी हितधारकों के बीच आपसी तालमेल पर निर्भर करती है।
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा, “स्ट्रोक का इलाज भी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आता है। राज्यों को इसमें अहम भूमिका निभानी होगी, क्योंकि स्ट्रोक के इलाज की सफलता इसी बात पर निर्भर करेगी कि राज्य ज़मीनी स्तर पर इन योजनाओं को किस तरह लागू करते हैं।” भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील के. बर्नवाल ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ हमें एक आपस में जुड़ा हुआ, एकीकृत और स्मार्ट स्वास्थ्य सेवा तंत्र बनाने की दिशा में सोचने में मदद करता है। उन्होंने आगे कहा, “हमें एक बिखरे हुए स्वास्थ्य सेवा तंत्र से हटकर एक एकीकृत स्वास्थ्य सेवा तंत्र की ओर बढ़ना होगा। यह सिर्फ़ अत्याधुनिक उपकरणों या तकनीक के बारे में नहीं है, बल्कि यह मरीज़ के स्वास्थ्य इतिहास और उसके रिकॉर्ड के बारे में ज़्यादा है।
सांसद और आईएमपीएफ के अध्यक्ष डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि देश में, विशेष रूप से ग्रामीण स्तर पर, स्ट्रोक के बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है। स्ट्रोक का इलाज आयुष्मान भारत योजना में शामिल है, और पिछले कुछ वर्षों में इसके इलाज के दायरे का भी विस्तार किया गया है। फिक्की के स्वास्थ्य क्षेत्र के मेंटर हर्ष महाजन ने कहा कि भारत में मृत्यु और लंबे समय तक रहने वाली विकलांगता का एक प्रमुख कारण स्ट्रोक बना हुआ है। यहाँ हर साल स्ट्रोक के 18 लाख से ज़्यादा नए मामले सामने आते हैं, और कुल होने वाली मौतों में से लगभग 10 प्रतिशत मौतें इसी के कारण होती हैं। उन्होंने आगे कहा, “इनमें से बड़ी संख्या में मामलों को रोका जा सकता है, और समय पर पहचान व उचित हस्तक्षेप के माध्यम से इसके परिणामों में काफ़ी सुधार किया जा सकता है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय—’स्ट्रोक पे रोक’—रोकथाम, जागरूकता और समय पर कार्रवाई पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करता है।”
आईसीएमआर, बेंगलुरु के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर और फिक्की की चिकित्सा उपकरण समिति के सदस्य मनदीप सिंह कुमार ने भी देश में स्ट्रोक के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
इस शिखर सम्मेलन के दौरान ‘स्ट्रोक कार्य योजना’का अनावरण किया गया—जो कि एक व्यापक और लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार रूपरेखा है। इसके साथ ही, ‘थ्रॉम्बेक्टॉमी’ की सुविधा से लैस ‘स्ट्रोक-रेडी केंद्रों’ की सूची भी जारी की गई और विभिन्न साझेदारियों को भी प्रदर्शित किया गया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।
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