नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘परीक्षा पे चर्चा’ 2026 के दूसरे एपिसोड ने नया इतिहास रच दिया. यह कार्यक्रम किसी एक शहर या स्टूडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों- तमिलनाडु (कोयंबटूर), छत्तीसगढ़, गुजरात और असम के छात्रों के साथ संवाद कर इसे ‘अखिल भारतीय क्लासरूम’ में बदल दिया. कार्यक्रम की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस बार का फॉर्मेट उन हजारों सुझावों का परिणाम है, जिसमें कार्यक्रम को दिल्ली के बाहर देश के अन्य कोनों में भी आयोजित करने की मांग की गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से निपटने, आत्मविश्वास बनाए रखने और पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि उत्सव की तरह लेने की सीख दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे खुद की तुलना दूसरों से न करें और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखें। पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि दबाव में पढ़ाई करने से परिणाम बेहतर नहीं होते, बल्कि संतुलित दिनचर्या और सकारात्मक सोच ज्यादा जरूरी है।
*परीक्षा को ‘उत्सव’ की तरह लेने पर जोर*
पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा पे चर्चा का उद्देश्य परीक्षा को डर का कारण नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखना है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे मिलकर ऐसा माहौल बनाएं, जहां बच्चों को खुलकर सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिले।
*पढ़ाई के साथ स्किल डेवलपमेंट जरूरी*
प्रधानमंत्री ने छात्रों को यह संदेश दिया कि केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, रचनात्मकता और व्यवहारिक सीख भी उतनी ही अहम है। उन्होंने तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से बचने पर भी जोर दिया। पीएम मोदी ने परीक्षा पे चर्चा करते हुए कहा कि विविधता से भरे इन राज्यों के छात्रों की ऊर्जा और अलग-अलग चुनौतियों को समझना उनके लिए सीखने का बहुत बड़ा अवसर है. इस बहु-राज्यीय संवाद के दौरान पीएम मोदी ने कोयंबटूर के छात्रों के साथ स्टार्टअप और एआई चर्चा की. वहीं छत्तीसगढ़, गुजरात और असम के छात्रों के साथ अनुशासन, विकसित भारत के संकल्प और परीक्षा के तनाव पर संवाद किया. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, हर छात्र की समस्या और सपने समान हैं. उन्होंने छात्रों को ‘सिखाने’ के बजाय उनके साथ ‘सीखने’ और ‘साझा अनुभव’ के स्तर पर बातचीत की.
पीएम मोदी ने समझाया कि परीक्षा से एक हफ्ते पहले सकारात्मक सोच रखें कि आपने जो भी पढ़ा या सुना है, वह बेकार नहीं गया है; वह आपके मस्तिष्क में कहीं न कहीं स्टोर है. उन्होंने सलाह दी कि शांत मन से बैठें और चिंता न करें. अच्छा स्टूडेंट बनने के लिए विषय पर पकड़ जरूरी है. उन्होंने एक अनोखा तरीका बताया-अपने उन दोस्तों को विषय पढ़ाएं जो उसमें कमजोर हैं. दूसरों को सिखाने से आपका अपना ज्ञान पक्का होगा. उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ जीवन में ‘खेल’ भी अनिवार्य है, जिससे जिंदगी बोझ न बने.
*नेतृत्वकर्ता कैसे बने*
नेतृत्वकर्ता कैसे बने इस बात को छात्रों को समझाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि खुद को प्रौद्योगिकी का गुलाम न बनने दें। कितनी भी प्रेरणा हो, अनुशासन के बिना उसका कोई फायदा नहीं होगा। नेतृत्व का पहला और सबसे महत्वपूर्ण गुण यह है कि आप अपने विचारों को कम से कम 10 लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंचा सकें।
*पीएम मोदी ने छात्रों को दिए 10 अहम टिप्स*
छात्रों से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने दस अहम टिप्स दिए।
*समय प्रबंधन-* पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के लिए समय को सही तरीके से बांटें।
*अनुशासन-* बिना अनुशासन के मेहनत और प्रेरणा का कोई फायदा नहीं।
*स्पष्ट संवाद-* अपने विचारों को कम से कम 10 लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंचा सकें।
*प्रौद्योगिकी का सही उपयोग-* तकनीक का गुलाम न बनें, उसका समझदारी से इस्तेमाल करें।
*सकारात्मक सोच-* चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण से करें।
नेतृत्व कौशल- दूसरों को प्रेरित करने और मार्गदर्शन करने की क्षमता विकसित करें।
*स्व-अध्ययन-* खुद से सीखने और ज्ञान बढ़ाने की आदत डालें।
*स्वास्थ्य का ध्यान-* शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
*संतुलित जीवन-* पढ़ाई के साथ खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में संतुलन रखें।
*सकारात्मक नेटवर्किंग-* अच्छे लोगों से मिलें, विचार साझा करें और सीखें।
*नींद पर दी ये सलाह*
पीएम मोदी ने बच्चों को तनाव से निपटने के लिए अच्छी नींद लेने और खूब हंसने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अच्छी नींद लेने से दिमाग में फ्रेश आइडिया आते हैं, फ्रेश सोच आती है। इसके साथ ही एक छात्र ने कहा कि एआई का इस्तेमाल बढ़ने से डर लग रहा है। पीएम ने इस विषय पर छात्रों से कहा कि किसी चीज से डरना नहीं चाहिए, ध्यान रखें कि हमें उसका गुलाम नहीं बनना है। उन्होंने छात्रों को खुद ही निर्णायक बनने की सलाह दी। पीएम ने कहा कि कुछ बच्चों के लिए मोबाइल उनका मालिक बन गया है। एआई हमारे कामों में वैल्यू एडिशन करे, बस उसका इतना ही इस्तेमाल करें।
*पीएम मोदी की बच्चों के माता-पिता से खास अपील*
एक छात्र ने पूछा कि जब माता-पिता दूसरे बच्चों से तुलना करते हैं तो क्या करना चाहिए। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि परिवार में प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाने के बजाय सहयोग और समझ बढ़ानी चाहिए। बच्चों की तुलना करने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि किसी एक बच्चे की इतनी अधिक प्रशंसा न करें जिससे दूसरे को हीन भावना हो। परिवार में संतुलित व्यवहार ही बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
आत्म विश्वास का असली मतलब क्या है
चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने आत्मविश्वास को ‘आत्म’ और ‘विश्वास’ का मेल बताया। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को खुद पर भरोसा होता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी डगमगाता नहीं है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए बताया कि बड़े मंच पर जाने से पहले घबराहट होना स्वाभाविक है, लेकिन विश्वास और तैयारी से ही सफलता मिलती है। इसी तरह उन्होंने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का जिक्र करते हुए कहा कि असफलता जीवन का हिस्सा है और उससे सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन)।







