बाड़मेर : कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति डॉ. वीरेंद्र सिंह जैतावत ने कृषि विज्ञान केंद्र(श्योर), दांता का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र द्वारा चलायी जा रहीविभिन्न परियोजनाएं (निकरा, हस्तशिल्प), कृषि तकनीकी, प्रशिक्षण एवं विस्तार गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। कुलपति महोदय ने केंद्र के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों से संवाद करते हुए किसानों के हित में चलाए जा रहे कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि यह कृषि विज्ञान केंद्र कृषकों के हितो को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रहा है जिससे जिले की कृषि में कृषकों को लाभ होगा । भ्रमण के दौरान डॉ. विनय

कुमार,वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने कुलपति महोदय को बताया कि केंद्र पर संचालित विभिन्न इकाइयों (जैसे – गाय पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, केंचुआ खाद उत्पादन तकनीक, प्राकृतिक खेती, औषधीय गार्डन), फसल प्रदर्शनों, उद्यानिकी फसलें (बेर, आंवला, खजूर एवं अनार बगीचा), मृदा परीक्षण प्रयोगशाला तथा तकनीकी गतिविधियों का
अवलोकन किया गया और किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों को प्रभावी ढंग से पहुँचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और विश्वविद्यालय के बीच सेतु का कार्य कर रहे हैं तथा क्षेत्र की विशेष समस्याओं के समाधान में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर केंद्र प्रभारी एवं वैज्ञानिकों द्वारा क्षेत्र में चल रही योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई। कुलपति महोदय ने वैज्ञानिकों को अनुसंधान एवं विस्तार कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने वैज्ञानिकों से क्षेत्रीय

समस्याओं के अनुरूप विकसित की जा रही कृषि तकनीकों, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, मिश्रित खेती प्रणाली तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर कुलपति महोदय ने केवीके के वैज्ञानिकों द्वारा जिले में किसानों के लिए समय – समय पर प्रशिक्षण, कृषक मेले, कृषि प्रदर्शनी, प्रथम पंक्ति प्रदर्शन एवं महिला कृषकों के सशक्तिकरण हेतु कार्यक्रम आयोजित करवाने पर जोर दिया। डॉ. जैतावत ने किसानों तक नवीनतम कृषि तकनीकों के त्वरित एवं प्रभावी प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं और इन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करना चाहिए। भ्रमण के दौरान डॉ. प्रदीप पगारिया (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष,के.वी.के, गुड़ामालानी) विषय विशेषज्ञ एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्योर संस्था की
संयुक्त सचिव लता कच्छवाहा द्वारा कुलपति महोदय का आभार व्यक्त किया गया।







