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ठेकेदारों की गलती से हुई थी सफाई कर्मियों की मृत्यु, 30-30 लाख मुआवजा देंगे

वृंदावन। सीवर चेंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने से हुई दो सफाई कर्मियों की मृत्यु के मामले में जांच पूरी हो गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर गठित दो सदस्यीय जांच समिति ने बिना सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए सफाई कर्मियों से कार्य कराने के लिए ठेकेदारों को दोषी माना है। साथ ही पीड़ित परिजन को 30-30 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए ठेकेदारों को आदेशित किया गया है। हालांकि समिति 28 जनवरी को हाईकोर्ट में कई पन्नों की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। 21 जून 2025 को वाल्मीकि बस्ती के खुशीपुरा निवासी नरेंद्र और छोटे लाल वृंदावन के केशवधाम के पास बुर्जा चौराहे पर ठेकेदार हेमंत और उमर के कहने पर चेंबर की सफाई के लिए गए थे। चेंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दोनों सफाई कर्मियों की मृत्यु हो गई थी।

नरेंद्र के भाई ने दोनों ठेकेदारों के खिलाफ वृंदावन कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। साथ ही मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग को लेेकर नरेंद्र की पत्नी गीता देवी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर न्याय की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर आयुक्त ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय एडीएम न्यायिक सुरेंद्र यादव और अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह की जांच समिति गठित की। जांच समिति ने 20 जनवरी को मामले की जांच पूरी कर ली है। जांच में पाया कि ठेकेदार निजी कार्य कराने के लिए दोनों सफाई कर्मियों ले गया था। ये सफाई कर्मी न नगर निगम के कर्मचारी थे और न ही आउटसोर्सिंग पर कार्यरत थे।

यही कारण रहा कि जांच समिति ने ठेकेदार हेमंत और उमर को पूरे प्रकरण दोषी माना है और दोनों पीड़ित परिजन को 30-30 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए आदेशित किया है। अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह ने बताया कि मामले की जांच पूरी हो गई है। 28 जनवरी को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आगे की दिशा तय की जाएगी।

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