बागपत। अब बागपत केवल एक जिला नहीं, बल्कि अपनी पहचान को फिर से गढ़ने को बेताब है और इस दिशा में यह जिला आगे बढ़ते हुए प्रदेश में अनुकरणीय उदाहरण भी बनने जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक जिला बागपत अब अपनी उस विरासत को सामने लाने की तैयारी में है, जो अब तक गांवों की परंपराओं, मंदिरों और लोककथाओं में जीवित थी, लेकिन एक संगठित रूप में सामने नहीं आ पाई थी।विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन ने सेंटर फार हिस्टोरिक हाउसिज आफ इंडिया के सहयोग से जिले में पहली बार ‘हेरिटेज ट्रेल’ शुरू करने की घोषणा की है। यह पहल केवल पर्यटन बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि बागपत की आत्मा—उसकी संस्कृति, उसकी परंपराएं और उसके इतिहास को एक नई पहचान देने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस तरह धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को स्वच्छता, सुव्यवस्था और गौरव के साथ जोड़ा जा रहा है, उसी क्रम में बागपत भी अब अपनी विरासत को विकास के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हेरिटेज ट्रेल इसी सोच का हिस्सा है, जहां अतीत को संजोते हुए भविष्य को मजबूत किया जाएगा।
बता दें कि, बागपत वही क्षेत्र है, जो महाभारत कालीन घटनाओं से जुड़ा रहा है। यमुना किनारे बसे गांवों में आज भी ऐसी परंपराएं, मान्यताएं और स्थल मौजूद हैं, जो सदियों पुराने सांस्कृतिक प्रवाह को दर्शाते हैं, लेकिन समय के साथ ये धरोहर सीमित पहचान तक सिमट गई थीं। अब हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से इन्हें एक साथ जोड़कर एक ऐसी श्रृंखला बनाई जाएगी, जो बागपत को एक अलग पहचान दे सके।
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गांवों को केंद्र में रखा गया है। अब तक जो विरासत केवल स्थानीय लोगों तक सीमित थी, वह अब पूरे देश और दुनिया के सामने आएगी। इससे बागपत के लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना और मजबूत होगी तथा इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। गांवों के युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही गांवों में होम स्टे, स्थानीय भोजन और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलेगा।
छोटे दुकानदारों, कारीगरों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए यह पहल नई संभावनाएं लेकर आएगी। मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक वस्त्र और स्थानीय उत्पाद अब केवल गांव तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें नया बाजार मिलेगा। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगी।
जिला प्रशासन का मानना है कि विरासत को बचाने का काम केवल सरकारी स्तर पर नहीं हो सकता। इसके लिए जनभागीदारी जरूरी है। इसलिए गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस पहल से जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपनी धरोहर को अपनी जिम्मेदारी समझें। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने इस पहल को जिले के भविष्य से जोड़ते हुए कहा,“बागपत की पहचान उसकी विरासत से बने, यही हमारा लक्ष्य है। हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से हम इसे पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करेंगे और स्थानीय लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।”
वहीं जनपदवासियों का मानना है कि,अगर यह योजना जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में बागपत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना सकेगा तथा जिले के लोग अपनी पहचान को नए गर्व के साथ महसूस करेंगे।
स्टेट ब्यूरो,( डॉ योगेश कौशिक ) |







