नई दिल्ली. समिट के प्लेनरी सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एआई के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए सही समय पर सही फैसले लेना और एक साझा वैश्विक रोडमैप बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है और बुद्ध ने भी कहा था कि सही समझ से ही सही कर्म उत्पन्न होते हैं।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई का सच्चा प्रभाव तभी सामने आएगा जब देश मिलकर सहयोग की भावना से काम करेंगे। उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया ने देखा है कि जब देश एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन विकास से लेकर सप्लाई चेन, डेटा साझाकरण और लोगों की जान बचाने तक, महामारी के दौरान वैश्विक सहयोग ने ही समाधान प्रदान किया। पीएम मोदी ने इस अनुभव के आधार पर एआई के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आवश्यक बताया।
*भारत की ताकत बताकर प्रधानमंत्री ने देश में निवेश का न्योता दिया*
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में कहा, मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही है कि इस समिट में तीन भारतीय कंपनियों ने अपने एआई मॉडल्स और एप लॉन्च किए हैं। ये युवाओं की प्रतिभा के सबूत हैं। भारत जो सॉल्यूशन दे रहा है, ये उसकी गहराई और विविधता के भी प्रतिबिंब हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत सेमीकंडक्टर और चिप मेकिंग से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक एक रेजिलिएंट इको सिस्टम बना रहा है।
सिक्योर डाटा सेंटर, मजबूत आईटी बैकबोन, डायनेमिक स्टार्टअप इकोसिस्टम भारत को अफॉर्डेबल, स्केलेबल और सिक्योर एआई सॉल्यूशंस का नैचुरल हब बनाते हैं। देश की ताकत को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, भारत के पास डायवर्सिटी, डेमोग्राफी के साथ-साथ डेमोक्रेसी भी है। जो एआई मॉडल भारत में सफल होता है, उसे वैश्विक स्तर पर भी आजमाया जा सकता है। उन्होंने टेक वर्ल्ड के दिग्गजों से भारत में निवेश का आह्वान करते हुए कहा, डिजाइन एंड डेवलप इन इंडिया, डिलिवर टू द वर्ल्ड, डिलिवर टू दी ह्यूमैनिटी।
*भारत में सफल एआई मॉडल दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है*
प्रधानमंत्री मोदी ने खाद्य पैकेटों पर मौजूद पोषण संबंधी लेबल की तर्ज पर एआई सामग्री के लिए भी प्रामाणिकता वाले लेबल लगाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग एआई से डरते हैं, कुछ लोग इसमें भविष्य देखते हैं। भारत एआई में भविष्य देखता है। प्रधानमंत्री ने मेड इन इंडिया और देश की युवा प्रतिभा को वैश्विक मंच पर रेखांकित करते हुए कहा, भारत में सफल होने वाला कोई भी एआई मॉडल दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
*एआई इंपैक्ट समिट भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय*
बकौल पीएम मोदी, ये समिट जिस भारत में हो रही है वो भारत मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। भारत सबसे बड़े टेक इनेबल्ड इको सिस्टम का उदाहरण है। हम नई तकनीक बनाते भी हैं और उसे अभूतपूर्व तेजी के साथ अपनाते भी हैं। नई तकनीक को लेकर उत्सुक 140 करोड़ भारतीयों की ओर से आप सभी राष्ट्राध्यक्षों, ग्लोबल एआई सिस्टम के लीडर्स और इनोवेटर्स का स्वागत है। इस समिट का भारत में होना भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है। इस समिट में एआई जगत के दिग्गज मौजूद हैं। दुनिया के 100 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व हो रहा है। दुनिया के कोने-कोने से यहां आए महानुभाव समिट की सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। इसमें युवाओं की उपस्थिति नया विश्वास पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मानव सामर्थ्य कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज और गहरा दोनों है। हमें विजन और जिम्मेदारी दोनों बड़ी रखनी होगी। उन्होंने कहा, असली सवाल यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि हम वर्तमान में एआई का उपयोग करके क्या कर सकते हैं। भारत नई तकनीक विकसित करता है और उसे तेजी से अपनाता भी है।
*अंबानी का बड़ा एलान- 10 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा*
एआई इंपैक्ट समिट में भारत के अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी ने भी बड़े एलान किए। उन्होंने कहा कि एआई का सबसे अच्छा दौर आना अभी बाकी है। उन्होंने कहा, एआई कई क्षेत्रों में नए दौर की शुरुआत कर सकता है। उन्होंने कहा, दुनिया इस बात पर बहस कर रही है कि क्या एआई के कारण ताकत कुछ लोगों के हाथों में सिमट जाएगी। या एआई सभी के लिए मौके और सबके लिए आसान अवसर का माध्यम बनेगा।
*अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ का निवेश*
उन्होंने मौजूदा दौर में कृत्रिम बुद्धिमता के असर को रेखांकित करते हुए कहा, आज एआई को लेकर दुनिया दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता कम, महंगे एआई और कंट्रोल्ड डाटा की तरफ ले जाता है, दूसरा सस्ता, आसानी से मिलने वाली एआई की सुविधा सुनिश्चित करता है। मुकेश अंबानी ने अपने घराने की प्रतिबद्धता साझा करते हुए कहा, जिस तरह कंपनी ने मोबाइल डाटा का कॉस्ट कम किया है, उनका ग्रुप एआई की कॉस्ट भी कम करेगा। उन्होंने कहा कि जियो और रिलायंस इंडिया लिमिटेड इस साल से शुरूआत कर अगले 7 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
*भारत के लिए एक तीन-स्तरीय रणनीति पेश किया*
उन्होंने भारत के लिए एक तीन-स्तरीय रणनीति भी पेश की। इसके तहत गीगावाट स्तर के एआई-रेडी डेटा सेंटर का निर्माण, हरित ऊर्जा आधारित कंप्यूटिंग क्षमता और जियो नेटवर्क से जुड़ी देशव्यापी एज कंप्यूट लेयर विकसित की जाएगी, ताकि कम लेटेंसी, किफायती और तेज एआई सेवाएं लोगों के करीब उपलब्ध हो सकें। अंबानी ने बताया कि जामनगर में मल्टी-गीगावाट एआई-रेडी डेटा सेंटर का निर्माण शुरू हो चुका है और 2026 की दूसरी छमाही तक 120 मेगावाट क्षमता ऑनलाइन आ जाएगी।
*भारत नामक बहुभाषी एआई पहल की घोषणा*
अंबानी ने जियो एआई भारत नामक बहुभाषी एआई पहल की भी घोषणा की, जो सभी भारतीय भाषाओं में काम करेगी, ताकि किसान, कारीगर, छात्र और छोटे उद्यमी अपनी मातृभाषा में तकनीक से जुड़ सकें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नए कौशल आधारित रोजगार के अवसर पैदा करेगा और भारत को 21वीं सदी की प्रमुख एआई शक्तियों में से एक बनाने में मदद करेगा।
*एआई से हेल्थकेयर, शिक्षा और रिसर्च सेक्टर में आएगी तेजी, बोले सुनील मित्तल*
भारती ग्रुप के चेयरमैन सुनील मित्तल ने समिट में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत से हेल्थकेयर, शिक्षा, डीप रिसर्च और मेडिकल साइंसेज जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेज विकास देखने को मिलेगा। मित्तल ने कहा कि एआई अब कंपनियों के संचालन का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी के लिए एआई ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने, नेटवर्क तैयार करने और नेटवर्क मैनेजमेंट को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में विभिन्न सेक्टर्स एआई के सहारे नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे और यह तकनीक उद्योगों के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव लाने वाली है।
*एआई अपनाने में दुनिया का नेतृत्व कर रहा भारत, बोले ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन*
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा कि भारत वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में अहम भूमिका निभा रहा है और फिलहाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ एआई क्रांति में भाग नहीं ले रहा, बल्कि इसे आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में ऑल्टमैन ने भारत के डिजिटल विकास को लेकर आशावाद जताया और कहा कि देश के टेक इकोसिस्टम में हो रहा काम अद्भुत है और वैश्विक गति तय कर रहा है। उन्होंने भारत को भविष्य के नवाचार का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि एआई के वैश्विक विकास पर भारत का बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
रोजगार पर एआई के प्रभाव को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव नौकरी बाजार को जरूर प्रभावित करेंगे, लेकिन इतिहास बताता है कि नई तकनीकें नए और अधिक सार्थक रोजगार के अवसर भी पैदा करती हैं। उन्होंने मानव क्षमता और अनुकूलन की शक्ति पर भरोसा जताया।
*एआई डेटा सेंटर को लेकर टाटा ग्रुप की बड़ी घोषणा*
चंद्रशेखरन ने घोषणा की कि टाटा ग्रुप भारत का पहला बड़े पैमाने पर एआई-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर विकसित कर रहा है, जिसे अगली पीढ़ी की एआई ट्रेनिंग और इंफरेंस की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती 100 मेगावाट क्षमता के निर्माण के लिए ओपनएआई के साथ साझेदारी की गई है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर एक गीगावाट तक विस्तार करने की योजना है।
*एआई का वैश्विक एंटरप्राइज पर गहरा प्रभाव पड़ेगा*
उन्होंने कहा कि एआई का पब्लिक सर्विस डिलीवरी और वैश्विक एंटरप्राइज पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। आईटी इंडस्ट्री के संदर्भ में उन्होंने इसे टेक सेक्टर के लिए सबसे बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि आईटी की असली ताकत हर एंटरप्राइज के बिजनेस, टेक्नोलॉजी लैंडस्केप और पूरे इकोसिस्टम की समझ में होती है, और एआई इस भूमिका को और मजबूत करेगा।
*एआई इंटेलिजेंस का इंफ्रास्ट्रक्चर है*
टाटा चेयरमैन ने एआई को एक बुनियादी तकनीक बताते हुए कहा कि यह सभी उद्योगों में काम करती है, डेटा से सीखती है और तेजी से स्केल हो सकती है। उनके मुताबिक एआई इंटेलिजेंस का इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसका प्रभाव उतना ही गहरा होगा जितना कभी स्टीम इंजन, बिजली और इंटरनेट का रहा है।
*एआई का लक्ष्य क्या होना चाहिए*
उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का लक्ष्य एआई को हर नागरिक तक पहुंचाने का होना चाहिए। उन्होंने भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि बिना किसी तकनीकी पृष्ठभूमि वाली 1,500 ग्रामीण महिलाओं ने कुछ ही घंटों में एआई टूल्स सीखकर प्रोडक्ट और मार्केटिंग सामग्री तैयार कर ली।
*पीएम मोदी के विजन पर क्या बोले?*
चंद्रशेखरन ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के तहत भारत ने एआई को एक रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमता के रूप में आगे बढ़ाया है, जिसमें चिप्स, सिस्टम, ऊर्जा और एप्लिकेशन को साथ लेकर काम किया जा रहा है। सेमीकॉन इंडिया, इंडिया एआई मिशन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े सुधारों को उन्होंने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने भारत की डिजिटल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम और वैश्विक स्तर पर अग्रणी डिजिटल पेमेंट इंटरफेस इस बात का प्रमाण हैं कि भारत बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता रखता है, और यही आत्मविश्वास देश के एआई भविष्य को लेकर आशावाद को मजबूत करता है।
विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन).







