मथुरा। जिला अस्पताल की साइकोलोजिस्ट डॉ. नीतू सिंह के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फिटनेस मॉडल्स और एडिटेड तस्वीरों को लगातार देखते रहने के कारण कई महिलाएं अपने शरीर की तुलना दूसरों से करने लगती हैं। सामान्य वजन होने के बावजूद खुद को मोटा महसूस करना, वजन बढ़ने का डर बना रहना और अत्यधिक डाइटिंग इस समस्या के प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में यह स्थिति अवसाद, चिंता, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक दूरी जैसी मानसिक परेशानियों को जन्म दे रही है। उन्होंने बताया कि महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के कठोर डाइट प्लान अपनाकर भोजन छोड़ देती हैं या तेजी से वजन घटाने वाली दवाओं का सहारा लेती हैं।
इससे शरीर में पोषण की कमी, कमजोरी, हार्मोन असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। यह समस्या केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालती है। परिवार और समाज में अक्सर महिलाओं के रंग, रूप और वजन को लेकर की जाने वाली टिप्पणियां भी उन पर मानसिक दबाव बनाती हैं। स्लिम दिखने की चाहत में वे अनावश्यक तनाव में रहने लगती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि वजन को लेकर चिंता करने के बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच अपनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि शरीर को लेकर नकारात्मक विचार परेशान करें, खाने की आदतें असामान्य हो जाएं या वजन को लेकर चिंता महसूस हो तो तुरंत मनोचिकित्सक या काउंसलर से सलाह लेनी चाहिए। स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर और सोशल मीडिया पर वास्तविक तथा स्वस्थ शरीर की छवि को बढ़ावा देकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।







