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वृंदावन के जिन घाटों को जगमग करनी की थी तैयारी, वहां का हाल देख रह जाएंगे हैरान

वृंदावन। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की हृदय योजना के तहत नगर निगम ने सात करोड़ 15 लाख रुपये की लागत से बिहार घाट, करौली घाट, नाभा घाट, कोयलिया घाट, कालीदह घाट का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया था। निगम द्वारा यहां पानी की निकासी, समय-समय पर साफ पानी भरने के लिए पंपसेट लगाया गया। लाखों रुपये की लागत से एक दर्जन फव्वारे लगाए गए। इसके बाद नगर निगम ने इस ओर से मुहं मोड़ लिया। घाटों की बुर्जियों पर लोग कब्जे कर रहने लगे। दूषित पानी के लंबे समय से तक जमा हो जाने से काई और कीचड़ जमा हो गई। घाटों की शोभा बढ़ाने वाली रंग बिरंगी लाइटें दिवाली के बाद से नहीं जली हैं।

घाटों पर कलात्मक पत्थरों के फव्वारे भी टूटकर गिरने लगे हैं। बिहार घाट की कलात्मक बुर्जी में डेरा जमाए कृष्णदास ने बताया कि यहां सफाई कार्य नहीं होता है। दूषित पानी भरा होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं। दुर्गंध एवं मच्छर जनित बीमारी का डर सता रहा है। कूड़े के ढेर लगे हैं। वृंदावन जिन प्राचीन घाटों का केंद्र सरकार की हृदय योजना के तहत सौंदर्यीकरण किया गया, उनकी अनदेखी के कारण लाखों रुपये से लगे फव्वारे खराब हो रहे हैं। रात को घाटों की सुंदरता को और आकर्षक बनाने के लिए लगाई गईं महंगी लाइट भी शोपीस बनी हुई हैं।

घाटों पर जमा दूषित पानी और गंदगी से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सफाई कर्मचारी यदाकदा आते हैं। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त सीपी पाठक ने बताया कि घाटों की सफाई के निर्देश संबंधित विभाग को दिए हैं। खराब फव्वारे और लाइटों की मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए जलकर एवं बिजली विभाग को निर्देश दिए गए हैं।

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