मथुरा। स्टेशन पर यात्रियों के लिए पीने के पानी का संकट है। इससे तपती गर्मी में लोगों को हलक तर करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां हर दिन अप और डाउन दोनों ओर से 14 ट्रेनों का ठहराव होता है। इनसे रोजाना लगभग 1450 से 1500 यात्रियों का आवागमन होता है, हर दिन लगभग 12 से 14 हजार रुपये की आय भी रेलवे को प्राप्त होती है। बावजूद इसके स्टेशन पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टेशन परिसर में कहने को तो 14 प्याऊ के ढांचे बने हुए हैं। इनमें नल तो लगे हैं, लेकिन टंकी से पानी आने की व्यवस्था न होने से इनमें से से एक भी चालू हालत में नहीं है। कई में तो टोटियां तक नहीं हैं। 5 हैंडपंपों में से केवल 2 काम कर रहे हैं।
छाता में जिला मुख्यालय से 37 किलोमीटर दूर छाता रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। प्लेटफॉर्म पर नलों में गर्म पानी आ रहा है जबकि हैंडपंपों का पानी खारा है। स्टेशन पर लगे 5 हैंडपंप में से 3 खराब होकर शोपीस बने हुए हैं। उनमें भी खारा पानी आता है। स्टेशन पर पूछने पर बताया कि टोटियों को बंदरों ने तोड़ दिया है। जनसंपर्क अधिकारी संजय गौतम ने बताया कि छाता स्टेशन पर पेयजल व्यवस्था की जांच कराई जाएगी। खराब हुए नलों को ठीक कराया जाएगा।







